Sunday, July 25, 2021
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राज कुंद्रा की गिरफ्तारी के बाद भी JL Stream बना रही एडल्ट कंटेंट? ताजा छापेमारी में स्क्रिप्ट बरामद, 3-4 पोर्न एप्स जाँच के दायरे में

पोर्नोग्राफी मामले में फँसे एक्ट्रेस शिल्पा शेट्टी के पति और कारोबारी राज कुंद्रा की मुश्‍किलें बढ़ती जा रही हैं। मुंबई पुलिस ने रविवार (25 जुलाई 2021) को बताया कि वह इस बात की जाँच कर रही है कि पोर्नोग्राफी कंटेंट स्ट्रीम करने वाले तीन-चार दूसरे एप्स से राज कुंद्रा के लिंक है या नहीं। CNN-News18 की रिपोर्ट के मुताबिक, जाँच अधिकारियों ने आशंका जताई है कि कुंद्रा की गिरफ्तारी के बाद भी उनकी कंपनी जेएल स्ट्रीम द्वारा एप में एडल्ड कंटेंट जारी रखने की योजना हो। गौरतलब है कि पोर्न रैकेट मामले में कुंद्रा की कंपनी जेएल स्ट्रीम भी जाँच के घेरे में है।

कुंद्रा को पिछले हफ्ते पोर्न रैकेट मामले में गिरफ्तार किया गया था। उन पर अपनी कंपनी वियान इंडस्ट्रीज के जरिए पोर्नोग्राफी एप ‘हॉटशॉट्स‘ चलाने का आरोप है। एक अधिकारी ने कहा, “Apple और Google Play स्टोर से Hotshots को हटा दिए जाने के बाद हमें विश्वास है कि उन्होंने कुछ अन्य एप सेटअप किए हैं।”

कुंद्रा और उनकी कंपनी के आईटी हेड की गिरफ्तारी के बाद पुलिस ने कुंद्रा की पत्नी और एक्ट्रेस शिल्पा शेट्टी का बयान दर्ज किया। शेट्टी ने पुलिस को बताया कि एप्स में पोर्नोग्राफी नहीं बल्कि इरॉटिका कॉन्टेंट था। वह जिस शब्द इरॉटिका का इस्तेमाल कर रही हैं, उसका मतलब होता है, “कोई भी साहित्यिक या कलात्मक काम जो यौन उत्तेजना से जुड़ा हो, लेकिन अश्लील कैटेगरी में न आए।”

जाँच अधिकारियों ने CNN-News18 को बताया कि कुंद्रा की अलमारी में से पाए गए दस्तावेजों में हिंदी में लिखी एक ताजा स्क्रिप्ट भी है। ये स्क्रिप्ट रोमन लिपि और देवनागरी दोनों में है। अधिकारियों को संदेह है कि कुंद्रा की गैर मौजूदगी में भी शूटिंग जारी रखने की योजना थी। हालाँकि, शूटिंग इरॉटिका के लिए थी या पोर्न के लिए, अभी तक इसका खुलासा नहीं हुआ है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, चार महीने पहले शिल्पा शेट्टी को अपने पति की कंपनी जेएल स्ट्रीम का प्रचार करते हुए देखा गया था, जो अब पोर्न रैकेट मामले में मुंबई पुलिस की जाँच के दायरे में हैं। जेएल स्ट्रीम भी वही कंपनी है, जहाँ शिल्पा की माँ सुनंदा सुरेंद्र शेट्टी कथित तौर पर सितंबर 2020 तक डायरेक्टर थीं।

शनिवार (24 जुलाई) को मुंबई पुलिस क्राइम ब्रांच को वियान इंडस्ट्रीज के एक कर्मचारी ने राज कुंद्रा के ऑफिस की दीवार में छिपाई गई एक अलमारी के बारे में बताया, जिसके बाद पोर्नोग्राफी मामले में नए सिरे से छापेमारी की गई। तलाशी लेने पर पुलिस ने उस अलमारी से कुछ कागजात और कुछ बक्से बरामद किए हैं।

क्राइम ब्रांच के एक सूत्र के अनुसार, बरामद किए बक्से में वित्तीय लेन-देन से संबंधित और मुख्य रूप से क्रिप्टोकरेंसी से संबंधित फाइलें हैं। उन्होंने कहा कि अलमारी को एक दीवार में बनाया गया था, जिसे अच्छी तरह से छुपाया गया था। सूत्र ने कहा, ”कुंद्रा ने पहले इस अलमारी के बारे में खुलासा नहीं किया था।”

