Sunday, April 18, 2021
Home Blog

अनुसूचित जाति के ‘मल्लाह’ को ठग बता फँसे आमिर खान, कोर्ट ने थमाया ‘ठग्स ऑफ हिंदोस्तान’ पर नोटिस

बॉलीवुड अभिनेता आमिर खान अपनी फिल्म ‘ठग्स ऑफ हिंदोस्तान’ में समुदाय विशेष की भावनाओं को ठेस पहुँचाने के मामले में फँस गए हैं। इस केस में शिकायतकर्ता हंसराज चौधरी की पुनरीक्षण याचिका को स्वीकार करते हुए उत्तर प्रदेश के जौनपुर जिला जज मदनपाल सिंह ने अभिनेता आमिर खान समेत चार अन्य को कोर्ट ने नोटिस जारी किया है।

कोर्ट ने सभी आरोपितों को 24 मई को कोर्ट में अपना पक्ष रखने का आदेश दिया है। साल 2018 में दीवाली के मौके पर रिलीज हुई ठग्स ऑफ हिंदोस्तान में आमिर खान के अलावा अमिताभ बच्चन, कैटरीना कैफ और फातिमा सना शेख ने मुख्य भूमिका निभाई थी। हालाँकि, यह फिल्म पर्दे पर मुँह के बल गिरी थी। लेकिन, इसकी वजह से आमिर खान मुश्किल में फँस गए हैं।

जौनपुर के हरईपुर लाइन बाजार निवासी हंसराज चौधरी ने फिल्म के निर्माता आदित्य चोपड़ा, निर्देशक विजय कृष्णा और आमिर खान के खिलाफ परिवाद दायर किया है। याचिकाकर्ता ने दावा किया है कि फिल्म में ‘मल्लाह’ जाति को ‘फिरंगी मल्लाह’ के नाम से संबोधित किया गया था। इससे उनकी भावनाओं को ठेस पहुँची है। परिवादी ने दावा किया है कि फिल्म की टीआरपी बढ़ाने, मुनाफा कमाने के लिए दुर्भावना पूर्ण तरीके से फिल्म का ऐसा नाम रखा गया था। गौरतलब है कि मल्लाह समुदाय अनुसूचित जाति की कैटेगरी में आते हैं।

इसमें निषाद समाज को ‘फिरंगी’ और ‘ठग’ सिद्ध किया गया है। हालाँकि, मजिस्ट्रेट कोर्ट ने परिवाद को खारिज कर दिया था। कोर्ट ने कहा था कि फिल्म सिर्फ मनोरंजन के लिए बनाई जाती हैं। इसकी घटनाएँ और पात्र काल्पनिक होते हैं। बाद में जिला जज कोर्ट में बहस के बाद कोर्ट ने कहा कि परिवाद को अस्वीकृत करने के लिए कोई खास कारण या सबूतों का अभाव होना चाहिए, क्योंकि तलबी के स्तर पर सबूतों के मेटिकुलस परीक्षण नहीं हो सकता है।

खास बात यह है कि जिला कोर्ट ने इस मामले में राज्य सरकार को भी एक पक्ष बनाया है। इसलिए कोर्ट ने राज्य सरकार को भी नोटिस जारी किया है। वहीं कोर्ट की नोटिस को लेकर अभी तक आमिर खान या किसी अन्य की ओर से कोई प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

हिंदू धर्म-अध्यात्म की खोज में स्विट्जरलैंड से भारत पैदल: 18 देश, 6000 km… नंगे पाँव, जहाँ थके वहीं सोए

भारत का सनातन धर्म सदैव से ही दूसरे देशों में रहने वाले खोजी प्रवृत्ति के लोगों को आकर्षित करता आया है। भारत के योग, ध्यान और अध्यात्म से प्रेरित होकर न जाने कितने ही विदेशी भारत आते हैं। उनमें से एक हैं बेन बाबा, जो स्विट्जरलैंड के रहने वाले हैं और पेशे से वेब डेवलपर हैं।

हरिद्वार के महाकुंभ से बेन बाबा का वीडियो वायरल हो रहा है। बेन स्विट्जरलैंड से पैदल ही भारत के लिए निकल पड़े और 18 देशों को पार करके 4 साल बाद भारत पहुँचे हैं। फिलहाल बेन हिमाचल प्रदेश में रहते हैं। ट्विटर पर भी उनका एक वीडियो शेयर किया जा रहा है, जिसमें वह अपनी यात्रा के बारे में बताते हैं।

