Sunday, October 17, 2021
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‘बेअदबी करने वालों को यही सज़ा मिलेगी, हम गुरु की फौज और आदि ग्रन्थ ही हमारा कानून’: हथियारबंद निहंगों को दलित की हत्या पर गर्व

हरियाणा के सिंघू बॉर्डर पर तरनतारन के रहने वाले लखवीर सिंह की बेरहमी से हत्या किए जाने को निहंग सिखों ने जायज ठहराया है। उन्हें इस हत्या का अफसोस नही, बल्कि गर्व है। उनका कहना है कि वो गुरु ग्रंथ की मिलिट्री हैं और वो किसानों और पुलिस के बीच की दीवार हैं। इनका कहना है कि जब तक किसानों का विरोध प्रदर्शन चलेगा, उनकी फौज इनकी रक्षा करेगी।

दैनिक भास्कर की रिपोर्ट के मुताबिक, शिरोमणि पंथ अकाली बुड्ढा दल के जत्थेदार अमान सिंह शुक्रवार को धमकी दी कि अगर कोई बेअदबी करता है तो गुरू की फौजें ऐसा ही करती हैं। अमान सिंह का कहना है कि गुरू की फौजों का यही कर्तव्य है। निहंग सिख खुद को गुरू की की फौज का सैनिक मानते हैं, जिन्हें सिख लाडली सेना कहते हैं। सिंघू बॉर्डर पर मौजूदा वक्त में निहंगों के 6 दल मौजूद हैं। इन लोगों के पास घोड़े, तलवार और कटार भी होती हैं और ये लड़ने में एक्सपर्ट होते हैं।

इससे पहले अमान सिंह ने कहा था कि अगर किसानों का प्रदर्शन चलेगा निहंग उनकी सुरक्षा करेंगे। अगर पुलिस किसानों पर कार्रवाई करेगी तो हम उनकी सुरक्षा करेंगे। उन्होंने पिछले साल वाली बात दोहराते हुए कहा कि हम किसानों और पुलिस के बीच की दीवार हैं। गुरु का हर सैनिक अपनी जान दे सकता है।

पंथ अकाली निरबैर खालसा दल के जत्थेदार बलविंदर सिंह ने किसानों को अपनी प्रजा बताया। उन्होंने खुद को इनका रखवाला बताया है। उनका मानना है कि गुरु गोविंद सिंह ने उन्हें आदेश दिया है कि जहाँ भी जरूरत पड़ेगी उन्हें वहाँ जाना पड़ेगा। बलविंदर सिंह ने इस बात की ओर इशारा किया कि सिंघू बॉर्डर पर किसान केवल धरने ही नहीं दे रहे हैं, बल्कि वो हथियारों से भी सुसज्जित हैं।

गुरू की बेअदबी करने वालों के साथ ऐसा ही होगा

हालाँकि, विरोध स्थल पर निहंगों की सेना की संख्या को लेकर उन्होंने कहा, “ये खुफिया जानकारी है। हम महाराज की सेना हैं और सेना अपनी जानकारियाँ शेयर नहीं करती है।” उनका कहना है कि निहंग केवल गुरुग्रंथ को ही अपना कानून मानते हैं और उसकी रक्षा करना उनका कर्तव्य है। गुरु की बेअदबी करने वालो को यही सजा दी जाएगी। अगर ऐसी हत्याएँ पहले होती तो किसी की हिम्मत बेअदबी करने की हिम्मत नहीं पड़ती।

18 साल के निहंग सिख सतनाम सिंह ने खुद को गुरु की लाडली फौज बताया और कहा गुरु ने हमें दिल्ली के तख्त पर राज करने के लिए बनाया है।

सरकारी नौकरी से निकाला गया सैयद अली शाह गिलानी का पोता, J&K में रिसर्च ऑफिसर बन कर बैठा था: आतंकियों के समर्थन का आरोप

अलगाववादी नेता रहे सैयद अली शाह गिलानी के पोते अनीस-उल-इस्लाम को जम्मू कश्मीर में सरकारी नौकरी से निकाल बाहर किया गया है। उसे वहाँ ‘शेर-ए-कश्मीर’ इंटरनेशनल कन्वेन्शन सेंटर में रिसर्च अधिकारी के रूप में तैनात किया गया था। ‘हुर्रियत कॉन्फ्रेंस’ के नेता सैयद अली शाह गिलानी की मौत के 45 दिन बाद शनिवार (16 अक्टूबर, 2021) को सरकार ने ये कार्रवाई की। उसके साथ-साथ डोडा के एक शिक्षक को भी सरकारी नौकरी से निकाल बाहर किया गया।

जम्मू कश्मीर के उप-राज्यपाल मनोज सिन्हा ने ये आदेश जारी किया है। उन्होंने अनुच्छेद-311 का प्रयोग कर के ये आदेश दिया, जिसके तहत हाल ही में आतंकियों से हमदर्दी रखने वाले कई लोगों को सरकारी नौकरी से बर्खास्त किया गया है। आदेश में कहा गया है कि उप-राज्यपाल ने तथ्यों और इस मामले की परिस्थिति के अवलोकन व सूचनाओं के अध्ययन के बाद पाया कि उसे सरकारी सेवा से बर्खास्त किया जाता है।

