Sunday, January 17, 2021
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#BanTandavNow: अमेज़ॉन प्राइम के हिंदूफोबिक प्रोपेगेंडा से भरे वेब-सीरीज़ तांडव के बहिष्कार की लोगों ने की अपील

अमेज़न प्राइम ने हाल ही में सैफ अली खान स्टारर राजनीतिक ड्रामा सीरीज़ ‘तांडव’ को अपने प्लेटफॉर्म पर रिलीज किया। जिसे निर्देशित किया है अली अब्बास ज़फ़र ने। अली अब्बास जफर की इस सीरीज में हिंदू देवी-देवताओं का अपमान किया गया है।

वेब सीरीज़ को कई समीक्षाओं के साथ ‘एंटी-हिंदू सीरीज़’ के रूप में दिखाने के साथ, कठोर समीक्षाओं का भी सामना करना पड़ा है। नेटिज़न्स ने कई उदाहरणों से यह साबित किया है, जहाँ वेब सीरीज ने हिंदू देवी-देवताओं का मजाक उड़ाते हुए या हिंदू समाज के विभिन्न संप्रदायों के बीच जानबूझकर विभाजन के बीज बोने का प्रयास करके हिंदुओं की भावनाओं को आहत किया है।

ट्विटर यूजर के एक सेक्शन ने तांडव में विवादित कंटेंट को लेकर हंगामा करना शुरू कर दिया। जिसके बाद ट्विटर पर #BanTandavNow और #BoycottTandav ट्रेंड करने लगा। सोशल मीडिया यूजर्स ने उस सीन को लेकर खास हंगामा किया जहाँ हिंदू देवता को अपमानजनक तरीके से दिखाया गया है।

नेटिजन्स ने हिंदूफोबिक कंटेंट के लिए तांडव की आलोचना की

पॉलिटिकल ड्रामा के पहले एपिसोड में जीशान अयूब भगवान शिव बन कुछ एक्टिंग कर रहे हैं। उस वीडियो में जीशान कैंपस के छात्रों की ‘आजादी’ की बात कर रहे हैं। वे कह रहे हैं कि इन छात्रों को देश में रहकर आजादी चाहिए, देश से आजादी नहीं चाहिए।

इंटरनेट पर वेब सीरीज की एक और छोटी सी क्लिप घूम रही है, जिसमें डिनो मोरिया, अभिनेत्री संध्या मृदुल को एक छोटी जाति के पुरुष के साथ डेट करने के लिए फटकारता है। वीडियो में, मृदुल, जो डिनो मोरिया से विवाहित हैं, अपने पति से अपने तलाक के कागजात पर हस्ताक्षर करने के लिए कहती है ताकि वह अभिनेता अनूप सोनी द्वारा निभाए गए चरित्र के साथ शादी के बंधन में बँध सके। अनूप सोनी को एक नीची जाति के व्यक्ति के रूप में चित्रित किया गया है, जबकि मृदुल और मोरिया दोनों उच्च जाति से हैं।

जब संध्या मृदुल अपने पति से तलाक के कागजात पर हस्ताक्षर करने के लिए कहती है, तो डीनो कहता है, “सुनो, जब एक छोटी जाति का आदमी ऊँची जाति की महिला को डेट करता है, तो वह उस एक महिला के माध्यम से सदियों के उत्पीड़न का बदला ले रहा होता है।”

इसके अलावा, वेब सीरीज में कई अन्य उदाहरण हैं जब अनूप सोनी द्वारा निभाए गए चरित्र को अन्य लोगों द्वारा अपमानित किया गया है, जो सामान्य रूप से उच्च जातियों से संबंधित है।

एक अन्य उदाहरण में, वेब सीरीज जोर देकर कहती है कि पुलिस के लिए मुसलमानों को मारना आसान है और कानून प्रवर्तन अधिकारियों की अखंडता पर सवाल उठाते हुए कहा जाता है कि कई मुस्लिम युवाओं को उनकी हत्याओं को जस्टिफाई करने के लिए आतंकवादी के रूप में ब्रांडेड किया जाता है।

दृश्य में, जब अभिनेता जीशान अयूब जेल में बंद एक व्यक्ति से दो गुमशुदा व्यक्तियों के बारे में पूछता है, तो वह जवाब देता है, “उन दो लोगों की हत्या कर दी गई। उनमें से एक सलीम था और दूसरा अनवर था। हमारे जैसे लोगों को मारना बहुत आसान है… एक दिन, ये लोग मुझे एक आतंकी संगठन से जोड़ देंगे और मेरी हत्या कर देंगे।”

सोशल मीडिया यूजर्स ने तांडव के बहिष्कार और  IMDB पर वेब सीरीज को डाउन-रेट करने की माँग की

हालाँकि, भारतीय हिंदू पुलिस की सबटल ब्रांडिंग, मुस्लिम विरोधी के रूप में सामने आना और नीची जातियों के खिलाफ इस्तेमाल किए जाने वाले नस्लभेदी टिप्पणियाँ सोशल मीडिया यूजर्स को रास नहीं आया और उन्होंने सोशल मीडिया पर इसका विरोध किया और वेब सीरीज को प्रतिबंधित करने की माँग की। उनमें से कई ने केंद्रीय मंत्री प्रकाश जावड़ेकर को भी टैग किया और उनसे अनुरोध किया कि वे अमेज़न प्राइम प्लेटफ़ॉर्म से हिंदूफोबिक वेब सीरीज को प्रतिबंधित करें।

वेब सीरीज में दिखाए गए दलित और हिंदुओं के खिलाफ दिखाए जाने को लेकर बीजेपी नेता कपिल मिश्रा ने भी ट्वीट किया। उन्होंने ट्वीट करते हुए अपने फॉलोवर्स से अनुरोध किया कि वो केंद्रीय मंत्री प्रकाश जावड़ेकर को इस संबंध में ईमेल करें।

कुछ ट्विटर यूजर्स ने हिंदुओं की धार्मिक भावनाओं को आहत करने के लिए वेब सीरीज के खिलाफ कानूनी कार्रवाई करने का भी आह्वान किया। बीजेपी प्रवक्ता गौरव गोयल ने चेतावनी दी कि अगर लोगों की भावनाओं को ठेस पहुँचती है तो वेब सीरीज के अभिनेताओं और निर्माताओं के खिलाफ शिकायत दर्ज की जाएगी।

इसके बाद, तांडव वेब सीरीज को IMDB पर नेटिज़न्स के आक्रोश का सामना करना पड़ा, जहाँ लोगों ने शो की तीखी समीक्षा की। तांडव की हिंदूफ़ोबिक सामग्री से चिंतित, सोशल मीडिया यूजर्स ने आईएमडीबी पर वेब सीरीज को न्यूनतम रेटिंग दी और दूसरों से भी ऐसा ही करने का आग्रह किया।

तांडव वेब सीरीज का ओवर ऑल IMDb स्कोर 3.9 है, जिसमें केवल 6,674 यूजर्स ने अपनी रेटिंग दर्ज की है। शो की समीक्षा करने वालों के एक बड़े वर्ग ने इसे 10 में से 1 स्टार की न्यूनतम रेटिंग दी है।

OTT प्लेटफार्म हिंदू विरोधी सामग्री को प्रसारित करता है

ऐसा प्रतीत होता है कि हिंदू देवी-देवताओं के बारे में घृणित सामग्री प्रसारित करने के लिए भारत में ओवर-द-टॉप (ओटीटी) मीडिया सेवा प्रदाताओं के बीच एक तरह की प्रतिस्पर्धा है कि कौन कितना अधिक एंटी हिंदू कंटेंट क्रिएट कर सकता है। पिछले साल, नेटफ्लिक्स की नई तेलुगु फिल्म ‘कृष्णा और उसकी लीला’ के बाद एक विवाद खड़ा हो गया था, जिसमें कृष्ण नाम का एक पुरुष चरित्र दिखाया गया था, जिसमें कई महिलाओं के साथ यौन संबंध थे, जिनमें से एक राधा नाम की लड़की भी थी।

अमेजन प्राइम, Zee5 और अन्य पर भी हिंदूफोबिक सामग्री के लिए एक मंच प्रदान करने का आरोप लगाया गया है। अनुष्का शर्मा ने पिछले साल अमेजन प्राइम पर रिलीज हुई वेब सीरीज ‘पाताललोक’ का निर्माण किया था, जिसे भी हिंदुओं और हिंदू धर्म को नाराज करने वाली अपनी सामग्री के लिए आक्रोश का सामना करना पड़ा था।

‘अगर तलोजा वापस गए तो मुझे मार डालेंगे, अर्नब का नाम लेने तक वे कर रहे हैं किसी को टॉर्चर के लिए भुगतान’: पूर्व BARC CEO का परिवार

मुंबई पुलिस और सिटी क्राइम ब्रांच ने इस साल की शुरुआत में फर्जी टीआरपी घोटाले में 15वीं गिरफ्तारी की। BARC COO रोमिल रामगढ़िया को गिरफ्तार करने के कुछ दिनों बाद, उन्होंने ब्रॉडकास्ट ऑडियंस रिसर्च काउंसिल (BARC) के पूर्व CEO पार्थो दासगुप्ता को 25 दिसंबर 2020 को गिरफ्तार किया।