बता दें कि कुंद्रा की ही कंपनी के 4 कर्मचारी उनके खिलाफ गवाह बनने के लिए आगे आए हैं। ये चारों इस मामले में महत्वपूर्ण गवाह साबित होंगे। राज कुंद्रा को 19 जुलाई, 2021 को गिरफ्तार किया गया था। मुंबई पुलिस की क्राइम ब्रांच का कहना है कि राज कुंद्रा व उनके साथी जाँच व पूछताछ में सहयोग नहीं कर रहे हैं।

‘अपनी ही कब्र खोद ली’: टाइम्स ऑफ इंडिया ने टोक्यो ओलंपिक में भारतीय तीरंदाजी टीम की हार का उड़ाया मजाक

टोक्यो ओलंपिक के तीरंदाजी (आर्चरी) के मिक्स्ड इवेंट में दीपिका कुमारी और प्रवीण जाधव की जोड़ी क्वार्टर फाइनल तक पहुँच कर हार गई। उनकी हार ने करोड़ों भारतीयों को निराश कर दिया लेकिन देश के अग्रणी समाचार पत्र टाइम्स ऑफ इंडिया ने खिलाड़ियों का हौसला बढ़ाने के स्थान पर उनका मजाक उड़ाया।

रविवार (25 जुलाई 2021) को टाइम्स ऑफ इंडिया ने एक लेख प्रकाशित किया जिसका शीर्षक था, “Tokyo Olympics : India’s archers dig their own grave, again (टोक्यो ओलंपिक : भारतीय तीरंदाजों ने एक बार फिर अपनी ही कब्र खोद ली)”। लेख को आर्चिमन भादुड़ी ने लिखा है जिनके अनुसार किसी खेल में हारना अपनी कब्र खोदने के जैसा है। जहाँ एक ओर लेख का शीर्षक खिलाड़ियों का अपमान करने जैसा था वहीं लेख का रवैया खिलाड़ियों के प्रति मिला-जुला था।

टाइम्स ऑफ इंडिया के लेख का स्क्रीनशॉट

दक्षिण कोरिया के किम जे ड्योक और आन सन से हारने के बाद टाइम्स ऑफ इंडिया ने दावा किया कि भारतीय खिलाड़ी औसत से भी कम थे और उन्होंने विरोधियों को थाली में सजाकर जीत सौंप दी। लेख में कहा गया कि हालाँकि दोनों ही तरफ के खिलाड़ी कमजोर थे लेकिन तीरंदाजी का पावरहाउस माने जाने वाले दक्षिण कोरिया के खिलाड़ियों द्वारा 35 का स्कोर किया जाना यह बताता है कि भारत ने उन्हें जीत का तोहफा खुद ही दे दिया।

तीरंदाजी के कथित एक्सपर्ट आर्चिमन भादुड़ी ने लिखा कि दीपिका कुमारी और प्रवीण जाधव में कोई सामंजस्य नहीं था। लेख में बताया गया कि पहले खेल में भी दीपिका और प्रवीण सहज नहीं नजर आ रहे थे, भले ही उन्होंने 1-3 से पिछड़ने के बाद वापसी की और चीनी जोड़ी को हरा दिया। लेख में लिखा गया कि प्रवीण ने अपने गलत शॉट्स के कारण ओलंपिक में भारत के अभियान को समाप्त कर दिया।

आलोचना किसी भी खिलाड़ी के जीवन का हिस्सा है और उसके बेहतर बेहतर प्रदर्शन के लिए जरूरी है लेकिन उस खिलाड़ी की उपलब्धियों को कमजोर बताना मात्र उसके विश्वास को ठेस ही पहुँचाता है। दीपिका और प्रवीण, दोनों ही एक साधारण से परिवेश से उठकर आज खेलों के सबसे बड़े इवेंट में भारत का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं। दीपिका खुद विश्व की नंबर 1 तीरंदाज हैं, ऐसे में टाइम्स ऑफ इंडिया के लेख का शीर्षक और गैर-तार्किक आलोचना सिर्फ दोनों खिलाड़ियों के प्रयासों को धूमिल ही करती है।

‘BJP नेताओं को स्वतंत्रता दिवस पर तिरंगा नहीं फहराने देंगे’: किसान यूनियनों ने दी नई धमकी, पूरे हरियाणा में विरोध प्रदर्शन की चेतावनी

दिल्ली सीमा पर आंदोलन कर रहे किसान संघों ने अब नई धमकी दी है। किसान संघों ने ताजा चेतावनी जारी करते हुए कहा कि वे स्वतंत्रता दिवस पर भाजपा नेताओं और मंत्रियों को राष्ट्रीय ध्वज नहीं फहराने देंगे। उन्होंने यह भी कहा कि पूरे हरियाणा में बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन किया जाएगा।