सैयद अली शाह गिलानी का पोटा अनीस-उल-इस्लाम श्रीनगर के बेमिना स्थित ग्रीन पार्क में तैनात था। उसके अब्बा का नाम अल्ताफ अहमद शाह है। राज्य की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए सरकार ने ये फैसला लिया। उसे तत्काल प्रभाव से सरकारी सेवा से निकाला गया है। इसी तरह GMS कठवा में तैनात डोडा के शिक्षक फरुख अहमद बट को लेकर भी आदेश जारी किया गया। ये आतंकियों से सहानुभूति रखता था।

याद दिला दें कि जम्मू-कश्मीर के कट्टरपंथी अलगाववादी नेता सैयद अली शाह गिलानी को दफनाने से पहले उनके पार्थिव शरीर को पाकिस्तानी झंडे में लपेटा गया था। पाकिस्तानी मीडिया ने ही इस बात की जानकारी दी थी। गिलानी ने कभी भी कश्मीर को भारत का हिस्सा नहीं माना। सन् 1990 में उन्होंने अलगाववाद की राजनीति करने वालों के लिए एक मंच तैयार किया था, जिसका नाम ऑल पार्टी हुर्रियत कॉन्फ्रेंस रखा गया था। इसमें नेशनल कॉन्फ्रेंस के विरुद्ध तमाम गुट शामिल हो गए।

जम्मू कश्मीर फ़िलहाल हालात भयावह हैं। राजधानी श्रीनगर में आतंकियों ने एक ही दिन बाहरी राज्यों के दो नागरिकों की हत्या कर दी। ईदगाह इलाके में बिहार के एक रेहड़ी वाले को गोली मार दी गई, जो वहाँ पानी-पूरी बेचने थे। मृतक का नाम अरविंद कुमार साह है। वहीं आतंकियों ने शनिवार (16 अक्टूबर, 2021) को ही पुलवामा में सगीर अहमद नाम के शख्स को गोली मार दी, जो मिस्त्री का काम करते थे। पुलवामा के ही काकापोरा में सुरक्षाबलों को निशाना बनाकर ग्रेनेड हमला भी किया गया।

मुस्लिम बहुल किशनगंज के सरपंच से बनवाया था आईडी कार्ड, पश्चिमी यूपी के युवक करते थे मदद: Pak आतंकी अशरफ ने किए कई खुलासे

दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल द्वारा गिरफ्तार किए पाकिस्तानी आतंकी अशरफ का बिहार कनेक्शन सामने आ गया है। बिहार के किशननगंज में ही एक सरपंच ने उसका पहचानपत्र बनवाया था। वह बांग्लादेश के रास्ते भारत आया था। जाँच एजेंसियों को पूछताछ में उसने बताया है कि वो पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी आईएसआई के कहने पर दावत ए इस्लामी संस्था से जुड़ा हुआ था।

रिपोर्ट के मुताबिक, आतंकी अशरफ पहले बांग्लादेश के रास्ते भारत में घुसा और बिहार पहुँचा। लेकिन जब वहाँ उसकी दाल नहीं गली तो अजमेर पहुँचा, जहाँ उसकी मुलाकात बिहार के किशनगंज के रहने वाले कुछ युवकों से हुई। उनसे जान पहचान बढ़ाने के बाद वह बिहार पहुँचा और किशनगंज गया। वहाँ एक सरपंच ने उसका पहचान पत्र बनवाया। इसके बाद वह उसी के सहारे दिल्ली गया। स्पेशल सेल के एक अधिकारी ने बताया है कि अशरफ उर्फ अली अहमद नूरी दिल्ली के शास्त्री पार्क में जिस घर में किराए से रहता था वहाँ मकान मालिक से बिजली का बिल लेकर 2013 में पासपोर्ट भी बनवा लिया।

बाद में पासपोर्ट के जरिए उसने चार-पाँच बार विदेशों की यात्राएँ भी की। इससे पहले उसने 2010 में तुर्कमागन गेट में हैंडीक्राफ्ट का काम शुरू किया। 2012 में उसने ज्वेलरी शॉप भी ओपन की थी। 2014 में जादू-टोना करना भी सीखा था। इसके बाद वह मौलवी बना। इसके बहाने वह लोगों के घर में घुसता था और उनसे दोस्ती कर उन्हें जिहादी बनाने की कोशिश करता था। इसके अलावा स्पेशल सेल की जाँच में इस बात का खुलासा हुआ है कि वेस्टर्न यूपी के पाँच युवक भी उसकी मदद करते थे। बड़ी बात ये है कि इन सभी को ये बात अच्छी तरह से पता थी कि वो पाकिस्तानी नागरिक है।

पाकिस्तान से अशरफ को हर महीने सैलरी के तौर पर यूनियन मनी ट्रांसफर से 20,000-25,000 रुपए मिलते थे। इसके अलावा 10-15 हजार वो भी कमा लेता था। अब दिल्ली पुलिस इस मामले में बिहार के कई लोगों के भी बयान दर्ज करने की तैयारी कर रही है।

J&K में बिहार के गोलगप्पा विक्रेता अरविंद साह की आतंकियों ने कर दी हत्या, यूपी के मिस्त्री को भी मार डाला: एक दिन में 2 हत्याएँ