पुलिस के अनुसार, दासगुप्ता को पुणे ग्रामीण से गिरफ्तार किया गया है जो रायगढ़ पुलिस थाने के अधिकार क्षेत्र में है। दासगुप्ता जब तलोजा जेल में बंद थे, तभी मुंबई पुलिस ने एक और प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित किया था। इस दौरान उन्होंने आरोप लगाया कि पार्थो दासगुप्ता ने रिपब्लिक टीवी के पक्ष में टीआरपी बढ़ाने के लिए अर्नब गोस्वामी से पैसे लिए थे। पुलिस ने दावा किया कि उन्हें एक घड़ी, कुछ चाँदी के आभूषण मिले हैं। इसके साथ ही उन्होंने दावा किया कि अर्नब गोस्वामी ने दासगुप्ता को लगभग 30 लाख रुपए दिए थे।

आज (जनवरी 16, 2021) BARC के पूर्व सीईओ की बेटी बेटी प्रत्यूषा ने एक पत्र के माध्यम से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से गुहार लगाई है। उन्होंने इस पत्र में अपने पिता की ज़िंदगी बचाने की अपील की है। प्रत्यूषा का कहना है कि उनके पिता शुक्रवार (जनवरी 15, 2021) से ही बेहोशी की अवस्था में एक अस्पताल में भर्ती हैं। वो फ़िलहाल TRP स्कैम में न्यायिक हिरासत में हैं। प्रत्यूषा का कहना है कि जनवरी 15, 2021 को दोपहर 1 बजे उन्हें अस्पताल लेकर जाया गया और अगले दिन 3 बजे दोपहर को परिजनों को इसकी सूचना दी गई, अर्थात 15 घंटे तक इस बात को छिपा कर रखा गया। जिसके बाद वो जेजे अस्पतलात पहुँचे।

उन्होंने बताया कि जब वो अस्पताल पहुँचीं तो उनके पिता इमरजेंसी रूम में पड़े हुए थे और उन्हें ओढ़ाने के लिए एक बेडसीट तक नहीं था। प्रत्यूषा ने सोशल मीडिया के माध्यम से शेयर किए गए पत्र में लिखा है कि उनके पिता कुछ कहना चाहते थे और बातें करना चाहते थे, लेकिन वो कुछ बोल नहीं पा रहे थे। उनका शुगर लेवल भी काफी उच्च स्तर (516) पर पहुँच गया था। डायबिटीज, हाइपरटेंशन और एंकिलॉजिंग स्पॉन्डिलाइटिस नामक एक ऑटो इम्यून डिसऑर्डर जैसी बीमारियों से वो कई सालों से पीड़ित हैं।

उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी को अपना संदेश देते हुए कहा, “सर, मेरी आपसे अपील है कि कृपया हमारे खर्च पर एक प्रतिष्ठित अस्पताल में उचित चिकित्सा उपचार की अनुमति देकर मेरे पिता की जान बचाएँ। उच्चतम स्तरों पर हस्तक्षेप के बिना, मैं अब उनके जीवन को लेकर भयभीत हूँ।”

ऑपइंडिया ने स्थिति की वास्तविकता को जानने के लिए पार्थो दासगुप्ता के परिवार से संपर्क किया। परिवार ने ऑपइंडिया को बताया कि दासगुप्ता 15 जनवरी 2021 की दोपहर के बाद से गंभीर हालत में थे और उन्हें जेजे अस्पताल ले जाया गया। हालाँकि, तलोजा जेल के अधिकारियों ने नवी मुंबई पुलिस को उसके बारे में कोई जानकारी नहीं दी। लगभग 15 घंटे तक उनकी हालत के बारे में परिवार से संपर्क नहीं किया गया। दोपहर बाद, जब दासगुप्ता को जेजे अस्पताल ले जाया गया, तब सत्र न्यायालय में जमानत की सुनवाई चल रही थी, जहाँ उनकी बेटी और पत्नी दोनों मौजूद थे।

ऑपइंडिया से बात करते हुए प्रत्यूषा ने सवाल किया कि जब दासगुप्ता अस्पताल में बेहोश थे, तब अधिकारियों ने परिवार को इतने समय तक सूचित क्यों नहीं किया। उन्हें संदेह है कि अधिकारियों ने उस समय उनके गंभीर स्वास्थ्य के बारे में जानकारी छिपा दी थी क्योंकि उसकी स्वास्थ्य स्थिति जमानत के लिए वैध होगी और पुलिस यह नहीं चाहती थी कि सुनवाई के दौरान ही ये जानकारी सामने आए।

प्रत्यूषा ने उस दयनीय स्थिति के बारे में बताया, जिस अवस्था में उन्होंने अपने पिता को देखा था। उन्होंने कहा कि जब वे 16 तारीख को अस्पताल पहुँची, तो उनके पिता के ऊपर कोई कंबल नहीं था और वह अर्ध-बेहोशी की हालत में थे। इसके अलावा, उनके पास एक तकिया भी नहीं था, जिसका वजह से उनका स्पॉन्डिलाइटिस बीमारी की स्थिति और बदतर हो गई थी।

उन्होंने कहा कि अस्पताल में कर्मचारियों ने उनसे पूछा कि वे पहले अस्पताल क्यों नहीं पहुँचे, क्योंकि उन्हें गंभीर स्थिति में भर्ती कराया गया था, उनका शुगर लेवल 500 से अधिक था। अधिकारियों ने कहा कि वे परिवार से संपर्क नहीं कर सकते क्योंकि उनके पास उनके संपर्क नंबर नहीं थे।

प्रत्यूषा ने खुलासा किया कि पिछले 1 सप्ताह से वह बार-बार तलोजा जेल अधिकारियों को ईमेल कर रही थी कि पार्थो दासगुप्ता के साथ वीडियो कॉल करने की अनुमति दी जाए। हालाँकि, उनकी बार-बार की कोशिशों के बावजूद जेल से कोई जवाब नहीं मिला। इन ईमेल में उन्होंने स्पष्ट रूप से अपने नंबर का उल्लेख किया था।

यहाँ वो ईमेल हैं जो प्रत्यूषा ने तलोजा जेल को भेजे थे।

Email by the daughter of Partho Dasgupta to Taloja Jail
Email by the daughter of Partho Dasgupta to Taloja Jail
Email by the daughter of Partho Dasgupta to Taloja Jail
Email by the daughter of Partho Dasgupta to Taloja Jail
Email by the daughter of Partho Dasgupta to Taloja Jail
Email by the daughter of Partho Dasgupta to Taloja Jail

जैसा कि देखा जा सकता है कि पार्थो दासगुप्ता के परिवार द्वारा तलोजा जेल अधिकारियों को तीन ईमेल भेजे गए थे – 8 जनवरी को, 11 जनवरी को और 15 जनवरी को। परिवार उनकी स्वास्थ्य स्थिति का हवाला देते हुए बात करने की भीख माँग रहा था, क्योंकि उन्हें कानूनी रूप से इसकी अनुमति दी गई थी। हालाँकि, जेल अधिकारियों ने कोई जवाब नहीं दिया।

यह भी ध्यान रखना आवश्यक है कि इन ईमेलों में, उनकी बेटी के फोन नंबर का स्पष्ट रूप से उल्लेख किया गया था और इस प्रकार, जेल अधिकारियों के लिए यह दावा करना संदेहास्पद है कि उन्हें नहीं पता था कि परिवार से कैसे संपर्क किया जाए।

‘मुंबई पुलिस ने अर्नब गोस्वामी का नाम लेने के लिए उन्हें मानसिक और शारीरिक रूप से प्रताड़ित करने के लिए तलोजा जेल के अंदर किसी को भुगतान कर रही है’

ऑपइंडिया ने पार्थो दासगुप्ता की पत्नी समरजनी दासगुप्ता से भी बात की। उन्होंने कहा कि उनकी बेटी 16 जनवरी 2021 की दोपहर तक अस्पताल में थी जब वह वकील के पास गई थी। परिवार ने आरोप लगाया है कि उन्हें केवल कुछ समय के लिए पार्थो से मिलने की अनुमति दी गई थी, जिसके बाद उन्हें जल्दी से आईसीयू में ले जाया गया। उसके बाद, परिवार को दासगुप्ता की स्थिति के बारे में कोई जानकारी नहीं है। अधिकारियों ने कथित तौर पर परिवार को बताया कि चूँकि दासगुप्ता एक कैदी है, इसलिए उसकी स्थिति और उसके ठिकाने की जानकारी परिवार को नहीं दी जा सकती।

समरजनी ने कहा कि पार्थो दासगुप्ता को मोहरे के रूप में इस्तेमाल किया जा रहा है और राजनीतिक प्रतिशोध के मामले में फँसाया गया। उन्होंने कहा, “मैं खुद को असहाय महसूस कर रही हूँ, मैं किसी को नहीं जानती, वह मृत्युशैय्या पर हैं।”