अन्य किसान संघ 15 अगस्त की रणनीति तैयार करने के लिए बैठक करने की योजना बना रहे हैं। टाइम्स नाउ से बात करते हुए, एक किसान नेता ने कहा कि वे राज्य में ट्रैक्टर परेड निकालेंगे और भाजपा नेताओं को काले झंडे दिखाएँगे। जींद के एक किसान ने बीजेपी पर हमला बोलते हुए कहा, “ये झंडे के लायक नहीं है।”

शनिवार (जुलाई 24, 2021) को भारतीय किसान यूनियन के नेता राकेश टिकैत ने धमकी देते हुए कहा था, “किसान संसद से किसानों ने गूँगी-बहरी सरकार को जगाने का काम किया है। किसान संसद चलाना भी जानता है और अनदेखी करने वालों को गाँव में सबक सिखाना भी जानता है। भुलावे में कोई न रहे।”

पिछले दिनों भारतीय किसान यूनियन के नेता राकेश टिकैत ने अब समानांतर संसद चलाने की धमकी दी थी। टिकैत ने यह धमकी आम आदमी पार्टी (AAP) सरकार द्वारा ‘किसानों’ को केंद्र सरकार के तीन कृषि कानूनों के खिलाफ दिल्ली के जंतर मंतर पर प्रदर्शन करने की अनुमति देने के बाद दी। वहीं, प्रदर्शन स्थल पर तथाकथित किसानों ने विरोध प्रदर्शन कवर करने गए मीडियाकर्मी पर लाठियों से हमला किया।

राजनीति में अपनी उपस्थिति दर्ज कराने के लिए लगभग एक साल से विरोध प्रदर्शन कर रहे टिकैत ने कहा, “किसान अपनी संसद चलाएँगे। सदन में किसानों के लिए आवाज नहीं उठाने पर संसद सदस्यों (सांसदों) की उनके निर्वाचन क्षेत्रों में आलोचना की जाएगी।”

इससे पहले टिकैत ने सरकार को धमकाया कि अगर इस बार कानून रद्द नहीं किया गया तो किसानों के ट्रैक्टर लाल किले के अलावा संसद का भी रास्ता जानते हैं। इसके अलावा पंजाब के पटियाला में किसानों ने भारतीय जनता पार्टी के नेताओं पर हमला कर दिया था। भाजपा नेताओं ने पुलिस के इशारे पर किसानों के द्वारा मारपीट करने का आरोप लगाया।

गौरतलब है कि 26 जनवरी को किसानों के विरोध के दौरान कई लोग पुलिस से भिड़ गए थे, जबकि कई लोग लाल किले में घुस गए थे और वहाँ धार्मिक झंडा भी फहराया था। प्रदर्शनकारी प्रस्तावित ट्रैक्टर रैली के लिए निर्धारित मार्ग से भटक गए और पुलिस पर हमला कर दिया। कई प्रदर्शनकारियों को लाठियों, तलवारों से पुलिसकर्मियों का पीछा करते देखा गया और कई ने अपने ट्रैक्टरों से बसों में टक्कर मार दी।

भारत में अवैध रूप से घुसे 15 रोहिंग्या असम में दबोचे गए, UP के अलीगढ़ में रह रहे थे सभी

रेलवे प्रोटेक्शन फोर्स (RPF) ने शनिवार (24 जुलाई 2021) को असम के करीमगंज जिले के बदरपुर रेलवे स्टेशन से 15 अवैध रोहिंग्या घुसपैठिये को हिरासत में ले लिया, जिनमें 6 नाबालिग और 3 महिलाएँ शामिल हैं। ये लोग त्रिपुरा की राजधानी अगरतला जाने के लिए स्टेशन पर ट्रेन का इंतजार कर रहे थे। इस दौरान इनकी संदिग्ध गतिविधियों को देखकर आरपीएफ ने हिरासत में ले लिया।

पूछताछ के दौरान पता चला कि उनके पास कोई वैध दस्तावेज नहीं है और ये अवैध रूप में भारत में दाखिल हुए थे। उन्होंने आरपीएफ को यह भी बताया कि ये लोग उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ में रह रहे थे और वहाँ से कुछ दिन पहले ही सिलीगुड़ी पहुँचे थे। उसके बाद पैसेंजर ट्रेन द्वारा सिलीगुड़ी से बदरपुर रेलवे स्टेशन पहुँचे थे। यहाँ से ये लोग अगरतला जाने के लिए ट्रेन का इंतजार कर रहे थे।

आरपीएफ का कहना है, “15 रोहिंग्या मुसलमानों में 6 नाबालिग और 9 वयस्क हैं, जिनमें 3 महिलाएँ भी शामिल हैं। ये अगरतला जाने वाले थे और सिलचर-अगरतला ट्रेन में चढ़ने के लिए प्लेटफॉर्म पर बैठकर उसका इंतजार कर रहे थे।”