जम्मू कश्मीर की राजधानी श्रीनगर में आतंकियों ने एक ही दिन बाहरी राज्यों के दो नागरिकों की हत्या कर दी। ईदगाह इलाके में बिहार के एक रेहड़ी वाले को गोली मार दी गई, जो वहाँ पानी-पूरी बेचने थे। मृतक का नाम अरविंद कुमार साह है। उन्हें गंभीर स्थिति में ही श्रीनगर SMHS ले जाया गया, जहाँ उन्हें मृत घोषित कर दिया गया। वो बिहार के बाँका जिले के रहने वाले थे। उन्हें ईदगाह पार्क के बाहर गोली मारी गई।

वहीं आतंकियों ने शनिवार (16 अक्टूबर, 2021) को ही पुलवामा में सगीर अहमद नाम के शख्स को गोली मार दी, जो मिस्त्री का काम करते थे। पुलवामा के ही काकापोरा में सुरक्षाबलों को निशाना बनाकर ग्रेनेड हमला भी किया गया। अक्टूबर महीने में अब तक घाटी में 8 नागरिकों की हत्याएँ की जा चुकी हैं। सुरक्षा बलों ने इसके बाद चलाए गए अभियान में 11 आतंकियों को भी मार गिराया है।

हाल ही में श्रीनगर के ही लालबाजार में वीरेंद्र पासवान नाम के बिहार के महादलित ठेले वाले की हत्या कर दी गई थी। पत्रकार आदित्य राज कौल ने जानकारी दी है कि डर का माहौल बनाने के लिए आतंकी बाहरी राज्यों से यहाँ आए गरीब ठेले वालों को निशाना बना रहे हैं। इससे पहले एक स्कूल में दो गैर-मुस्लिम शिक्षकों की भी हत्या कर दी गई थी। केंद्रीय गृह मंत्रालय ने इन हत्याओं पर बैठकें भी की थीं।

आज पुलवामा को पंपोर में भी आतंकियों और सुरक्षाबलों के बीच मुठभेड़ चल रही है और लश्कर ए तैयबा के टॉप कमांडर उमर मुश्ताक खांडे समेत 2 आतंकियों को मार कर ढेर कर दिया गया है।मुश्ताक खांडे ने इसी साल 2 पुलिसवालों की बेरहमी से हत्या की थी और वो पुलिस की हिटलिस्ट में शामिल था। अक्टूबर महीने में अब तक 11 आतंकियों का खात्मा किया गया है। इनमें से एक जैश ए मोहम्मद का टॉप कमांडर भी था। आतंकियों के साथ हुई मुठभेड़ में एक जेसीओ सहित 7 जवानों ने अपना बलिदान दिया है।

जम्मू कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री और JKNC के नेता उमर अब्दुल्लाह ने इस हत्याकांड को ‘निंदा योग्य’ बताते हुए कहा कि अरविंद साह श्रीनगर में काम के लिए मौका तलाशते हुए आए थे। वहीं PDP की मुखिया और पूर्व सीएम महबूबा मुफ़्ती ने इस पर टिप्पणी करते हुए कहा कि ऐसी घटनाएँ बताती हैं कि हमें जम्मू कश्मीर की जनता से जुड़ने की जरूरत है। उन्होंने ‘कंस्ट्रक्टिव बातचीत’ पर भी जोर दिया।

दलित लखबीर के हत्या आरोपित का सिख डेरे में सम्मान, पहनाई गई नोटों की माला, अब गिरफ्तार: मृतक के शरीर पर जख्म के 37 निशान

दिल्ली के सिंघु बॉर्डर पर चल रहे ‘किसान आंदोलन’ में दलित युवक लखबीर सिंह की हत्या के मामले में दूसरे आरोपित नारायण सिंह को पंजाब के अमृतसर से गिरफ्तार किया गया। लखबीर सिंह का गला रेत कर टाँग दिया गया था और उनका दाहिना हाथ काट कर भी लटका दिया गया था। बाबा नारायण सिंह जंडियाला गुरु से दबोचा गया। उसने लखबीर सिंह की हत्या में भागीदारी कबूल की है।

लेकिन, गिरफ़्तारी से पहले अमृतसर में उसे सिख समुदाय के बीच सम्मानित भी किया गया। श्री अकाल तख्त साहिब पर आत्मसमर्पण करने जा रहे बाबा नारायण सिंह तरना दल निहंग जत्थेबंदी का सदस्य है। सोनीपत जिले को कुंडली थाने की पुलिस को इस बारे में सूचित कर दिया गया है, जो उसे लेने पहुँच रही है। अमृतसर में एक प्रमुख सिख धार्मिक स्थल पर उसे सम्मानित करते हुए नोटों की माला भी पहनाई गई थी।

उधर लखबीर सिंह का पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट भी सामने आया है, जिसमें उनके शरीर पर विभिन्न हथियारों से जख्म के 37 निशान मिले हैं। लाठी-डंडों के अलावा कई धारदार हथियारों से उन पर बहुतों बार प्रहार किया गया था। ज़्यादा खून बहने की वजह से उन्होंने दम तोड़ा था। लखबीर सिंह का अंतिम संस्कार उनके गाँव में शांतिपूर्ण ढंग से कराने के लिए पुलिस को लगाया गया है। ‘संयुक्त किसान मोर्चा’ इस घटना से पल्ला झाड़ रही है।