उन्होंने आरोप लगाते हुए कहा कि जब वह दासगुप्ता से अस्पताल में मिलीं, तो उन्होंने उन्हें बताया कि उन्हें जेल में शारीरिक और मानसिक रूप से प्रताड़ित किया जा रहा है। इसके अलावा, उन्होंने कहा कि पार्थो ने अपनी दबी आवाज़ में कहा कि मुंबई पुलिस अर्नब गोस्वामी और रिपब्लिक टीवी को फँसाने के लिए उन्हें मानसिक और शारीरिक रूप से प्रताड़ित करने के लिए तलोजा जेल के अंदर किसी को भुगतान कर रही है।

समरजनी ने दावा किया कि पार्थो ने व्यक्ति को यातना देने के लिए भुगतान किए जाने के बारे में कहा, “यह तब तक खत्म नहीं होगा जब तक आप अर्नब गोस्वामी का नाम नहीं लेंगे।” यह पूछे जाने पर कि क्या यह व्यक्ति एक कैदी था या जेल अधिकारी था, समरजनी ने कहा, “पार्थो भयानक स्थिति में थे और वह मुझे केवल इतना ही बता पाए।”

जब उन्हें उनके कमरे से बाहर ‘निकाला’ जा रहा था, तो समरजनी कहती हैं कि पार्थो ने पुकारा, “मुझे छोड़कर मत जाओ… अगर वे मुझे तलोजा जेल वापस ले जाते हैं, तो वे मुझे मार डालेंगे। वे कहेंगे कि सब कुछ ठीक है और मुझे वापस ले जाएँगे और मार डालेंगे।”

मुंबई पुलिस द्वारा पार्थो दासगुप्ता पर रिपब्लिक से 30 लाख रुपए लिए जाने के आरोप पर टिप्पणी करते हुए समरजनी ने कहा कि उनके पति ने एक साल में 4 करोड़ रुपए कमाए। वो सिसकते हुए कहती है, “क्या इससे भी आपको समझ में नहीं आता है कि क्या एक साल में 4 करोड़ रुपए कमाने के बाद वह खुद को 30 लाख रुपए में बेच देंगे? वह मौत के मुँह में हैं। वो उन्हें मार डालेंगे। कृपया उन्हें बचाने में हमारी मदद करें।”

पूर्व BARC सीईओ पार्थो दासगुप्ता के परिवार ने बॉम्बे हाई कोर्ट में याचिका दायर की

समरजनी दासगुप्ता ने अब बॉम्बे हाईकोर्ट में एक याचिका दायर कर पार्थो और उनकी गंभीर स्वास्थ्य स्थिति के कारण होने वाली मानसिक और शारीरिक यातना का विवरण दिया है।

हलफनामे में, वह कहती है कि जब वह अस्पताल पहुँची, तो ‘स्ट्रेचर पर खून था’ जहाँ पर पार्थो लेटे हुए थे। उनके पैर बर्फ से ठंडे थे। उन्होंने कहा कि यहाँ तक कि डॉक्टरों ने उनकी तत्काल चिकित्सा ध्यान देने के उसके अनुरोध को नजरअंदाज कर दिया। वह आगे हलफनामे में कहती है कि 16 की सुबह 6:30 बजे आईसीयू में ले जाया गया, जबकि वह 15 जनवरी की दोपहर से अस्पताल में थे। वह दावा करती है कि उसके बाद भी उन्हें उनकी बीमारी या स्वास्थ्य की स्थिति के बारे में सूचित नहीं किया गया है।

यह कहते हुए कि उनका जीवन खतरे में है, वह अपने पति पार्थो दासगुप्ता को तत्काल चिकित्सा के लिए अदालत से आग्रह करती है। वह कहती हैं कि चूँकि पीडी हिंदुजा अस्पताल के डॉक्टरों को उनकी बीमारियों के बारे में पता है, अगर उन्हें अस्पताल नहीं भेजा गया, तो उन्हें डर है कि वह अपनी जान गँवा सकते हैं। वह यह कहकर प्रार्थना समाप्त करती है कि उनकी वर्तमान स्वास्थ्य स्थिति लगातार शारीरिक और मानसिक शोषण के कारण है जिसे वह तलोजा जेल में रखा गया है।

फेक टीआरपी घोटाला

अक्टूबर में, मुंबई पुलिस ने कुछ टीवी चैनलों के खिलाफ कुछ सनसनीखेज दावे किए थे कि वे टीआरपी रेटिंग्स में हेरफेर कर रहे थे। एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में, मुंबई पुलिस कमिश्नर ने कहा था कि रिपब्लिक टीवी सहित तीन टीवी चैनल BARC के दर्शकों के डेटा में हेरफेर करने में शामिल थे, जिन घरों में बार-ओ-मीटर, टीवी व्यूअरशिप को ट्रैक करने वाले डिवाइस इंस्टॉल किए गए हैं।

पुलिस ने विशेष रूप से उल्लेख किया था कि हंसा रिसर्च ने पुलिस में शिकायत दर्ज की थी। हंसा ग्रुप एक ऐसा संगठन है जिसने BARC के लिए TRP रिकॉर्ड करने के लिए उपकरणों को विनियमित किया है। दिलचस्प बात यह है कि हंसा रिसर्च द्वारा दर्ज की गई इस एफआईआर में एक बार भी रिपब्लिक टीवी का जिक्र नहीं किया गया था। जिस चैनल का जिक्र कई बार किया गया वह इंडिया टुडे था।

जाँच के दौरान, कई सबूत और गवाह सामने आए कि कथित मुंबई पुलिस रिपब्लिक टीवी के खिलाफ बोलने के लिए उन्हें डरा रही है, जिसमें हंसा के अधिकारी भी शामिल हैं। हंसा ने यह भी शिकायत की है कि उन्हें मुंबई पुलिस द्वारा रिपब्लिक टीवी के खिलाफ बयान देने के लिए परेशान किया जा रहा है।

राम मंदिर निर्माण की तारीख से क्यों अटकने लगी विपक्षियों की साँसें, बदलते चुनावी माहौल का किस पर कितना होगा असर?

राम मंदिर निर्माण पूरा होने की तारीख सामने आने से विपक्ष में घबराहट क्यों है? राम मंदिर आंदोलन के शुरू होने के साथ भाजपा-विरोधी एक सुर में भाजपा के नारे का मजाक उड़ाते हुए कहते थे- ‘मंदिर वहीं बनाएँगे, लेकिन तारीख नहीं बताएँगे’। अब जबकि राम मंदिर निर्माण के पूरा होने की तिथि सामने आ गई है तो उन्हीं भाजपा विरोधियों की साँस अटकने लगी है। विपक्षी दल यह मानकर बैठे हैं कि भाजपा मंदिर निर्माण 2024 के ठीक पहले पूरा करवाकर इसे आगामी लोकसभा चुनाव में मुद्दा बनाएगी।

राम मंदिर के लिए देश भर में श्रीराम जन्मभूमि निधि समर्पण अभियान की शुरुआत 15 जनवरी को हो गई है। राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने राम मंदिर के लिए सबसे पहला चंदा दिया। कोविंद ने 5,00,100 रुपए की धनराशि दान दी। इसी के साथ राम मंदिर निर्माण के पूरा होने की तारीख भी नजदीक आ गई है।

राम मंदिर ट्रस्‍ट के महासचिव चंपत राय ने रायबरेली में हुए कार्यक्रम में 39 महीने के अंदर मंदिर बना देने का ऐलान कर दिया है। चंपत राय के अनुसार, लोकसभा चुनाव 2024 से पहले अयोध्‍या में राम मंदिर बन जाएगा। राम मंदिर निर्माण पूरा होने की तारीख सामने आते ही विपक्षी दलों में घबराहट फैल गई है।

2024 आम चुनाव से पहले हो जाएगा राम मंदिर निर्माण 

कई दशकों पुराने अयोध्या मामले पर सुप्रीम कोर्ट का फैसला आने के बाद से ही राम मंदिर के लिए तैयारियाँ शुरू हो गई थीं। ट्रस्ट बनने के साथ ही राम मंदिर निर्माण को लेकर अन्य चीजें भी तय हो गई। वहीं, अब राम मंदिर निर्माण पूरा होने की तारीख और निधि समर्पण अभियान की शुरुआत ने सियासी हलकों में भूचाल ला दिया है। 

इसके पीछे कई कारण हैं, लेकिन सबसे बड़ा कारण ‘तारीख’ ही है। कॉन्ग्रेस समेत लगभग सभी विपक्षी दलों ने ‘सुप्रीम फैसला’ आने से पहले तक भाजपा के चुनावी घोषणा पत्र में शामिल राम मंदिर निर्माण के मुद्दे को लेकर हमेशा ही सवाल उठाए हैं। 