पूछताछ में उन्होंने बताया कि वे म्यांमार के रखाईन प्रांत के मांडू के रहने वाले हैं और रोहिंग्या समुदाय से ताल्लुक रखते हैं। आरपीएफ ने आगे की जाँच के लिए इन्हें जीआरपी के हवाले कर दिया है। अधिकारियों ने बताया कि ये लोग त्रिपुरा के रास्ते बांग्लादेश जाने की कोशिश कर रहे थे।

इनके पास से तीन पहचान पत्र भी बरामद हुआ है, जो संयुक्त राष्ट्र द्वारा शरणार्थियों को जारी किया जाने वाला पहचान पत्र बताया जा रहा है। इसके साथ ही इनके पास से 9 मोबाइल फोन और 50,000 रुपये नकद बरामद किये गए हैं।

हिरासत में लिए गए लोगों में कौसर (19), मोहम्मद अयूब (28), मोहम्मद सैयद (30), सुबेरा (18), मोहम्मद अनीस (14), मोहम्मद इस्माईल (16), मोहम्मद रफीक (19), सुना मेहर (28), जैनब बेगम (30), राफिया (7), मुस्लिम (5), दिलारा (9), नूर अजीदा (7), मोहम्मद इस्लाम (6) और नूर फातिमा (3) शामिल हैं।

‘सचिन पायलट को CM बनाओ’: कॉन्ग्रेस के बड़े नेताओं के सामने जम कर हंगामा, मंत्रिमंडल विस्तार से पहले बुलाई थी बैठक

राजस्थान कॉन्ग्रेस में कलह शांत करने के लिए कैबिनेट विस्तार की योजना बनाई गई, लेकिन अब वो भी सफल होती नहीं दिख रही है। मंत्रिमंडल में फेरबदल से पहले ही मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और पूर्व मुख्यमंत्री सचिन पायलट के समर्थकों के बीच बहस और हंगामेबाजी हुई। ये सब राजस्थान के में पार्टी के अध्यक्ष और शिक्षा मंत्री गोविंद सिंह डोटासरा द्वारा बुलाई गई एक बैठक में हुआ है। बैठक के शुरू होते पायलट समर्थक समूह उग्र हो गया।

रविवार (25 जुलाई, 2021) को ये आपात बैठक बुलाई गई थी। कॉन्ग्रेस के कई कार्यकर्ताओं ने उस बैठक में पूर्व प्रदेश अध्यक्ष सचिन पायलट को अशोक गहलोत की जगह नया मुख्यमंत्री बनाने के लिए हंगामा शुरू कर दिया। पार्टी के संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल और राजस्‍थान प्रभारी अजय माकन की मौजूदगी में ये सर हंगामा हुआ। हालाँकि, बैठक में पहुँचे पायलट इतना कुछ होने के बावजूद खुद शांत ही रहे और कोई प्रतिक्रिया नहीं दी।

कॉन्ग्रेस को लगता है कि पंजाब में नवजोत सिंह सिद्धू को प्रदेश अध्यक्ष बनाए जाने के साथ ही उसने वहाँ का कलह समाप्त कर दिया है। इसीलिए, पार्टी हाईकमान अब राजस्थान पर ध्यान दे रहा है। पार्टी के दोनों राष्ट्रीय नेता मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के साथ चर्चा के बाद दिल्ली रवाना हो गए हैं। दोपहर 12 बजे वो वहाँ से निकले। अंदाज लगाया जा रहा है कि आबकी कैबिनेट विस्तार में गहलोत खेमे के कई मंत्रियों का पत्ता कटेगा।

वहीं सचिन पायलट खेमे के कुछ विधायकों को मंत्री बनाया जाएगा। खबर ये भी है कि अब अशोक गहलोत के हाथ में कुछ नहीं रहा और सोनिया गाँधी खुद सारे नामों पर मुहर लगाएँगी। यानि, अब आलाकमान ही सब कुछ करेगा। गहलोत सरकार में नियमानुसार 9 और मंत्री बनाए जा सकते हैं। जिला और ब्लॉक स्तर की कॉन्ग्रेस की टीमों का भी गठन होना है, ऐसे में जुलाई के अंत में अजय माकन फिर राजस्थान आएँगे।

अब राजस्थान से प्रस्तावित नामों की सूची लेकर दिल्ली लौटे माकन और राव की सोनिया गाँधी से मुलाकात हो सकती है। सोनिया गाँधी की ही झंडी के बाद मंत्रिमंडल विस्तार के लिए तारीखों का ऐलान भी होगा। लेकिन, सचिन पायलट के समर्थकों द्वारा ने बखेड़ा खड़ा किए जाने से पार्टी में फिर से चिंता की लहर दौड़ गई है। इसी सप्ताह कभी मंत्रिमंडल विस्तार का ऐलान हो सकता है। इसके बाद दोनों खेमा अगली रणनीति तय करेगा।