आरोपित नारायण सिंह को निहंगों के डेरे पर सम्मानित किया गया था। पीड़ित परिवार ने इस मामले में उच्च-स्तरीय जाँच की माँग की है। खेतिहर मजदूर परिवार का कहना है कि ईश्वर से डरने वाले लखबीर सिंह धार्मिक ग्रन्थ की बेअदबी के बारे में सोच भी नहीं सकते। चीमा कलाँ गाँव में उनकी पत्नी 12, 11 और 8 वर्षीय बेटियों के साथ रहती हैं। खेतों और मंडी में काम कर के वो दो वक़्त की रोटी का जुगाड़ करते थे।

उधर इंडिया टुडे ने इसे ‘सूत्रों’ का नाम देते हुए अपने ताजा रिपोर्ट में दावा किया है कि संयुक्त किसान मोर्चा ने कथित तौर पर कई मौकों पर हरियाणा और दिल्ली पुलिस को विरोध स्थल पर इस ‘सशस्त्र समूह’ की मौजूदगी के बारे में शिकायत की थी। संतुलन बनाने की कोशिश करते हुए एसकेएम ने एक बयान में यह भी कहा कि मोर्चा किसी भी धार्मिक पाठ या प्रतीक की बेअदबी के खिलाफ है।

’23 साल में आप रोमांटिक होते हैं’: क्रांतिकारी उधम सिंह को फिल्म में शराब पीते दिखाया, डायरेक्टर ने दी सफाई – वो लंदन में थे

देश की आजादी के लिए अग्रेजों से लोहा लेने वाले महान क्रांतिकारी सरदार ऊधम सिंह के जीवन पर आधारित फिल्म निर्माता शूजीत सरकार की नई फिल्म ‘सरदार उधम’ ओटीटी प्लेटफॉर्म अमेजन प्राइम वीडियो पर रिलीज हो गई है। फिल्म में विक्की कौशल मुख्य भूमिका में हैं। इसमें ऊधम सिंह को शराब पीते हुए दिखाया गया है। जबकि इससे पहले ऐसा किसी भी डायरेक्टर ने नहीं किया था। फिलहाल इस पर अब फिल्म के डायरेक्टर ने अपनी सफाई दी है।

हिंदुस्तान टाइम्स को दिए इंटरव्यू में शूजीत सरकार ने कहा कि उन्हें फिल्म में ऊधम सिंह को शराब पीते हुए दिखाए जाने पर लोग उनसे इस बात को लेकर सवाल कर रहे हैं कि आखिर उन्होंने ऐसा क्यों किया। शूजीत ने कहा, “उस समय वह लंदन में थे। हम हर समय ऐसा करते हैं। उनके लिए यह सामान्य होगा उस अवस्था में एक युवक क्या करेगा?”

इसको लेकर तथ्य होने की बात कहते हुए डायरेक्टर ने कहा, “जहाँ तक ​​किसी को आपत्ति है, मैं सीन पर बैठकर चर्चा करने के लिए तैयार हूँ। मेरे पास इस बारे में तथ्य हैं कि उधम सिंह कहाँ गए, उन्होंने क्या किया। मैं वह सब साझा कर सकता हूँ। क्या होता है जब आप 23 साल के होते हैं या 30 साल के। आप रोमाँटिक होते हैं। आप भी वही काम करोगे जो आम लोग करते हैं।”

शूजीत सरकार ने यह भी कहा कि उधम सिंह में ब्रिटिश पात्रों के डॉयलॉग्स की बात आती है तो वह हिंदी का इस्तेमाल करने से बचते हैं। उन्होंने कहा, “मैंने उस तरह की ‘गोरा भाषा’ का इस्तेमाल नहीं किया है जो बॉलीवुड आमतौर पर इस्तेमाल करता है। उस हिंदी ने अंग्रेजी लहजे में कहा। मैंने कभी उससे अपनी पहचान नहीं बनाई और न ही कभी ऐसी भाषा का उपयोग करने का अर्थ समझा। मेरी फिल्म में अंग्रेज अंग्रेजी बोलते हैं। अंग्रेज अंग्रेजों की तरह बोल रहे हैं। मैंने यह भी सुनिश्चित किया कि कास्टिंग वहीं से हो।”

खाद की किल्लत से राजस्थान के किसानों में हाहाकार, लग रही लंबी-लंबी लाइनें: CM गहलोत के भाई फँसे हैं फर्टिलाइजर घोटाले में

पूरा राजस्थान वर्तमान में खाद की भारी कमी से जूझ रहा है। DAP खाद की भारी किल्लत के चलते कई किसानों ने अपनी फसल खराब होने का आरोप लगाया है। ताजा घटनाक्रम में राजस्थान के सवाई माधोपुर में खाद की किल्लत के चलते किसानों की लम्बी लाइनें पुलिस चौकी के आगे देखने को मिलीं। किसानों का यह जमावड़ा मित्रपुरा पुलिस चौकी के आगे लगा था। खाद लेने के लिए सड़कों पर खड़े किसानों के चलते आने – जाने वालों को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ा।। घटना 16 अक्टूबर 2021 (शनिवार) की बताई जा रही है। इसका वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हुआ है।

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार किसानों ने DAP न मिलने पर रोष जताया है। बताया जा रहा है कि शनिवार (16 अक्टूबर 2021) को राजस्थान के सवाई माधोपुर में कई महिलाएँ गुस्से से पुलिस चौकी मित्रपुरा में घुस गईं। इसके चलते थोड़ी देर तक सरकारी काम बाधित भी रहा।