भाजपा, आरएसएस और अन्य हिंदूवादी संगठनों के कार्यकर्ताओं के नारे ‘रामलला हम आएँगे, मंदिर वहीं बनाएँगे’ के आगे भाजपा विरोधी पार्टियों ने ‘तारीख नहीं बताएँगे’ का तुकांत जोड़ दिया था। यही ‘तारीख’ अब विपक्ष के गले की फाँस बनती नजर आ रही है।

चेंजमेकर के रूप में स्थापित हुई भाजपा

2014 और 2019 के लोकसभा चुनावों में लगातार दो बार बहुमत से ज्यादा सीटें पाकर भाजपा नीत एनडीए की सरकार बन चुकी है। भाजपा अपने चुनावी घोषणा पत्र के कई बड़े और तथाकथित विवादित मुद्दों का हल निकाल चुकी है। 

लोग मानें या ना मानें, लेकिन वो चाहे तीन तलाक का मामला हो, कश्मीर से धारा 370 और 35A हटाने का मामला हो या शरणार्थियों को नागरिकता देने के कानून का, भाजपा ने खुद को ‘चेंजमेकर’ के रूप में स्थापित कर लिया है। 

सर्जिकल स्ट्राइक और एयर स्ट्राइक के बाद आतंकवाद को लेकर ‘जीरो टॉलरेंस’ की नीति को लेकर शायद ही कुछ कहने की जरूरत पड़े। खैर, ये हुई भाजपा के घोषणा पत्र के वादों की बात, अब चलते हैं दूसरी ओर।

बन सकते हैं कई चुनावी समीकरण 

भाजपा ने दक्षिण और पूर्वी भारत के राज्यों में दस्तक देने के साथ अपनी भौगोलिक पहुँच के विस्तार की शुरुआत भी कर दी है। 2021 में तमिलनाडु, पश्चिम बंगाल, केरल, असम और पुडुचेरी (केंद्र शासित प्रदेश) में विधानसभा चुनाव होने हैं। 

पश्चिम बंगाल में भाजपा सत्ता में आने के लिए हर सियासी समीकरण बनाने और रणनीतियाँ अपनाने में जुटी हुई है। पश्चिम बंगाल में 2011 के विधानसभा चुनाव में केवल 4 फीसदी वोट हासिल करने वाली भाजपा, 2016 के चुनाव में 10 फीसदी वोटों तक पहुँच गई। 

वहीं, 2019 लोकसभा चुनाव में चमत्कारिक प्रदर्शन करते हुए 40 फीसदी वोटरों का समर्थन हासिल कर लिया। ऐसे में इस साल होने वाली विधानसभा चुनाव में भाजपा के प्रदर्शन पर सभी की निगाहें टिकी हैं।

असम में भाजपा और सहयोगी दलों के गठबंधन के सामने विपक्षी दलों के सामने अपनी सत्ता बचाने की चुनौती है। फिलहाल, वहाँ भाजपा नीत एनडीए की सरकार मजबूत स्थिति में नजर आ रही है। 

दक्षिण भारत में कर्नाटक को छोड़ दें तो, भाजपा का तमिलनाडु और केरल में कोई खास जनाधार नजर नहीं आता है। लेकिन, स्थानीय चुनावों में भाजपा ने अपनी स्थिति थोड़ी-बहुत मजबूत कर ली है। 

2016 के ग्रेटर हैदराबाद नगर निगम चुनाव में महज चार सीटें हासिल करने वाली भाजपा ने बीते साल 48 सीटों पर अपना परचम लहराया है। इसे भाजपा की बड़ी उपलब्धि माना जा सकता है। लेकिन, पार्टी को ऐसा प्रदर्शन आगे भी जारी रखना होगा।

राम मंदिर से बदल सकते हैं कई विधानसभा चुनाव के नतीजे

अब आते हैं सबसे खास बात पर, राम मंदिर निर्माण के लिए चलाए जा रहे निधि समर्पण अभियान में 13 करोड़ परिवारों तक पहुँचने का लक्ष्य रखा गया है। निधि समर्पण अभियान 27 फरवरी तक चलाया जाएगा। 

इसके तहत भाजपा, विहिप और आरएसएस के कार्यकर्ता देश भर में घर-घर जाकर चंदा एकत्रित करेंगे। इस अभियान को 2024 लोकसभा चुनाव से पहले भाजपा की घर-घर में पहुँच बनाने की तैयारी के रूप में देखा जा रहा है। 

खासकर हिंदी भाषी राज्यों में इस अभियान का व्यापक असर देखने को मिल सकता है। साथ ही 2024 के आम चुनाव से पहले हर साल होने वाले राज्यों के विधानसभा चुनावों पर भी इसका असर पड़ेगा। 2022 के फरवरी-मार्च में देश के सबसे बड़े राज्य उत्तर प्रदेश समेत उत्तराखंड, पंजाब, गोवा और मणिपुर में विधानसभा चुनाव होंगे। 

इनमें उत्तर प्रदेश के अलावा चार राज्यों में भाजपा और कॉन्ग्रेस के बीच सीधा मुकाबला होना है। वहीं, 2022 के नवंबर-दिसंबर में गुजरात और हिमाचल प्रदेश में विधानसभा चुनाव होंगे। यहाँ भी कॉन्ग्रेस और भाजपा के बीच ही मुकाबला होना है। 2023 में पूर्वोत्तर के तीन राज्यों मेघालय, नगालैंड और त्रिपुरा में विधानसभा चुनाव होंगे। ऐसे में राम मंदिर निर्माण की तारीख के ऐलान से विपक्ष की बेचैनी बढ़ना लाजिमी है।

वीडियो: ग्लास-कैरी बैग पर ‘अली’ लिखा होने से मुस्लिम भीड़ का हंगामा, कहा- ‘इस्लाम को लेकर ऐसी हरकतें, बर्दाश्त नहीं करेंगे’

कानपुर में एक कैफे है, जिसका नाम है- ‘अली-कैफे’। इसने खाना पैक करके ले जाने के लिए जो कैरी बैग और ग्लास बनाया उस पर भी उसने ‘अली-कैफे’ लिखवाया। जिसके बाद मुस्लिमों की भीड़ ने रेस्टोरेंट में जाकर जमकर हंगामा किया। सोशल मीडिया पर इसका वीडियो काफी तेजी से वायरल हो रहा है। 

वीडियो में साफ तौर पर देखा जा सकता है कि मुस्लिमों की भीड़ कैफे के स्टाफ पर इस बात को लेकर भड़क रहा है। मौलाना को कहते हुए सुना जा सकता है, “हम अपने बुजुर्गों की शान में की गई गुस्ताखी को कतई बर्दाश्त नहीं करेंगे। ये यहाँ पर रखा क्यों गया है? 10 लाख- 15 लाख, जितने भी रुपए का है ये, हम तत्काल देंगें, यहीं पर। आप लोग इस्लाम को लेकर इस तरह की हरकतें कर रहे हैं, हम इसे कतई बर्दाश्त नहीं करेंगे। आप लोग भी इंसान हो, आप ही बताओ, लोग इसे खाकर फेकेंगे तो ये पैर के नीचे आएगा या नहीं। हम जात की बात बर्दाश्त कर लेंगे, लेकिन हमारे बुजुर्गों की शान में कोई गुस्ताखी करेगा, हम कतई कम्प्रोमाइज नहीं करेंगे।”

मौलाना आगे कहता है, “जब मामूर साहब ने, शाह काजी साहब ने आपसे कह दिया था तो आपको रखना ही नहीं चाहिए। इसको तत्काल में ठंडा कराना चाहिए था। एक मिनट में मोबाइल ग्रुप में चलने लगता है। किसी ने यहाँ से फोटो खींच कर इसे व्हाट्सएप पर डाल दिया है और वह चल रहा है। किस तरीके के आप लोग इनसान हैं? आप बताइए ये गलत है कि नहीं है?”