न्यूड शूट के लिए उमेश कामत ने हर दिन ऑफर किए थे ₹25000: राज कुंद्रा मामले में एक और मॉडल ने खोली पोल

राज कुंद्रा मामले में रोजाना नए खुलासे हो रहे हैं। ऐसी कई स्ट्रगलिंग एक्ट्रेस की कहानियाँ अब सामने आ रही हैं, जो पोर्नोग्राफी का शिकार हुई हैं। हाल ही में एक और एक्ट्रेस ने अपना दर्द बयाँ किया है और बताया है कि कैसे उसे पॉर्न बिजनेस में लाने के लिए लालच दिया गया। 

पॉर्न बिजनेस में आने का दिया लालच

स्ट्रगलिंग एक्ट्रेस निकिता फ्लोरा सिंह ने राज कुंद्रा के पीए उमेश कामत पर पॉर्न बिजनेस में लाने के लिए लालच देने का आरोप लगाया है। उन्होंने इस बात की जानकारी अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर दी।

‘एक लड़की का हुआ तलाक’

निकिता फ्लोरा सिंह ने अपने ट्विटर हैंडल पर लिखा, “मुझे उमेश कामत ने पिछले साल नवंबर में राज कुंद्रा के ऐप हॉटशॉट के लिए न्यूड शूट करने के लिए कहा था लेकिन मैंने मना कर दिया। उमेश कामत ने मुझे रोजाना 25 हजार रुपए देने की पेशकश की लेकिन मैंने न्यूड होकर शूट करने से इनकार कर दिया। हैरानी की बात कि अब दोनों गिरफ्तार हो गए हैं। भगवान का शुक्र है कि मैं राज कुंद्रा जैसे बड़े नाम के झाँसे में नही आईं, जिसने कई मासूम लड़कियों को वल्गर एक्ट का लालच दिया। झारखंड की एक लड़की का अपने पति से तलाक हो गया क्योंकि उसने उनके लिए शूटिंग की थी।”

उल्लेखनीय है कि पॉर्न फ़िल्में बना कर ऐप के माध्यम से बेच कर कमाई करने के आरोपों में फँसे अभिनेत्री शिल्पा शेट्टी के पति राज कुंद्रा की मुश्किलें बढ़ती ही जा रही हैं। अब उनकी ही कंपनी के 4 कर्मचारी उनके खिलाफ गवाह बनने के लिए आगे आए हैं। ये चारों इस मामले में महत्वपूर्ण गवाह साबित होंगे। राज कुंद्रा को 19 जुलाई, 2021 को गिरफ्तार किया गया था। मुंबई पुलिस की क्राइम ब्रांच का कहना है कि राज कुंद्रा व उनके साथी जाँच व पूछताछ में सहयोग नहीं कर रहे हैं।

शिल्पा शेट्टी से भी हुई पूछताछ

बताते चलें कि पोर्नोग्राफी मामले में राज कुंद्रा के फँसने के बाद शुक्रवार (जुलाई 23, 2021) को मुंबई पुलिस की क्राइम ब्रांच की टीम ने कुंद्रा और शिल्पा शेट्टी के बंगले पर भी छापेमारी की थी। साथ ही क्राइम ब्रांच ने पोर्नोग्राफी मामले में शिल्पा शेट्टी का स्टेटमेंट भी दर्ज किया था।

सोमवार को होगी सुनवाई

राज कुंद्रा की जमानत याचिका पर बॉम्बे हाई कोर्ट सोमवार (जुलाई 26, 2021) को सुनवाई करेगा। राज कुंद्रा को पॉर्न और अश्लील फिल्में बनाने और उन्हें ऐप पर गैरकानूनी तरीके से स्ट्रीम किए जाने का आरोप है। हालाँकि राज कुंद्रा ने खुद पर लगे आरोपों से साफ इनकार किया है और कहा है कि उनकी गिरफ्तारी गैर-कानूनी है। पुलिस ने अश्लील और पॉर्न फिल्में बनाने का मामला फरवरी 2021 में दर्ज किया था। इसके बाद मामले की जाँच में पॉर्न फिल्में बनाने वाले रैकेट के तार राज कुंद्रा और उनकी कंपनी वियान इंडस्ट्रीज से जुड़े पाए गए। गौरतलब है कि एक्ट्रेस पूनम पांडे, शर्लिन चोपड़ा और सागरिका शोना सुमन पहले ही राज पर कई आरोप लगा चुकी हैं।

उन्नाव में शैक्षणिक संस्थान को अवैध मस्जिद में बदलने की कोशिश, ग्रामीणों की शिकायत पर यूपी पुलिस ने रोका निर्माण कार्य