किसानों के अनुसार वर्तमान में फसल की बुवाई का अंतिम चरण में है। ऐसे में जिले में खाद आपूर्ति सुचारु रूप से न चलने के कारण उनकी खेती बाधित हो रही है। किसानों के अनुसार पूरे सवाई माधोपुर जिले में DAP खाद की किल्लत चल रही है।

इन हालातों में कहीं भी खाद आने की सूचना पर किसानों की भीड़ लग जा रही है। शुक्रवार (15 अक्टूबर 2021) को भी ऐसी ही अफरातफरी भाड़ौती में हुई थी जब खाद को पाने के लिए किसान बेकाबू हो गए थे। ऐसी ही सूचना शनिवार (16 अक्टूबर) को मित्रपुरा कस्बे में मिली थी जिसके बाद वहाँ किसानों का जमावड़ा लग गया था।

खाद के ट्रक मित्रपुरा पहुँचने के बाद आस पास के गाँवों से किसान परिवार की सैकड़ों महिलाएँ भी जमा हो गईं। कृषि पर्यवेक्षक महेश शर्मा के अनुसार मित्रपुरा और उदगाँव के किसानों के लिए 2 ट्रकों में खाद आई थी। बताया जा रहा है कि भीड़ को नियंत्रित करने के लिए पुलिस का सहारा लेना पड़ा। लेकिन जब इसके बाद भी भीड़ काबू में नहीं आ रही थी तब पुलिस चौकी का दरवाजा बंद कर दिया गया।

थोड़ी देर तक एक एक कर के खाद बाँटी गई। लेकिन कुछ समय बाद कई महिलाएँ पुलिस चौकी की दीवार फाँद कर अंदर पहुँच गईं। इसके चलते फिर थोड़े समय के लिए खाद वितरण में व्यवधान आया। काफी मशक्क्त के बाद इसको फिर से सुचारु रूप से चालू किया जा सका।

इस से पहले सवाई माधोपुर जिले में ही डीएपी खाद की न मिलने पर राजस्थान खेत मजदूर यूनियन के प्रदेश सह संयोजक कांजी मीणा के नेतृत्व में क्षेत्र के किसानों ने भाडौती ग्राम सेवा सहकारी समिति पर विरोध प्रदर्शन किया था। 10 दिन पूर्व किए गए उस प्रदर्शन में खाद की उपलब्धता ठीक न होने पर राजस्थान सरकार के विरुद्ध आंदोलन की भी चेतावनी दी गई थी। प्रदर्शन के दौरान किसान नेताओं ने कहा था कि जिले के सभी सोसायटी केंद्रों पर डीएपी खाद नहीं मिल रही। इसी वजह से किसान सरसों की बोआई नहीं कर पा रहे हैं।

सवाई माधोपुर में खाद की किल्लत पर राजस्थान भाजपा के प्रदेश मंत्री जितेंद्र गोठवाल राजस्थान सरकार को पत्र भी लिख चुके हैं। 11 अक्टूबर 2021 को उन्होंने मुख्यमंत्री अशोक गहलोत को सम्बोधित करते हुए पत्र में लिखा था कि – ‘मेरे विधानसभा क्षेत्र खंडार , जिला सवाई माधोपुर में किसानों को रबी की फसल हेतु डी.ए.पी. खाद की उपलब्धता सुनिश्चित करने के संबंध में माननीय मुख्यमंत्री महोदय को पत्र के माध्यम से अवगत कराया। खण्डार से पूर्व BJP विधायक जितेंद्र गोठवाल पूर्व संसदीय सचिव भी रह चुके हैं।

राजस्थान के धौलपुर में भी खाद के लिए किसानों को लम्बी लाईनों में लगे देखा गया। कतार तोड़ने वालों को पुलिस बार-बार टोकती रही

चूरू से भारतीय जनता पार्टी के विधायक राजेंद्र राठौर ने भी प्रदेश में खाद की किल्लत पर गहलोत सरकार को आड़े हाथों लिया। राजस्थान विधानसभा में प्रतिपक्ष के उपनेता ने विरोध स्वरूप अपना वीडियो भी जारी किया है। उन्होंने कहा है कि – ‘किसान विरोधी कॉन्ग्रेस सरकार! एक दशक के बाद आज फिर डीएपी खाद के लिए अन्नदाताओं को लम्बी-लम्बी कतारों में घंटों खड़ा होना पड़ रहा है। राजस्थान में कॉन्ग्रेस सरकार ने डीएपी खाद आपूर्ति के लिए कोई प्रबंध नहीं किया है। डीएपी की कमी के कारण किसानों की फसल नष्ट होने की कगार पर है।’

दिल्ली की सीमाओं पर चल रहे किसान आंदोलन की अगुवाई कर रहे गुरुनाम सिंह चढूनी ने भी राजस्थान में खाद की किल्लत स्वीकारी है। उन्होंने लिखा है कि – हरियाणा, पंजाब, राजस्थान और अन्य प्रदेशों में खाद न मिलने के कारण किसान सरसों व अन्य फसलों की वो बुआई नहीं कर पा रहे किसान बहुत परेशान हैं सरकार जल्द इसका समाधान करे।

राजस्थान के भरतपुर जिले में भी खाद के लिए किसानों का आपस में उलझने का वीडियो वायरल हुआ था। बताया गया था कि कई घंटे इंतज़ार के बाद भी जब उन्हें खाद नहीं मिली तब उनके बीच आपसी विवाद शुरू हो गया।

