Saturday, October 24, 2020
120 कुल लेख

रवि अग्रहरि

अपने बारे में का बताएँ गुरु, बस बनारसी हूँ, इसी में महादेव की कृपा है! बाकी राजनीति, कला, इतिहास, संस्कृति, फ़िल्म, मनोविज्ञान से लेकर ज्ञान-विज्ञान की किसी भी नामचीन परम्परा का विशेषज्ञ नहीं हूँ!

ग्राउंड रिपोर्ट: चुन-चुन कर जलाई हिन्दुओं की दुकानें, ताहिर हुसैन के तहखाने वाली इमारत में थे 3000 गुंडे

चाँदबाग़ में एक पुल है, जिसके दूसरी तरफ़ मुस्लिम बहुल क्षेत्र हैं। स्थानीय लोग इस पुलिया को 'बॉर्डर' भी कहते हैं। ताहिर ने घर इस तरीके से बनाया है कि उससे चारों ओर का इलाक़ा कवर हो और अंदर जो भी लोग हों, वे एकदम सुरक्षित रहें।

शाहीन बाग़ की तल्ख़ हकीकत: विरोध का असली मकसद देश में अस्थिरता का माहौल पैदा कर सरकार गिराना

"अब ये प्रोटेस्ट CAA-NRC के विरूद्ध नहीं है। ये एक मौका है BJP और RSS के नेताओं को ये दिखा देने का कि मुसलमान कितना संगठित है। अब वो दिन दूर नहीं जब सब जगह हमारे लोग होंगे या हम जिसे चाहेंगे, जो हमारे लिए काम करेगा, उसी की सरकार बनेगी, हम सरकार बनाएँगे भी और गिराएँगे भी।"

शाहीन बाग़ में भारत के ‘टुकड़े-टुकड़े’ वाले पोस्टर: नक्शों में उत्तर-पूर्व को देश से कटा हुआ दिखाया

वहाँ भारत का ऐसा नक्शा लगाया गया है, जहाँ उत्तर-पूर्व भारत को देश से अलग दिखाया गया है। ऐसा दिखाया गया है कि उत्तर पूर्वी भारत को शेष भारत से अलग काट दिया गया है। इससे साफ़ मालूम होता है कि शाहीन बाग़ प्रदर्शन के पीछे देशविरोधी मानसिकता काम कर रही है।

हमने नहीं मारा, अल्लाह की बच्ची थी, वो ले गया: CAA प्रोटेस्ट का ‘चेहरा’ नन्ही बच्ची की ‘मौत’ पर मीडिया चुप

शाहीन बाग़ के एक प्रदर्शनकारी ने मृत बच्ची के सम्बन्ध में पूछे गए सवाल के जवाब में कहा- "वो अल्लाह की बच्ची थी, अल्लाह ने उसे बुला लिया।" कितनी आसानी से एक इंसानी ग़लती को उपरवाले के सिर मढ़ दिया गया और कोई मीडिया आउटरेज भी नहीं। उस बच्ची ने क्या अपनी सहमति दी थी कि मुझे सीएए-NRC के विरोध में प्रदर्शन करने ले चलो?

बसंत सिर्फ ऋतु नहीं, ज्ञान की उपासना से लेकर काम और मोक्ष का जीवंत उत्सव भी है

बसंत, बसंत पंचमी, मदनोत्सव, सरस्वती पूजा, कुम्भ का शाही स्नान, होली की शुरुआत, शमशान में मौत के तांडव पर भारी जीवन उत्सव- बसंत यह सब कुछ है।

मकर संक्रांति: जीवन की गतिशीलता का विज्ञान, चरम बोध और अप्रतिम आनंद का उत्सव

"आप गतिशीलता का तभी आनंद ले पाएँगे या उत्सव मना पाएँगे, जब आपका एक पैर स्थिरता में दृढ़ता से जमा होगा। और दूसरा गतिशील।" मकर संक्रांति का पर्व इस बात का भी उद्घोष है कि गतिशीलता का उत्सव मनाना तभी संभव है, जब आपको अपने भीतर स्थिरता का एहसास हो।

जब विवेकानंद ने कहा- संन्यासी हूँ तो क्या हृदय की कोमलता का भी त्याग कर दूँ

स्वामी विवेकानंद का जीवन बहुत लंबा न होने के बावजूद, सौभाग्य से विभिन्न समय पर लिखे गए पत्रों, संस्मरणों, लेखों और हँसी-ठिठोली से हम वंचित नहीं हुए हैं। खास बात ये है कि उनके लिखे कई पत्र, संस्मरण आज उनके न रहने के लगभग एक शताब्दी के बाद भी कई नए रहस्य उद्घाटित कर रहे हैं।

JNU: रजिस्ट्रेशन कराने के इच्छुक आम गरीब छात्रों को प्रताड़ित कर रहे हैं वामपंथी छात्र और प्रोफ़ेसर

"यहाँ विचारधारा थोपने का काम होता है, हेल्दी डिबेट की कोई बात ही नहीं बची है। सभी को वामपंथी विचार को ही अपना विचार बनाने के लिए दबाव बनाया जाता है। आप उनसे अलग रहेंगे तो वामपंथी छात्र और यहाँ के कई वामपंथी प्रोफ़ेसर आपका यहाँ रहना मुश्किल कर देंगे।"

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