उत्तर प्रदेश के उन्नाव जिले में मुस्लिम समुदाय के लोगों ने गाँव में अवैध तरीके से मस्जिद बनाने की कोशिश की है। इस संबंध में हिन्दू समुदाय के लोगों ने इसका विरोध किया है। 22 जुलाई को बेहटामुजावर थाना क्षेत्र के गाँव मिट्ठूखेड़ा, सिकंदरपुरा, तहसील सफीपुर के निवासियों ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को शिकायती पत्र भेजकर कार्रवाई करने की माँग की।

रिपोर्ट्स के अनुसार, मुस्लिम समुदाय के लोग गाँव में कई वर्षों से मौजूद शैक्षणिक संस्थान को एक अवैध मजहबी स्थान मस्जिद में बदलने की कोशिश कर रहे हैं। इसके बाद हिंदू समुदाय के करीब डेढ़ दर्जन लोगों ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को शिकायती पत्र भेजकर कार्रवाई की माँग की है। गाँव में तनाव की स्थिति को देखते हुए पुलिस को इसकी सूचना दी गई, जिसके बाद एक टीम वहाँ पहुँची और दोनों पक्षों में समझौता कराया। बताया जा रहा है कि पुलिस ने गाँव के 42 लोगों के खिलाफ शांति भंग करने से संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज किया है।

बेहटामुजावर थाना क्षेत्र के गाँव मिट्ठूखेड़ा निवासी मुन्नीलाल, प्रेमशंकर, सुनील कुमार, रमेश सिंह, लवकुश व रामनरेश आदि ग्रामीणों ने मुख्यमंत्री को शिकायती पत्र भेजा है। शिकायत में कहा गया है कि गाँव में 6 मुस्लिम और 35 हिंदू परिवार हैं। मुस्लिम परिवार गाँव में एक ऐसे स्थान पर जहाँ एक शैक्षणिक संस्थान पहले से मौजूद है, वहाँ पर एक अवैध मस्जिद बनाने के लिए बाहर से धन जुटा रहे हैं। शिकायतकर्ता ने दावा किया कि असामाजिक तत्व निर्माणाधीन मस्जिद में आते रहते हैं, जिससे ग्रामीणों को परेशानी हो रही है। बताया जा रहा है कि बीते 21 जुलाई को मुस्लिम समुदाय के लोगों ने शिक्षण संस्थान को मस्जिद में तब्दील करने के प्रयास में लाउडस्पीकर और माइक लगाने की भी कोशिश की, लेकिन ग्रामीणों द्वारा विरोध करने के बाद इस योजना फिलहाल टाल दिया गया।

उस शिकायत को उन्नाव के आशीष सिंह ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्विटर पर साझा किया है। उनके ट्वीट के जवाब में, उन्नाव पुलिस ने जवाब दिया कि पुलिस द्वारा निर्माण कार्य रोक दिया गया है और 16 लोगों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की गई है।

दैनिक जागरण ने बेहटा मुजावर के थाना प्रभारी इंद्रपाल सिंह के हवाले से बताया दोनों पक्षों के बीच एसडीएम के सामने समझौता करा दिया गया है। निर्माण कार्य पर रोक लगा दी गई है। धारा 151 (संज्ञेय अपराधों के रोकने के लिए गिरफ्तारी) के तहत कार्रवाई करते हुए और गाँव में शांति बनाए रखने लिए एक समुदाय के 16 और दूसरे समुदाय के 26 लोगों के खिलाफ कार्रवाई की गई है। ग्रामीणों ने बताया कि कथित धार्मिक स्थल पर पिछले करीब 15 वर्षों से शिक्षण संस्थान चल रहा है।

हिमाचल में भूस्खलन: 1 मिनट 1 सेकंड के वीडियो में मौत का तांडव – 9 की मृत्यु, 3 घायल

महाराष्ट्र में बारिश-बाढ़ के बाद भूस्खलन के कारण 138+ लोगों की जान के बाद अब हिमाचल प्रदेश से बुरी खबर। यहाँ भूस्खलन हुआ किन्नौर (Kinnaur) जिले के बटसेरी (Batseri) गुंसा के पास। इस हादसे में दिल्ली और चंडीगढ़ से हिमाचल घूमने आए 9 पर्यटकों की मौत हो गई जबकि 3 घायल हैं।

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार किन्नौर जिले में बटसेरी के गुंसा के पास छितकुल से सांगला की ओर आ रही पर्यटकों की गाड़ी भूस्खलन में फँस गई। इस दौरान पहाड़ी के टूटते और उस पर से भारी-भरकम पत्थर को गिरते देख किसी स्थानीय ने इसे रिकॉर्ड कर लिया।