राजस्थान के किसान नेता और सामजिक कार्यकर्ता हिम्मत सिंह गुर्जर ने भी राजस्थान में किसानों को खाद की कमी से जूझता हुआ बताया। उन्होंने लिखा है कि राजस्थान के किसानों को DAP खाद न मिलने के कारण सरसो व अन्य फसलों की बुवाई नहीं कर पा रहे है, राजस्थान सरकार तुरंत किसानों को खाद उपलब्ध करवाए अन्यथा संयुक्त किसान मोर्चा फैसला लेगा।

यहाँ ये जानना जरूरी है कि 22 जुलाई 2020 को प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के भाई अग्रसेन गहलोत के ठिकानों पर छापेमारी की थी। अग्रसेन गहलोत मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के बड़े भाई है। छापेमारी की वजह फर्टिलाइजर घोटाले में उनकी संलिप्तता बताई गई थी। भारतीय जनता पार्टी ने साल 2017 में ही अग्रसेन गहलोत पर फर्टिलाइजर घोटाले में शामिल होने के आरोप लगाए थे।

तब अग्रसेन की दुकानों और उनके प्रतिष्ठानों की तलाशी ली गई थी। उनके जोधपुर स्थित सम्पत्तियों की ईडी ने तलाशी ली थी। उनकी ‘अनुपम कृषि’ नाम की दुकान है, जहाँ वो 1980 से पहले से ही फर्टीलाइजर का व्यापार करते आ रहे हैं। इसी दुकान के ऊपर ही उनके भाई अशोक गहलोत का चुनावी कार्यालय है। मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के भाई अग्रसेन ‘स्मगलिंग सिंडिकेट’ में भी शामिल बताए गए थे।

राजस्थान कॉन्ग्रेस ने चुनाव से पहले किसानों की कर्जमाफी का भी वादा किया था। लेकिन सरकार बनने के बाद किसानों को कुर्की के नोटिस थमा दिए गए थे। राजस्थान सरकार के सहकारिता मंत्री उदय लाल आंजना तो इस वादे से साफ़ मुकर गए थे। उन्होंने कहा था कि “हमने कोई वादा नहीं किया था कि सभी किसानों को लोन माफ करेंगे।” इसी के साथ सरकार का कहना था कि उनके पास इतने पैसे नहीं है कि सभी किसानों का लोन माफ कर सके।

मोहम्मद हनीफ ने 20 साल के बीमार युवक के साथ किया बलात्कार: टहलने गया था पीड़ित, लौटा तो मिट्टी में सने थे कपड़े

कर्नाटक में एक मुस्लिम व्यक्ति ने 20 साल के युवक का रेप कर डाला। मामला राज्य के दक्षिण कन्नड़ जिले के पुत्तूर तहसील का है, जहाँ एंडोसल्फान पीड़ित व्यक्ति का उसी गाँव के आरोपित ने यौन उत्पीड़न किया।

आरोपित की पहचान मोहम्मद हनीफ के तौर पर हुई है। इस घटना को लेकर पुत्तूर शहर की पुलिस का कहना है कि पुत्तूर के कबाका गाँव के मुरा का रहने वाला पीड़ित युवक शुक्रवार (15 अक्टूबर, 2021) की शाम करीब छह बजे टहलने के लिए गया हुआ था। टहलने के बाद वह वापस घर लौटा तो उसके पिता ने देखा कि उसके कपड़े मिट्टी में सने हुए थे। जब उन्होंने उससे इसका कारण पूछा तो पीड़ित रोते हुए बताया कि मोहम्मद हनीफ नाम के एक शख्स ने उसके साथ रेप किया है। वह पीड़ित का परिचित भी था।

पीड़ित ने बताया कि घर वापस लौटते वक्त मुरा रेलवे क्रॉसिंग के पास आरोपित हनीफ उसे मिला। वह कथित तौर पर गन्ना खरीदने के बहाने पीड़ित को बहला-फुसलाकर एक झाड़ी में ले गया। वहाँ उसके साथ सेक्स करने को कहा, जब पीड़ित ने ऐसा करने से इनकार किया तो हनीफ ने उसे पीटा और उसका बलात्कार किया। इसके साथ ही आरोपित ने इसके बारे में परिवार के लोगों से बताने पर जान से मारने की धमकी भी दी। गौरतलब है कि रेप पीड़ित लड़का एँडोसल्फान पीड़ित है।

इस मामले में पीड़ित की शिकायत पर पुत्तूर शहर की पुलिस ने हनीफ को धारा 504 (शांति भंग करने के इरादे से जानबूझकर अपमान), 323 (स्वेच्छा से चोट पहुँचाना), 377 (अप्राकृतिक अपराध), 506 (आपराधिक धमकी) के तहत मामला दर्ज किया है। फिलहाल आरोपित को गिरफ्तार कर कोर्ट में पेश किया गया, जहाँ से उसे न्यायिक हिरासत में भेजा गया है।

क्या है एँडोसल्फान

एँडोसल्फान एक तरह का पेस्टीसाइड्स है, जिसका इस्तेमाल खेतों में किया जाता है। यह बहुत ही जहरीला होता है, इसीलिए यह मनुष्यों के साथ ही पर्यावरण के लिए भी हानिकारक होता है। इसे साल 1954 में विकसित किया गया था।

