Monday, May 25, 2020
6 कुल लेख

डॉ. सोनिया अनसूया

Studied Sanskrit Grammar & Ved from traditional gurukul (Gurukul Chotipura). Assistant professor, Sanskrit Department, Hindu College, DU. Researcher, Centre for North East Studies.

दर्थवामा रेन्थलेई: मिजोरम के एक अज्ञात राष्ट्र नायक, जिन्होंने नेताजी के नेतृत्व में लड़ी थी आजादी की लड़ाई

भारतीय स्वतंत्रता में अपना अद्भुत योगदान देने के लिए 15 अगस्त, 1972 को ‘ताम्रपत्र’ राष्ट्रीय पुरुस्कार से दर्थवामा को सम्मानित किया गया था।

धर्मनिरपेक्ष-महाकाव्यमिदं रामायणं धर्मव्यतिरिक्तं न विद्यते अपितु सर्वश्रेष्ठधर्मण: शिक्षक:

विपुले संस्कृतवाङ्मये रामायणं बीजरूपमहाकाव्यम्। उत्तरवर्तीनां काव्यानाम् उपजीव्य अयं ग्रन्थ:। न केवलं संस्कृतभाषायां अपितु अनेकासु भाषासु रामायाणमाश्रित्य काव्यानि प्रवृत्तानि। वस्ततस्तु रामायणमेव गीतिकाव्यस्य आधारभूतं काव्यं महाकाव्यानां विकासपरम्परायां आदिमं सोपानम्।

वैज्ञानिक पद्धति से कालविधान कारक: भारतीय मनीषा की सर्वोच्‍च उपलब्धियों में विशेष है ज्योतिष शास्त्र

'कल्प' वेद प्रतिपादित कर्मों का प्रायोगिक रूप प्रस्तुत करने वाला शास्त्र है। ज्‍योतिष उन कर्मों के अनुकूल समय आदि बताने वाला शास्त्र है।

जब तक हिन्दू बहुमत में है तभी तक रहेगा लोकतंत्र: भारत की आत्मा में श्रीराम बसे हैं, बाबर नहीं

गुरु नानक ने स्वयं अपनी आँखों से देखे बाबर के अत्याचारों का ऐसा दर्दनाक वर्णन किया है कि आज भी उसको पढ़ कर किसी का भी दिल पसीजे बिना नहीं रह सकता। उस अत्याचारी बादशाह की जामिया मिलिया जैसे राष्ट्रीय संस्थान में जयंती मनाई गई थी।

वेद-रामायण-महाभारत के भारतीय परम्पराओं वाले उत्तर-पूर्व को अंग्रेजों ने कैसे बनाया बर्बर और क्रूर

अंग्रेजों की औपनिवेशिक, विभाजनकारी तथा जनजातीय नीतियों और ईसाई शिक्षा ने यह गढ़ा कि इस क्षेत्र की सभी जनजातियाँ मंगोल हैं, क्रूर, जंगली तथा हिंसक हैं। परन्तु उनमें प्रचलित अनेक रीतियाँ, लोक-मान्यताएँ, जीवन-मूल्य तथा परम्पराएँ शेष भारत की परम्पराओं से लेशमात्र भी अलग नहीं हैं। इसका उल्लेख वेदों से लेकर महाभारत और रामायण तक में...

ईसाई नहीं बनने की सजा… 34000 वैष्णव हिंदुओं को अपने ही देश में 23 साल रहना पड़ा शरणार्थी बन कर!

कश्मीरी पंडितों जितनी ही दर्दनाक कहानी है ब्रू लोगों की। 23 वर्षों तक उनके पास न घर, न जमीन, न चिकित्सा और न ही उनके बच्चों को अभी तक कोई शैक्षिक सुविधा ही प्राप्त हुई। क्यों? क्योंकि ये वैष्णव हिन्दू हैं, अत्यन्त राष्ट्रवादी हैं और इन्हें ईसाई बनना मंजूर नहीं था। लेकिन इन्होंने इसकी भारी कीमत चुकाई।

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