प्रसार भारती ने अपने ट्विटर हैंडल से इस वीडियो को शेयर किया है। वीडियो में आप स्पष्ट तौर पर भूस्खलन और उसके खौफनाक दृश्यों को देख सकते हैं।

इस हादसे की सूचना मिलते ही पुलिस और प्रशासन मौके पर पहुँच गई है। हालाँकि पहाड़ी से लगातार गिरते पत्थर के कारण रेस्क्यू में दिक्कत आ रही है। प्रशासन के साथ बटसेरी के स्थानीय लोग भी रेस्क्यू में जुटे हुए हैं।

भूस्खलन होने से गाँव के लिए बास्पा नदी पर बना करोड़ों का पुल टूट गया है, जिससे गाँव का संपर्क कट गया है।

‘गाँधी की हत्या के बाद कॉन्ग्रेस ने करवाया था ब्राह्मणों का नरसंहार, पुलिस ने दर्ज नहीं किया एक भी केस’: इतिहासकार का खुलासा

ये अब किसी से छिपा नहीं है कि महात्मा गाँधी की हत्या के बाद मुंबई व पूरे महाराष्ट्र में ब्राह्मणों के खिलाफ दंगे भड़क गए थे और उनका नरसंहार हुआ था। अब लेखक व इतिहासकार विक्रम सम्पत ने कहा है कि महात्मा गाँधी की हत्या के बाद ब्राह्मण-विरोधी नरसंहार कॉन्ग्रेस नेताओं ने करवाया था। उन्होंने बताया कि इन मामलों में एक भी केस दर्ज नहीं किया गया था। विक्रम सम्पत ने ‘Times Now’ चैनल पर नविका कुमार से बात करते हुए ये बात कही

बता दें कि विक्रम सम्पत को विनायक दामोदर सावरकर पर शोध कर के उनकी जीवनी लिखने के लिए जाना जाता है। उन्होंने सावरकर पर ‘Savarkar (Part 1): Echoes from a Forgotten Past, 1883–1924’ और ‘Savarkar (Part 2): A Contested Legacy, 1924-1966’ नामक पुस्तकें लिखी हैं। उन्होंने इन दोनों पुस्तकों में वीर सावरकर की पूरी जीवनी को समेटा है।

विक्रम सम्पत ने कहा कि ये आज भी अधिकतर लोगों को पता नहीं है कि 1984 में दिल्ली व पंजाब में हुए सिख नरसंहार की तरह ही 1948 में भी कॉन्ग्रेस ने मुंबई में ब्राह्मणों का नरसंहार करवाया था। उन्होंने कहा कि पूरे महाराष्ट्र में ब्राह्मणों को निशाना बनाया गया था और ब्राह्मण समाज के हजारों लोगों को मौत के घाट उतार दिया गया था। बता दें कि नाथूराम गोडसे ‘चितपावन ब्राह्मण’ समुदाय से सम्बन्ध रखते थे।

उन्होंने बताया कि उस दंगे में कई कॉन्ग्रेस नेताओं और समर्थकों ने भाग लिया था। विक्रम सम्पत ने जानकरी दी कि नागपुर में कॉन्ग्रेस के 100 दंगाइयों को गिरफ्तार किया गया था, लेकिन उनके खिलाफ एक भी केस दर्ज नहीं हुआ। बकौल सम्पत, भारतीय लोकतंत्र के इस काले अध्याय को हमेशा के लिए इतिहास के पन्नों से मिटा दिया गया। उन्होंने कहा कि आज की पीढ़ी को तो पता भी नहीं है कि ऐसा कुछ हुआ था।

विक्रम सम्पत ने कहा, “वीर सावरकर पर पुस्तक लिखने के दौरान कई ऐसे लोग सामने आए, जिनके पूर्वजों को उस ब्राह्मण विरोधी नरसंहार में निशाना बनाया गया था। उन्होंने अपनी कहानी मुझे बताई। महात्मा गाँधी की हत्या में वीर सावरकर को आरोपित बनाया गया, जिसके बाद उन्हें एक तरह से राजनीति में बहिष्कृत कर दिया गया। अदालत ने उन्हें निर्दोष साबित किया, लेकिन बावजूद इसके उन्हें लेकर गलत धारणाएँ तैयार की गईं।

विक्रम सम्पत ने आरोप लगाया कि लिबरल लोग अपने विचार से अलग धारणाओं को जगह नहीं देते हैं और भारत में जब भी इतिहास की बात आती है तो एक संकीर्ण नैरेटिव को आगे बढ़ाया जाता है। उन्होंने कहा कि चूँकि इतिहास के कई पन्नों को जानबूझ कर मिटा दिया गया है, उन्हें फिर से खँगालना ज़रूरी है। उन्होंने कहा कि आक्रांताओं और स्वतंत्रता संग्राम को लेकर आज़ादी के बाद शासक के हिसाब से इतिहास लिखा गया।