रुद्राक्ष पहनने और चंदन लगाने की सज़ा: सरकार पोषित स्कूल में ईसाई शिक्षक ने छात्रों को पीटा, माता-पिता ने CM स्टालिन से लगाई गुहार

तमिलनाडु के कांचीपुरम में ईसाई शिक्षक को छात्रों का रुद्राक्ष पहनना और विभूति लगाना बिल्कुल भी पसंद नहीं आया। इसकी वजह से उसने छात्रों के साथ न केवल दुर्व्यवहार किया, बल्कि उन्हें पीटा भी। छात्रों के माता-पिता ने सीएम के स्पेशल सेल को पत्र लिखकर स्कूल और शिक्षक के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की माँग की है।

तमिल भाषा में लिखा गया यह पत्र सोशल मीडिया वायरल हो गया है। 10वीं कक्षा में पढ़ने वाले लड़कों किरुबाकरण और किरुबानंदन के माता-पिता ने सीएम के स्पेशल सेल को यह पत्र लिखा है। इसमें उन्होंने जॉयसन नाम के ईसाई शिक्षक पर आरोप लगाया है कि उसने पवित्र रुद्राक्ष पहनने और विभूति लगाने के कारण उनके बच्चों के साथ दुर्व्यवहार किया और उन्हें पीटा। दोनों लड़के कांचीपुरम के सरकारी सहायता प्राप्त स्कूल एंडरसन हायर सेकेंडरी स्कूल में पढ़ते हैं।

बताया जा रहा है कि शिक्षक जॉयसन ने कथित तौर पर पवित्र राख (विभूति) और रुद्राक्ष पहनने पर लड़कों को यह कहते हुए अपमानित किया था कि केवल उपद्रवी और मिसफिट (misfits) लोग ही इसे पहनते हैं। उन्होंने कथित तौर पर यह भी कहा कि जो लोग शिव भगवान के प्रतीकों को पहनते हैं वे अनैतिक हैं।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, जॉयसन ने न केवल लड़कों को कक्षा में प्रवेश करने से रोका, बल्कि रुद्राक्ष पहनने पर उन्हें पीटा और उनके सहपाठियों के सामने उन्हें अपमानित किया। लड़कों के माता-पिता ने आरोप लगाया है कि ईसाई शिक्षक ने उनके बच्चों के साथ अभद्र भाषा का प्रयोग किया, उन्हें गाली दी। इतने से भी जब उसका मन नहीं भरा तब उसने उनकी कक्षा में पढ़ने वाले अन्य बच्चों के सामने उन्हें अपमानित किया। लड़के अब स्कूल जाने से इनकार कर रहे हैं। उन्होंने मुख्यमंत्री एमके स्टालिन से अपने बच्चों को बेवजह परेशान करने वाले स्कूल और शिक्षक के खिलाफ कार्रवाई करने का अनुरोध किया है।

शिक्षक जॉयसन इससे पहले भी छात्रों के साथ दुर्व्यवहार कर चुका है। उसकी मानसिक स्थिति ठीक नहीं है और वह पढ़ाने में भी सक्षम नहीं है। साल 2017 में भी उसने इसी तरह से आठवीं कक्षा के छात्र को अपमानित कर पीटा था। सजा के कारण छात्र के बीमार पड़ने के बाद जॉयसन को गिरफ्तार कर लिया गया था। जब बच्चे के माता-पिता अन्य शिक्षकों के व्यवहार के बारे में पूछताछ करने के लिए स्कूल गए तो उन्हें वहाँ उन्हें उचित जवाब नहीं दिया गया।

बता दें कि दक्षिण भारत के चर्च द्वारा संचालित यह स्कूल 150 वर्ष से अधिक पुराना है और सरकार द्वारा इसे संरक्षण दिया जा रहा है। कांचीपुरम लोकसभा निर्वाचन क्षेत्र के वर्तमान सांसद, सेल्वम एक DMK नेता और इस स्कूल के पूर्व छात्र हैं। हाल ही में सीएम एमके स्टालिन ने चर्च ऑफ साउथ इंडिया की 75 वीं वर्षगाँठ में भाग लिया था। सीएसआई (Church of South India) राज्य भर में हजारों संस्थान चलाता है और यह पहली बार नहीं है, जब इन स्कूलों में हिंदू छात्रों को परेशान किया जा रहा है।

बंगाल के ISKCON वालों ने मंदिर के अंदर रमजान में करवाया था इफ्तार, बांग्लादेश के ISKCON मंदिर में मुस्लिम भीड़ कर रही हत्या-रेप

बांग्लादेश में इस्लामी कट्टरपंथियों ने सैकड़ों (500) की भीड़ में जमा होकर इस्कॉन मंदिर में हमला बोला और वहाँ लगे दुर्गा पंडाल को नष्ट करते हुए दो साधुओं की हत्या कर दी। इस दौरान कई श्रद्धालुओं पर भी हमला हुआ और काफी तोड़फोड़ मची। पीड़ादायक बात ये है कि भारत के अंदर पश्चिम बंगाल का इस्कॉन मंदिर ने रमजान के दौरान मुस्लिमों को इफ्तार करवाया था और आज बांग्लादेश में उसी इस्कॉन मंदिर पर वहाँ के मुस्लिम हमला बोल रहे हैं।