इस बीच मौलाना के साथ आए एक अन्य शख्स सारे पैकेट को लेकर साथ जाने की बीत कही। उसने यह भी कहा कि इसका जितना भी बिल होगा वो अभी के अभी यहीं पर भर देंगे। चाहे वो 50 लाख ही क्यों न हो। इसके बाद उन लोगों ने डस्टबिन में पड़े पैकेट का भी वीडियो बनाया। हमने कैफे के मालिक से बात करने की कोशिश की, लेकिन संपर्क नहीं हो पाया।

इस वीडियो को ट्विटर पर शेयर करते हुए कालीचरण महाराज ने लिखा, “हिंदू देवी देवताओं के नाम पर लक्ष्मी बम, अगरबती, बीड़ी, सिगरेट, तंबाकू से लेकर न जाने क्या-क्या बिकते रहे हैं पर हिंदू कभी भी अपने देवी देवता के अपमान पर इन मुस्लिमो की तरह एकता नहीं दिखाते। ‘अली’ नाम लिखे हुए ग्लास और पैकेट को देख गुस्से में आए मौलाना।”

इस वीडियो पर तमाम लोगों ने अपनी प्रतिक्रियाएँ दी। एक सोशल मीडिया यूजर ने लिखा, “यही तो सोचने वाली बात महाराज कि ग्लास, थैली पर अली का नाम लिखने पर ये लोग मारने-मरने पर उतारू हो जाते है और एक हिंदू हैं जिनके आराध्य का कभी अमेज़न वाले, कभी वेब सीरीज बनाने वाले मजाक बनाते हैं फिर भी आँखें नही खुलती है। तो कहीं न कहीं दोष तो हिंदू का ही है।”

एक अन्य यूजर ने लिखा, “ये लोग ट्विटर पर ही नही सड़कों पर उतर आते हैं अपने धर्म के लिए और हिन्दू ट्विटर पर हिन्दू धर्म, देवी देवताओं के अपमान की पोस्ट डाल कर लाइक ओर RT खेलते है, फॉलोवर्स बढ़ाते है। कुछ नही हो सकता।”

रक्षा विशेषज्ञ के तिब्बत पर दिए सुझाव से बौखलाया चीन: सिक्किम और कश्मीर के मुद्दे पर दी भारत को ‘गीदड़भभकी’

भारत के मशहूर रक्षा विशेषज्ञ ब्रह्मा चलानी ने तिब्बत पर भारत सरकार को सुझाव दिया था। चीन उस सुझाव से बौखलाया हुआ नज़र आ रहा है, चीनी सरकार के मुखपत्र ग्लोबल टाइम्स में भारत को कश्मीर और सिक्किम को लेकर धमकी दी गई है। ग्लोबल टाइम्स में चीनी विशेषज्ञ का हवाला देते हुए ऐसा कहा गया है कि अगर भारत ने तिब्बत को लेकर अपनी यथास्थिति में बदलाव किया, तो चीन सिक्किम को भारत का हिस्सा मानने से इंकार कर देगा। इसके अलावा चीन कश्मीर के मुद्दे पर भी अपना कथित तटस्थ रवैया बरकरार नहीं रखेगा। 

दरअसल टाइम्स ऑफ़ इंडिया में रक्षा मामलों के जानकार ब्रह्मा चेलानी का एक लेख प्रकाशित हुआ था। इस लेख के भीतर ब्रह्मा चेलानी ने भारत को सुझाव दिया था, जिसके मुताबिक़ अमेरिका ने तिब्बत को लेकर क़ानून बनाया था। भारत को इस क़ानून का चीन के खिलाफ़ उपयोग करना चाहिए जिसे भारत ने पहले खो दिया था। ‘तिब्बत’ चीन का संवेदनशील पहलू है, अगर भारत चीन के इस असंवेदनशील रवैये का लाभ नहीं लेना चाहता है तो कम से कम तिब्बत को लेकर चीन की नीतियों का समर्थन करना बंद कर ही सकता है। 

यह सुझाव चीन की सरकार को गुस्से की आग में झोंकने के लिए पर्याप्त था। ग्लोबल टाइम्स ने अपनी ख़बर में चीनी विशेषज्ञ लांग शिंगचुन के हवाले से बताया कि चेलानी शुरुआत से ही ‘चीन विरोधी’ रहे हैं और हमें इस बात पर शक है कि वो अमेरिका के गैरआधिकारिक प्रवक्ता हैं।

चेलानी अमेरिका के हितों को ध्यान में रखते हुए दावे कर रहे हैं और भारत के राजनियक नीतियों को अमेरिकी नीतियों की तर्ज पर आगे बढ़ाने का प्रयास कर रहे हैं। कुल मिला कर चेलानी द्वारा लिखा गया लेख भारत के हितों को नहीं लेकिन अमेरिका के हित में ज़रूर मददगार साबित होगा। 

चीनी विशेषज्ञ शिंगचुन का कहना था कि इस तरह के सुझावों से सिर्फ भारत और चीन के रिश्तों पर नकारात्मक प्रभाव पड़ रहा है। इससे किसी भी सूरत में भारत का हित सुनिश्चित नहीं होता है। अमेरिकी क़ानून का ज़िक्र करते हुए आगे कहा गया कि अमेरिका चीन के हितों को प्रभावित करने का लगातार प्रयास कर रहा है।

भारत तिब्बत के मुद्दे पर अमेरिकी क़ानून में शामिल नीतियों का पालन नहीं करेगा। भारत और चीन पड़ोसी मुल्क हैं और भारत की अपनी कमजोरी है। अमेरिका सिर्फ चीन को नीचा दिखाने की कोशिश कर रहा है, तिब्बत को चीन से अलग नहीं किया जा सकता है। अगर अमेरिका ऐसा नहीं कर पाया तो भारत यह कैसे कर सकता है।      

जानिए कौन है जो बायडेन की टीम में इस्लामी संगठन से जुड़ी महिला और CIA का वो डायरेक्टर जिसे हिन्दुओं से है परेशानी

जो बायडेन ने कश्मीरी मूल की समीरा फ़ज़ीली को नेशनल इकनॉमिक काउंसिल (National Economic Council) का डिप्टी डायरेक्टर नियुक्त किया है। इसके पहले समीरा फ़ेडरल रिज़र्व बैंक ऑफ़ अटलांटा (Federal Reserve Bank of Atlanta) के इंगेजमेंट फॉर कम्युनिटी एंड इकनॉमिक डेवलपमेंट (Engagement for Community and Economic Development) की डायरेक्टर रह चुकी हैं। 

इस मुद्दे पर चिंता का पहलू ये है कि समीरा कश्मीरी अलगाववाद को बढ़ावा देने वाले इस्लामी संगठन स्टैंड विथ कश्मीर (SWK) की कथित तौर पर सदस्य हैं। अगस्त 2019 के दौरान जम्मू कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाए जाने के बाद काउंसिल ऑफ़ अमेरिकन इस्लामिक रिलेशन (CAIR) ने समीरा का परिचय SWK की सदस्य के रूप में कराया था। 

समीरा ने अपने बयान में कहा था, “हम लोगों से निवेदन करना चाहते हैं कि वह कश्मीर की जनता के समर्थन में आगे आएँ और उनके लिए एकजुटता दिखाएँ। क्योंकि भारत और अमेरिका से लेकर यूरोप तक इस्लामोफ़ोबिया और तानाशाही बढ़ती जा रही है। आप सभी आगे आइए: मानवाधिकार, अंतरराष्ट्रीय क़ानून और लोकतंत्र का समर्थन करिए।” 

स्टैंड विथ कश्मीर’, “कश्मीरी प्रवासियों द्वारा चलाया जाने वाला स्वतंत्र वैश्विक नागरिक समूह है, जो कश्मीरी लोगों के समर्थन में खड़े रहने और उनकी पहचान अलग स्वरूप में स्थापित करने के लिए प्रतिबद्ध है।” संगठन का मानना है, “कोई भी प्रस्तावित संकल्प कश्मीरी आकांक्षाओं को ख़त्म कर सकता है। हम इस्लामोफ़ोबिया का इस्तेमाल करके कश्मीरी आवाम की आज़ादी को खतरे में डालने की निंदा करते हैं।” संगठन के मुताबिक़ भारतीय सेना की घाटी में मौजूदगी ‘कब्ज़ा’ है। ऐसे अफ़वाहें भी सामने आई थीं कि ये संगठन पाकिस्तान समर्थित हो सकता है। 

SWK ने हाल ही में रियाज़ नाईकू की एनकाउंटर में हुई मृत्यु पर ट्वीट किया था जबकि ट्वीट में इस बात का ज़िक्र नहीं किया गया था कि वो हिजबुल मुजाहिद्दीन का सीनियर कमांडर था। SWK आसिया अंद्राबी को ‘सामाजिक राजनीति एक्टिविस्ट’ कहता है जबकि आतंकवादियों से उसके संबंध जगजाहिर हैं। इतना ही नहीं आतंकवादियों के समर्थन का इनका इतिहास पुराना है, इसमें यासीन मलिक भी शामिल है जो कि इस्लामी आतंकवादी संगठन लश्कर-ए-तैय्यबा से जुड़ा हुआ था जिस पर अमेरिका ने भी प्रतिबंध लगाया है। 

जो बायडेन द्वारा की गई एक और नियुक्ति पर भारत में काफी सवाल उठ रहे हैं, जो कि चिंता का विषय भी हो सकता है और वो है सीआईए डायरेक्टर। कार्नेजी एंडोमेंट (Carnegie Endowment) के अध्यक्ष विलियम जे बर्न्स को सीआईए का मुखिया चुना गया है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और कश्मीर पर उसके विचारों को एक बार ज़रूर समझा जाना चाहिए।

हाल ही में फरवरी 2020 के दौरान विलियम ने द अटलांटिक के लिए एक लेख लिखा था, “बीते वसंत में एक शानदार चुनावों के बाद नरेन्द्र मोदी को पिछले तीन दशक की सबसे भीषण आर्थिक मंदी का सामना करना पड़ रहा है। अर्थव्यवस्था के लिए एक प्रभावी रणनीति की गैर मौजूदगी में उन्होंने कुछ मुद्दों पर सबसे ज़्यादा ध्यान दिया है। जिस पर भाजपा की दृष्टि हमेशा से स्पष्ट थी: हिन्दू बहुसंख्यकवाद! संवैधानिक सीमाओं को ताक पर रखते हुए पूरी ताकत के साथ, मोदी सरकार अपनी अंधराष्ट्रभक्ति का प्रदर्शन कर रही है।” 