महादेव रानाडे, गोपाल कृष्ण गोखले, लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक और वीर सावरकर जैसे नाम इसी चितपावन ब्राह्मण जाति से सम्बन्धित हैं। तब महिलाओं और बच्चों तक को शिकार बनाया गया था। इस कत्लेआम में 20 हजार के करीब मकान और दुकानें जला दी गईं। नरसंहार में वीर सावरकर के भाई नारायण दामोदर सावरकर भी मारे गए थे। तकरीबन 1000 से 5000 चितपावन ब्राह्मणों को निर्ममता से रात के अंधेरों में मौत के घाट उतार दिया गया। संख्या 8000 भी हो सकती है।

उस ज़माने में भी इस सम्बन्ध में अखबार में खबरें कम ही आईं, हालाँकि विदेश के अख़बारों ने इस पर रिपोर्ट छापी थी। विदेशी लेखकों ने बताया है कि गाँधी के अनुयाइयों द्वारा फैलाई गई इस हिंसा में ब्राह्मणों के प्रति नफरत फैलाने वाले संगठनों ने भी हवा दी। इनमें कुछ ऐसे संगठन भी थे जिनका नाम ज्योतिबा फुले से जुड़ा है। RSS और हिन्दू महासभा के दफ्तरों में तोड़फोड़ हुई थी। एक लेखक ने बताया था कि पुलिस ने कभी कोई भी सरकारी रिकॉर्ड उनसे शेयर नहीं किया।

इरफान ने बनाया फेक सुसाइड वीडियो, हुआ गिरफ्तार: इंस्टाग्राम पर फॉलोवर बढ़ाने के लिए करता था कारनामा

मुंबई में एक सोशल मीडिया इंफ्लुएंसर को एडिटिंग सॉफ्टवेयर और स्पेशल इफेक्ट्स के जरिए आत्महत्या का वीडियो बनाने और उसे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर पोस्ट कर आत्महत्या को प्रोमोट करने के जुर्म में गिरफ्तार किया गया है। सोशल मीडिया इंफ्लुएंसर इरफान खान (20 वर्ष) ने इंस्टाग्राम और दूसरे सोशल मीडिया एकाउंट्स पर अपने फॉलोवर्स बढ़ाने के लिए ट्रेन की पटरी पर बैठकर तेज रफ्तार में आती ट्रेन के नीचे आकर अपनी जान देने का वीडियो बनाया था।

टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, इरफान विले पार्ले (वेस्ट) का रहने वाला है और वीडियो बांद्रा और खार स्टेशन के बीच शूट किया गया है। इस वीडियो में आरोपित इरफान एक ऐसे आशिक की ऐक्टिंग करता है, जिसे उसकी प्रेमिका छोड़ कर चली गई है और वह ट्रेन की पटरी पर बैठ हुआ है जहाँ तेज रफ्तार से आती हुई एक ट्रेन उसे उड़ाती हुई निकाल जाती है। असल में इरफान ने एडिटिंग सॉफ्टवेयर और स्पेशल इफेक्ट्स की सहायता से ट्रेन के सामने आत्महत्या करने का यह वीडियो तैयार किया था और सोशल मीडिया एकाउंट्स में अपलोड कर दिया।

मुंबई रेलवे पुलिस कमिश्नर खालिद ने बताया कि सोशल मीडिया पर यह वीडियो अपलोड होने के बाद रेलवे पुलिस की टीम ने आरोपित इरफान को ट्रैक किया और उसके घर पहुँची, लेकिन वहाँ इरफान नहीं मिला। हालाँकि, बाद में उसे गिरफ्तार कर लिया गया। डीसीपी प्रदीप चह्वान ने बताया कि आरोपित इरफान के खिलाफ आईपीसी की धारा 188, 336 और 505(1) के तहत मामला दर्ज किया गया है। साथ ही उसके खिलाफ इंडियन रेलवे ऐक्ट की धारा 145 और 147 भी लगाई गई है। पुलिस ने यह भी स्पष्ट किया कि आरोपित इरफान ने सोशल मीडिया में फॉलोवर बढ़ाने के लिए ऐसा वीडियो बनाया था।

हालाँकि, इरफान ने एक और वीडियो जारी करके सफाई दी है कि उसका इरादा किसी को आत्महत्या के लिए उकसाने का नहीं था। वीडियो को पोस्ट करने के लिए उसने माफी माँगी है और बताया कि इस वीडियो का एक सेकंड पार्ट भी आने वाला था, जिसमें वह सपने से उठता है और अपनी अम्मी-अब्बू के साथ है और खुश है।

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