5 साल पहले की मीडिया रिपोर्ट्स यदि देखें तो पता चलता है कि कितने आदर के साथ इन मुस्लिमों को पश्चिम बंगाल के इस्कॉन मंदिर में इफ्तार कराया गया था। करीब 165 मुस्लिम बाइज्जत कुर्सी पर बैठे थे और खुद हिंदु कार्यकर्ताओं ने उनके लिए टेबल सजाई थी।

मेज में रखी प्लेटों में फल, फ्रूट, स्नैक, मिठाई, जूस के ग्लास, शरबत सब सजे थे। आवभगत के बाद उन्हें चंद्रोदय मंदिर, मायापुर जो कि उत्तरी कोलकाता से 130 किमी दूर है, वहाँ परिसर में ही नमाज पढ़ने को भी जगह दी गई थी। मुस्लिम नेता सैफुल इस्लाम ने इतना आदर सम्मान पाकर कहा था कि ‘हरे कृष्णा समूह’ द्वारा इतनी इज्जत पाकर स्थानीय मुस्लिम हैरान हैं और इस चीज ने उनके दिलों में घर कर लिया है।

उस समय की रिपोर्टों के अनुसार सैफुल ने कहा था, “हमने कभी ऐसे इफ्तार के बारे में नहीं सुना था जिसे गैर मुस्लिमों द्वारा आयोजित किया गया हो। आस पड़ोस के मुस्लिमों की प्रतिक्रिया बहुत भावपूर्ण थी कि 160 मुस्लिम मंदिर में आए जबकि मंदिर को लग रहा था कि बस 75 लोग ही वहाँ आएँगे।”

मुस्लिम व्यापारी रेजुल शेख ने भी कहा था कि ये बर्ताव उल्लेखनीय है क्योंकि पूर्वी भारत के धार्मिक रूप से संवेदनशील क्षेत्र में ऐसा कभी नहीं हुआ था। कई बार कुछ गैर मुस्लिम इफ्तारी को अपने मुस्लिम दोस्तों, पड़ोसियों और मस्जिदों में भेजते थे लेकिन ऐसा आयोजन कभी नहीं किया जाता था जैसे इस्कॉन ने किया।

शेख ने यह जानकारी भी दी थी कि इस्कॉन मंदिर के बीच परिसर में यह आयोजन हुआ था। वहीं इस्कॉन के तत्कालीन जनसंपर्क अधिकारी ने कहा था कि उनके द्वारा यह आयोजन इस्कॉन की 50वीं सालगिरह पर आयोजित हुआ। दास ने इस दौरान अपने मंदिर को अन्य हिंदू मंदिरों से अलग दिखाते हुए कहा था कि जहाँ कई हिंदू मंदिरों में मुस्लिमों का प्रवेश वर्जित होता है वहीं इस्कॉन में उन्हें फ्री एक्सेस है।

दास ने बताया था कि कई मुस्लिम मंदिर की दैनिक गतिविधियों में पार्ट लेते हैं और जरूरी सामान पहुँचाते हैं। उनमें कई को निर्माण के लिए काम दिया जाता है और बाकियों को वो काम दिए जाते हैं जिसमें वो निपुण होते हैं। साल 2016 की इस रिपोर्ट में अधिकारी ने कहा था, “हम अपनी 50वीं सालगिरह पर मुस्लिमों के लिए अच्छा व्यवहार चाहते हैं। इसके लिए इफ्तार आयोजन से बेहतर कुछ नहीं होता।” यूसीए न्यूज के मुताबिक कई लोगों ने इस आयोजन की सराहना की थी। सरयूकुंड रामजानकी मंदिर के पुरोहित ने भी इस कदम की तारीफ की थी और आशा जताई थी कि इससे साम्प्रदायिक सौहार्द बढ़ेगा।

हालाँकि, आज 5 साल बाद स्थिति अपेक्षाओं के बिलकुल विपरीत है बंगाल के इस्कॉन में जहाँ इफ्तार करके हिंदू-मुस्लिम भाईचारे का उदाहरण पेश किया गया था। आज उसी इस्कॉन के एक मंदिर में कट्टरपंथियों ने लूटपाट मचाकर वहाँ के साधुओं को मौत के घाट उतार दिया। हालात ये है कि इस्कॉन के उपाध्यक्षभारत सरकार से अपील कर रहे हैं कि वो इस मामले में आवाज उठाएँ। इस्कॉन कोलकाता के उपाध्यक्ष राधारमण भी इस घटना को 1946 के नोआखली दंगों से जोड़ रहे हैं।

हालाँकि, आज 5 साल बाद स्थिति अपेक्षाओं के बिलकुल विपरीत है। पश्चिम बंगाल के इस्कॉन में इफ्तार करके हिंदू-मुस्लिम भाईचारे का उदाहरण पेश किया गया था। लेकिन बांग्लादेश के इस्कॉन मंदिर में कट्टरपंथियों ने लूटपाट मचाकर वहाँ के साधुओं को मौत के घाट उतार दिया। हालात ये है कि इस्कॉन के उपाध्यक्ष भारत सरकार से अपील कर रहे हैं कि वो इस मामले में आवाज उठाएँ। इस्कॉन कोलकाता के उपाध्यक्ष राधारमण भी इस घटना को 1946 के नोआखली दंगों से जोड़ रहे हैं।

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