लेख के अगले हिस्से में लिखा था, “मोदी सरकार एक नया नागरिकता क़ानून लेकर आई है जो कि मुस्लिम शरणार्थियों के साथ भेदभाव करता है और विवादित धार्मिक स्थलों को लेकर भी विवाद बढ़ा है। आलोचना करने वाले पत्रकारों और शिक्षाविदों पर भी दबाव बनाया जा रहा है। भाजपा को राज्य और स्थानीय चुनावों में चुनौतियों का सामना करना पड़ा था लेकिन उसका राष्ट्रीय विपक्ष ‘कॉन्ग्रेस’ अपनी पुरानी छवि का आवरण बन कर रह गई है। न्यायालय और सिविल सोसाइटीज़ भी नर्म रवैया बरत रही हैं। भारत की संकल्पना के विचारों की लड़ाई अभी चल रही है जो कि संविधान में पक्का विश्वास रखने वालों और कट्टर हिन्दूवादियों के बीच है।”

2019 नवंबर महीने में भी विलियम ने बयान देते हुए कहा था कि भारत को जम्मू कश्मीर के बारे में वाशिंगटन से संबंधित चिंताओं पर ध्यान देना चाहिए।  

पालघर नागा साधु मॉब लिंचिंग केस में कोर्ट ने गिरफ्तार 89 आरोपितों को दी जमानत: बताई ये वजह

पालघर भीड़ हिंसा (मॉब लिंचिंग) मामले में गिरफ्तार किए गए 89 लोगों को ठाणे की एक अदालत ने शनिवार (जनवरी 16, 2021) को जमानत दे दी। अदालत ने सभी 89 लोगों पर जमानत के लिए 15 हजार रुपए की राशि जमा कराने का निर्देश दिया है। अदालत ने इन्हें इस आधार पर जमानत दी कि ये लोग केवल घटनास्थल पर मौजूद थे। 

गौरतलब है कि 16 अप्रैल 2020 को जूना अखाड़े से जुड़े दो साधु 70 वर्षीय कल्पवृक्ष गिरि महाराज और 35 वर्षीय सुशील गिरि महाराज अपने ड्राइवर 30 वर्षीय नीलेश तेलगेडे के साथ एक अन्य साधु के अंतिम संस्कार में शामिल होने के लिए मुंबई से गुजरात जा रहे थे। इसी बीच पालघर जिले के गढ़चिंचले गाँव के 200 से अधिक लोगों की भीड़ ने इकठ्ठा होकर साधुओं पर हमला किर दिया था। इस दौरान भीड़ ने दोनों साधुओं के साथ उनके एक ड्राइवर की पीट-पीटकर हत्या कर दी थी।

इस मामले की जाँच के लिए एक स्वतंत्र फैक्ट-फाइंडिंग कमिटी का गठन किया गया था। कमिटी ने साधुओं की मॉब लिंचिंग को लेकर चौंकाने वाला दावा करते हुए कहा है कि इसके पीछे गहरी साजिश थी। साथ ही इस घटना के तार नक्सलियों से भी जुड़ रहे हैं। कमिटी ने यह भी पाया है कि वहाँ उपस्थित पुलिसकर्मी अगर चाहते तो इस हत्याकांड को रोक सकते थे लेकिन उन्होंने हिंसा की साजिश में शामिल होने का रास्ता चुना।

फैक्ट-फाइंडिंग पैनल के सदस्य संतोष जनाठे (Santosh Jnathe) ने दावा किया था कि एक एनसीपी नेता को उस भीड़ के बीच देखा गया था, जो पालघर में साधुओं की लिंचिंग की घटना में शामिल थे। फैक्ट फाइंडिंग टीम ने जिस NCP नेता को इस भीड़ हिंसा के बीच पाया है, उसका नाम काशीनाथ चौधरी बताया गया।

काशीनाथ चौधरी शरद पवार की ‘नेशनलिस्ट कॉन्ग्रेस पार्टी’ का जिला सदस्य हैं। उन पर आरोप लगे कि साधुओं की लिंचिंग कर उनकी निर्मम हत्या करने वाली भीड़ में वामपंथी पार्टी सीपीएम के पंचायत सदस्य व उसके साथ विष्णु पातरा, सुभाष भावर और धर्मा भावर भी शामिल थे।

फैक्ट फाइंडिंग समिति पहले भी इस निष्कर्ष पर पहुँच चुकी है कि क्षेत्र में काम करने वाले वामपंथी संगठन आदिवासियों के मन में सरकार और हिंदू धर्म गुरुओं, साधुओं और सन्यासियों के खिलाफ नफरत पैदा कर रहे हैं।

तब अलर्ट हो जाती निधि राजदान तो आज हार्वर्ड पर नहीं पड़ता रोना

आज खुद को ‘फिशिंग अटैक’ की पीड़ित बता रहीं निधि राजदान का पत्रकारिता का पूरा करियर प्रोपेगेंडा के इर्द-गिर्द रचा रहा है। वे उस लिबरल गैंग की प्रमुख सदस्य हैं, जो खुद के विचार से इत्तेफाक नहीं रखने वालों को ‘उपदेश’ देने का कोई मौका नहीं छोड़ते। 2014 के बाद हर मौके पर वह सरकार को कोसती नजर आईं हैं। एनडीटीवी में रहीं निधि कश्मीर पर पाकिस्तानी सुर अलापने के लिए भी विख्यात रही हैं।

यही कारण है कि शुक्रवार (जनवरी 15, 2021) को जब उन्होंने ट्वीट कर अपने साथ हुए गंभीर ऑनलाइन फर्जीवाड़े का खुलासा किया तो सोशल मीडिया में कई लोगों ने उनकी मंशा पर शक जाहिर किया। इस ट्वीट में उन्होंने बताया था कि हार्वर्ड से मिला ऑफर फेक था।

राजदान के अनुसार उन्हें हाल ही में पता चला कि उन्हें हार्वर्ड यूनिवर्सिटी में पत्रकारिता पढ़ाने का जो ऑफर दिया गया था, वह फर्जी है। उन्होंने पिछले साल NDTV में अपने 21 साल के करियर को अलविदा कह दिया था, ताकि वे हार्वर्ड (Harvard University)में जाकर अध्यापन कार्य कर सकें।

निधि ने फरवरी 2018 में भी ऑनलाइन फर्जीवाड़े को लेकर एक ट्वीट किया था। इसमें उन्होंने बताया कि उनका इनकम टैक्स डिटेल हैक कर लिया गया और उनके सारे डिटेल्स को भारत सरकार के पोर्टल पर बदल दिया गया। उनका कहना था कि उनके रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर पर भी इसका कोई अलर्ट का मैसेज नहीं आया। उस समय उन्होंने सरकार से सवाल किया था, “हमें कैसे विश्वास करना चाहिए कि हमारा डेटा सुरक्षित है?”

हार्वर्ड यूनिवर्सिटी मामले के सामने आने के बाद निधि का 2018 का ये पुराना ट्वीट वायरल हो रहा है। लोग इस पर काफी प्रतिक्रिया दे रहे हैं। लोगों का कहना है कि अगर मान भी लिया जाए कि यह सही बोल रही हैं तो ये किस तरह की पत्रकार हैं, जो असली हार्वर्ड और नकली हार्वर्ड के मेल को नहीं पहचान सकी। ऐसे में उनकी पत्रकारिता की क्या विश्वसनीयता है। वो फेक सोर्स पर भी विश्वास कर सकती हैं, जो कि पहले भी दिख चुका है।

एक यूजर ने लिखा कि सामान्य नागरिक ऐसी परिस्थिति में एफआईआर दर्ज करवाते हैं, आईटी विभाग के पास शिकायत दर्ज करवाते हैं लेकिन हार्वर्ड यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर सिर्फ ट्वीट करते हैं और गरीबों को अपना सारा काम बंद करके मैडम के पास जाना पड़ता है।

बता दें कि निधि द्वारा यह खुलासा किए जाने के बाद कि उनके साथ धोखाधड़ी हुई थी, हार्वर्ड ने बताया है कि उसके कैम्पस में न तो पत्रकारिता का कोई विभाग और न ही कोई कॉलेज है। यहाँ तक कि पत्रकारिता के एक भी प्रोफेसर नहीं हैं।

हार्वर्ड यूनिवर्सिटी स्थित नीमन फाउंडेशन के जर्नलिज्म लैब के सीनियर डायरेक्टर और पूर्व डायरेक्टर जोशुआ बेंटन ने ये खुलासा किया है। उन्होंने ये भी बताया कि हार्वर्ड में जर्नलिज्म पर फोकस रख कर सिर्फ मास्टर्स ऑफ लिबरल आर्ट्स नामक डिग्री की पढ़ाई होती है, जिसे कार्यरत पत्रकारों द्वारा ही पढ़ाया जाता है।

‘ICU में भर्ती मेरे पिता को बचा लीजिए, मुंबई पुलिस ने दी घोर प्रताड़ना’: पूर्व BARC सीईओ की बेटी ने PM से लगाई गुहार

जेल में बंद ‘Broadcast Audience Research Council (BARC India)’ के पूर्व सीईओ पार्थो दासगुप्ता की बेटी प्रत्यूषा ने एक पत्र के माध्यम से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से गुहार लगाई है। उन्होंने इस पत्र में अपने पिता की ज़िंदगी बचाने की अपील की है। प्रत्यूषा का कहना है कि उनके पिता शुक्रवार (जनवरी 15, 2021) से ही बेहोशी की अवस्था में एक अस्पताल में भर्ती हैं। वो फ़िलहाल TRP स्कैम में दिसंबर 24, 2020 से जुडिशल कस्टडी में हैं।

प्रत्यूषा ने लिखा कि उनकी माँ को अचानक से एक फोन कॉल कर के बताया गया कि पार्थो दासगुप्ता को जेजे हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया है और वो जल्दी से वहाँ पहुँचें। उन्होंने बताया कि परिजनों के वहाँ पहुँचने पर डॉक्टर पूछने लगे कि पिछले 12 घंटों से पार्थो के अस्पताल में होने के बावजूद आखिर उनके परिवार का कोई व्यक्ति उनकी सुध लेने क्यों नहीं आया? उन्हें तलोजा जेल से अस्पताल में ले जाया गया था।

प्रत्यूषा का कहना है कि जनवरी 15, 2021 को दोपहर 1 बजे उन्हें अस्पताल लेकर जाया गया और अगले दिन 3 बजे दोपहर को परिजनों को इसकी सूचना दी गई, अर्थात 14 घंटे तक इस बात को छिपा कर रखा गया। प्रत्यूषा के अनुसार, उन्हें पुलिसवालों ने बताया कि वो परिजनों को सूचना इसीलिए नहीं दे पाए क्योंकि उनके पास किसी का फोन नंबर नहीं था। पुलिसकर्मियों ने बताया कि पार्थो दासगुप्ता ने होश में आकर नंबर दिया, तब परिजनों को सूचित किया गया।

प्रत्यूषा दासगुप्ता ने बताया कि उन्होंने और उनके परिवार ने अपने पिता से बात करने के लिए तलोजा जेल को कई ईमेल लिखे हैं और उन सबमें उनका फोन नंबर भी दिया हुआ है, इन सबके बावजूद पुलिसकर्मियों ने ये बहाना बनाया। उन्होंने बताया कि जब वो अस्पताल पहुँचीं तो उनके पिता इमरजेंसी रूम में पड़े हुए थे और उन्हें ओढ़ाने के लिए एक बेडसीट तक नहीं था। अस्पताल लाए जाने के 16 घंटे बाद शाम के 5 बजे उन्हें ICU में भर्ती कराया गया।

‘BARC India’ के पूर्व सीईओ की बेटी ने कहा कि उनके पिता अब भी ICU में हैं और परिजनों का उनसे कोई संपर्क नहीं हो पा रहा है। जब परिजन अस्पताल पहुँचे तो वो आधी बेहोशी की ही अवस्था में थे। प्रत्यूषा ने सोशल मीडिया के माध्यम से शेयर किए गए पत्र में लिखा है कि उनके पिता कुछ कहना चाहते थे और बातें करना चाहते थे, लेकिन वो कुछ बोल नहीं पा रहे थे। पत्र में प्रत्यूषा ने आगे लिखा है:

“उनका शुगर लेवल भी काफी उच्च स्तर (516) पर पहुँच गया था। डायबिटीज, हाइपरटेंशन और एंकिलॉजिंग स्पॉन्डिलाइटिस नामक एक ऑटो इम्यून डिसऑर्डर जैसी बीमारियों से वो कई सालों से पीड़ित हैं। उनके स्वास्थ्य को लेकर हम पहले से चिंतित थे और इसीलिए पिछले 2 सप्ताह से जेल प्रशासन के माध्यम से उनसे संपर्क करने के प्रयास में लगे हुए थे। उनकी स्थिति देख कर लगता है कि उनके साथ ठीक व्यवहार नहीं किया गया। उन्हें जेल में शारीरिक और मानसिक प्रताड़ना दी गई है। वो काफी डरे हुए थे।”

प्रत्यूषा दासगुप्ता ने लिखा है कि वो अपने पिता के जीवन को लेकर खासी चिंतित हैं। उन्होंने लिखा कि उनका परिवार कानून का पालन करने वाले नागरिकों का है और कानूनसम्मत कार्यवाही के पक्ष में है, लेकिन जो हो रहा है वो चिंताजनक है। अपने पिता के लिए उचित इलाज की माँग करते हुए प्रत्यूषा ने कहा कि अदालती प्रक्रिया के तहत फैसला होना चाहिए। उन्होंने आशंका जताई कि बिना उच्च-स्तरीय हस्तक्षेप के ये चिंता और डर बना रहेगा।

याद हो कि मुंबई पुलिस ने आरोप लगाया था कि BARC के पूर्व सीईओ पार्थो दासगुप्ता के कार्यकाल के दौरान TRP का फर्जीवाड़ा किया गया और अन्य इंग्लिश टीवी समाचार चैनलों की रेटिंग जानबूझकर नीचे गिरा कर रिपब्लिक टीवी को नंबर 1 बनाया गया। पुलिस का कहना है कि BARC ने टाइम्स नाउ की रेटिंग को नीचे लाने के लिए व्यूअरशिप और टीआरपी डेटा में हेरफेर किया, जो कि पहले एक नंबर वन अंग्रेजी न्यूज चैनल था, जब अर्णब गोस्वामी इसे हेड कर रहे थे।

घोटालेबाज, खालिस्तान समर्थक, चीनी कंपनियों का पैरोकार: नवदीप बैंस के चेहरे कई

इस हफ्ते की शुरुआत में भारतीय मूल के हाई-प्रोफाइल कनाडाई सिख मंत्री नवदीप बैंस (Navdeep Bains) ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया। ‘व्यक्तिगत कारणों’ का हवाला देते हुए उन्होंने राजनीति भी छोड़ दी है।

रिपोर्टों के अनुसार नवदीप बैंस जो कि खालिस्तान आंदोलन के एक प्रबल समर्थक माने जाते हैं ने नवाचार, विज्ञान एवं उद्योग मंत्री के पद से इसलिए इस्तीफा दिया, क्योंकि वह अपने परिवार के साथ अधिक समय बिताना चाहते थे।

हालाँकि नवदीप बैंस ने 2013 के बाद से जस्टिन ट्रूडो के पहले कार्यकाल में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। लेकिन कनाडा में बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार उजागर होने के बाद कैबिनेट से इस्तीफा देने के लिए उन्हें मजबूर किया गया था। बैंस के इस्तीफे को सत्तारूढ़ लिबरल पार्टी को भ्रष्टाचार के आरोपों से लगातार हो रही शर्मिंदगी से बचाने के प्रयास के रूप में देखा जा रहा है।

नवंबर 2018 में, कनाडा स्थित एक मीडिया आउटलेट ने नवदीप बैंस से जुड़े भ्रष्टाचार को उजागर किया था। रिपोर्ट के अनुसार, नवदीप बैंस और एक अन्य लिबरल सांसद राज ग्रेवाल के बीच 20 एकड़ की जमीन के संबंध में अनियमितता हुई थी। घोटाले में सांसदों के शामिल होने के खुलासे से सभी चौंक गए थे। इसके बाद, स्थानीय अधिकारियों ने मामले की तृतीय-पक्ष जाँच का आदेश दिया था और इसकी जानकारी रॉयल कैनेडियन माउंटेड पुलिस (RCMP) को भेजी थी।

भूमि सौदे में भ्रष्टाचार का मामला अपने आप में दिलचस्प है, जो बताया गया है कि कैसे दो लिबरल सांसद भ्रष्टाचार के कार्य में लिप्त हो गए। खालिस्तान समर्थक नवदीप बैंस और एक अन्य लिबरल सांसद ने ओंटारियो प्रांत से उस भूमि को खरीदा था और फिर ब्रैमटन शहर को काफी अधिक कीमत पर बेच दिया।

जिस शहर को 3.3 मिलियन डॉलर की राशि में खरीदने की योजना थी, बैंस ने उसे सरकारी खजाने के हिसाब से $ 4.4 मिलियन यानी अतिरिक्त $ 1.1 मिलियन में बेच दिया। दिलचस्प बात यह है कि भूमि सौदे में शामिल कंपनी गोरवे हेवेन और उसके एक निदेशक भगवान ग्रेवाल थे, जो 2018 में प्रधानमंत्री ट्रूडो की भारत यात्रा के दौरान उनके साथ थे। इसके अलावा, इसके लगभग आधे निदेशक लिबरल पार्टी को भरपूर दान देने वाले हैं।

खालिस्तान समर्थक और विश्व सिख संगठन के सदस्य नवदीप बैंस

कथित तौर पर, नवदीप बैंस को कनाडा सरकार के भीतर खालिस्तानी हमदर्दों में से एक माना जाता है। खालिस्तानी कट्टरपंथी संगठन वर्ल्ड सिख ऑर्गनाइजेशन (WSO) द्वारा बैंस को आगे बढ़ाया गया है, जिस पर सिख समुदाय को कट्टरपंथी बनाने और उसे विभाजित करने के प्रयासों का आरोप है।

ऑपरेशन ब्लूस्टार के बाद जुलाई 1984 में गठित कनाडा स्थित विश्व सिख संगठन (डब्ल्यूएसओ) खुलकर खालिस्तान की माँग उठाती रही है। वास्तव में, कनाडा के सिख प्रवासी ने खुद को WSO के चरमपंथी संगठन के रूप में चिह्नित किया है।

केवल कनाडा में ही नहीं, बल्कि पूरे उत्तरी अमेरिका और यूरोप में, WSO से संबंधित कट्टरपंथी सिख तत्वों ने अपने-अपने देशों में अपनी विचारधारा के लिए राजनीतिक समर्थन आधार बनाने के लिए राजनीतिक माहौल का इस्तेमाल किया है। खालिस्तान समर्थक एक अन्य आतंकी गुट सिख फॉर जस्टिस (एसएफजे) के साथ-साथ विश्व सिख संगठन और सिख फॉर जस्टिस खालिस्तान आंदोलन को वित्त पोषित करते रहे हैं और खालिस्तान को पुनर्जीवित करने के लिए सोशल मीडिया पर प्रचार भी करते हैं।

नवदीप बैंस के पिता भी डब्ल्यूएसओ के एक प्रमुख नेता हैं और डिक्सी गुरुद्वारा से भी जुड़े हुए हैं- जो भारत विरोधी गतिविधियों का केंद्र है। बैंस का खालिस्तान आतंकवादियों से भी सीधा संबंध है, क्योंकि 1985 के एयर इंडिया बम विस्फोट मामले की जाँच के लिए उनके ससुर दर्शन सिंह सैनी को कनाडा के अधिकारियों ने गवाह के रूप में सूचीबद्ध किया था।

वास्तव में, फरवरी 2007 में हाउस ऑफ कॉमन्स में आतंकवाद विरोधी कानून पर एक बहस के दौरान, तत्कालीन कनाडाई पीएम स्टीफन हार्पर ने एयर इंडिया के बम के साथ बैंस के ससुर के संबंध पर प्रकाश डाला, जिसमें 329 लोग मारे गए थे। इसमें ब्रिटिश, कनाडा और भारत के नागरिक शामिल थे।

तत्कालीन पीएम हार्पर ने कहा था कि बैंस द्वारा आतंकवाद विरोधी कानून का विरोध आरसीएमपी के समक्ष अपने ससुर को पेश करने से रोकने के लिए एक रणनीति थी, क्योंकि कंजरवेटिव्स ने एयर इंडिया मामले की जाँच के लिए कानून का इस्तेमाल करने का समर्थन किया था। इससे पहले, वैंकूवर सन ने बताया था कि बैंस के ससुर बम विस्फोट मामले में संभावित गवाहों की सूची में थे।

बैंस को पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने भी निशाना बनाया था। कनाडा के रक्षा मंत्री हरजीत सिंह सज्जन और पूर्व सिख सांसद राज ग्रेवाल के अलावा, पंजाब के सीएम ने भी नवदीप बैंस को 2018 में खालिस्तानी हमदर्द के रूप में संदर्भित किया था।

भारत से अवैध इमीग्रेशन में शामिल है बैंस 

खालिस्तानी आतंकी नेटवर्क को प्रायोजित करने के अलावा, बैंस कई अन्य कथित भ्रष्ट सौदों में शामिल है। नवदीप बैंस का नाम पिछले साल कुख्यात फोर्ट एरी गुरुद्वारा घोटाले में भी सामने आया था। गुरुद्वारे ने भारत के तीन धार्मिक प्रचारकों को स्पॉन्सर किया और उन्हें ओटावा प्रशासन से विशेष वीजा दिलवाया।

बाद में यह पता चला कि गुरुद्वारा सक्रिय नहीं था और भारत से कनाडा में अवैध रूप से प्रवासियों में घुसने के लिए बैंस और उनके सहयोगियों द्वारा कवर के रूप में इस्तेमाल किया गया था। तब से, कनाडाई अधिकारियों को नवदीप बैंस द्वारा स्पॉन्सर किए गए तीन भारतीय पुजारियों के बारे में कुछ भी पता नहीं चल पाया है, क्योंकि वे कनाडा में उतरने के बाद गायब हो गए।

स्थानीय लोगों के अनुसार, बैंस ने धार्मिक गतिविधियों की आड़ में अवैध रूप से प्रवासियों को लाने के लिए कागजों पर एक गुरुद्वारे का जाली विवरण दर्ज करवाया था, इसके बदले में उनने भारी मुनाफा कमाया। गुरुद्वारे को बैंस ने अपने पिता बलविंदर बैंस के माध्यम से नियंत्रित किया और अब वह परिवार के लिए एक पैसा बनाने वाली मशीन है। 

लिबरल नेता अपने लाभ के लिए सिख समुदाय के अन्य संस्थागत ढाँचे का भी उपयोग करते रहे हैं। गुरुद्वारे के प्रशासन पर अपनी मजबूत पकड़ रखने वाले बैंस के पिता ने फोर्ट एरी गुरुद्वारे के निदेशकों के रूप में उनके करीबियों को नियुक्त किया था। यह गुरुद्वारा बैंस के प्रतिनिधित्व वाले निर्वाचन क्षेत्र में आता है।

सबसे महत्वपूर्ण बात, बैंस परिवार कथित रूप से कनाडा में सिख संस्थानों में भ्रष्टाचार के माध्यम से बड़े पैमाने पर पैसे कमा रहा है। आरोप है कि बैंस ने पैसे कमाने के लिए गुरुद्वारे को भी नहीं बख्शा। स्थानीय लोगों का कहना है कि बैंस और उनके पिता भारत में आईईएलटीएस कोचिंग सेंटर और कनाडा में गुरुद्वारों से संबंधित एक इमीग्रेशन नेक्सस चलाते हैं। पिता-पुत्र की जोड़ी इन संस्थानों में छात्रों को सीट की पेशकश करके अवैध इमिग्रेशन की सुविधा प्रदान करती थी, जिनमें से अधिकांश केवल कागज पर मौजूद हैं।

टेलीकॉम लॉबी और चीनी कंपनियों का पक्ष लेने का आरोप

बैंस पर कनाडा के नागरिक समाज समूहों द्वारा मंत्री के रूप में सेवा करते हुए कुछ दूरसंचार समूहों का पक्ष लेने का भी आरोप है। वह इंटरनेट की कीमतों में बढ़ोतरी के लिए दूरसंचार कंपनियों के पक्ष में आरोपों का सामना कर रहे हैं। बैंस पर बड़ी टेलीकॉम कंपनियों के साथ निचली थोक दरों के लिए अपील करने का भी आरोप है।

ट्रूडो की सरकार में मंत्री के रूप में अपने कार्यकाल के दौरान, नवदीप बैंस ने उचित राष्ट्रीय सुरक्षा समीक्षा के बिना, CCP को डार्क ट्रैक रिकॉर्ड और कनेक्शन के साथ कई चीनी कंपनियों को हरी झंडी दी थी। माना जाता है कि चीनी दूरसंचार कंपनी Hytera को उचित राष्ट्रीय सुरक्षा समीक्षा के बिना कनाडा में प्रवेश करने की अनुमति देने से पहले से ही बैंस सपोर्ट कर रहे थे।

इसके अलावा, कनाडाई नेता सार्वजनिक सामानों की खरीद में कथित तौर पर भ्रष्टाचार में भी शामिल रहे हैं। बैंस पर 200 मिलियन डॉलर की सार्वजनिक खरीद अनियमितता का आरोप है। बैंस को एक ऐसी कंपनी को टेंडर प्रदान करने के आरोपों का सामना करना पड़ रहा है, जिसमें निर्माण की सुविधा नहीं थी।

खालिस्तानी समर्थक कनाडा के नेता नवदीप बैंस ने भारत में भी प्रदर्शनकारियों के साथ एकजुटता व्यक्त की थी, जिन्होंने अब मोदी सरकार द्वारा शुरू किए गए कृषि सुधारों का विरोध करने के लिए दिल्ली की सड़कों पर डेरा डाल दिया है। बता दें कि तथाकथित ‘किसान’ प्रदर्शनकारियों को खालिस्तानी तत्वों द्वारा हाइजैक कर लिया गया है, जो प्रदर्शनकारियों को भारत सरकार के खिलाफ लड़ने के लिए उकसाने की कोशिश कर रहे हैं।

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