वेब डिजाइनर से बेन बाबा तक का सफर

33 वर्षीय बेन स्विट्जरलैंड में वेब डिजाइनर थे और वहाँ अच्छी खासी कमाई भी करते थे लेकिन उन्होंने बताया कि उन्हें वहाँ कभी सुख की प्राप्ति नहीं हुई। भौतिक सुख तो उनके पास बहुत था किन्तु बेन आध्यात्मिक और आत्मिक सुख प्राप्त करना चाहते थे। जिस सुख की तलाश बेन कर रहे थे उन्हें वह भारतीय संस्कृति, सभ्यता, योग और अध्यात्म के माध्यम से प्राप्त हुआ।

इसी सुख को प्राप्त करने के लिए बेन स्विट्जरलैंड की आराम भरी जिंदगी छोड़ कर भारत की ओर निकाल पड़े। 4 साल के लंबे सफर और 18 देशों की सीमाओं को नापकर बेन भारत पहुँचे और यहाँ उन्होंने सनातन धर्म और योग का प्रचार-प्रसार प्रारंभ कर दिया और बन गए ‘बेन बाबा’।

6000 किमी का सफर और 18 देश

बेन बाबा ने बताया कि उन्होंने स्विट्जरलैंड से भारत तक पहुँचने के लिए 6 हजार किमी से अधिक का सफर पैदल ही तय किया। उनकी इस यात्रा में उन्होंने तुर्की, ईरान, आर्मेनिया, जॉर्जिया, रूस, किर्गिस्तान, उज्बेकिस्तान, चीन और पाकिस्तान समेत 18 देशों की सीमाओं को पार किया।

भारतीय संस्कृति, योग और ध्यान से है प्रेम

बेन बाबा ने बताया कि उन्होंने स्विट्जरलैंड में ही भारतीय संस्कृति, योग, ध्यान और अध्यात्म के विषय में पढ़ना प्रारंभ कर दिया था। इसमें उन्हें जिस सुख की अनुभूति हुई, उसके कारण उन्होंने स्विट्जरलैंड और वहाँ की विलासितापूर्ण जिंदगी को छोड़ दिया। बेन बाबा भारत में भ्रमण करके मंदिरों, मठों और धर्मस्थलों में भारतीय संस्कृति और सनातन धर्म का अध्ययन कर रहे हैं। बेन पतंजलि संस्थान से योग भी सीख रहे हैं। बेन न केवल फर्राटेदार हिन्दी बोलते हैं बल्कि उन्हें गंगा आरती करते हुए देखा जा सकता है।

पूरा सन्यासियों का जीवन जीते हैं बेन बाबा

बेन बाबा का कोई ठिकाना नहीं है। जहाँ भी थक जाते हैं, वहीं अपना डेरा जमा लेते हैं। जंगल, फुटपाथ और निर्जन स्थानों पर भी रात बिता चुके हैं। बाबा भिक्षा माँग कर अपना पेट भरते हैं। नंगे पैर ही सफर करते हैं। हरिद्वार में भी वो गंगा के किनारे टहलते हुए दिखाई दिए।

किताबों के उपयोग से हिन्दी सीखने वाले बेन बाबा भारत में धर्म और अध्यात्म में रमे हुए हैं लेकिन उनके जीवन का उद्देश्य है सनातन धर्म और योग का प्रचार करना। उनका कहना है कि भविष्य में वह अपने देश स्विट्जरलैंड लौट कर अपने लोगों को धर्म और अध्यात्म के मार्ग पर ले जाने का प्रयास करेंगे।  

जिसने उड़ाया साधु-संतों का मजाक, उस बॉलीवुड डायरेक्टर को पाकिस्तान का FREE टिकट: मिलने के बाद ट्विटर से ‘भागा’

फिल्म निर्माता-निर्देशक हंसल मेहता सोशल मीडिया पर अपने विवादित पोस्ट को लेकर अक्सर चर्चा में रहते हैं। हालाँकि, इस बार विवादों में घिरने के बाद उन्होंने अपना ट्वीटर अकाउंट प्राइवेट कर लिया है। दरअसल, कुंभ मेले में स्नान के लिए गए साधुओं का मजाक उड़ाने के बाद, मेहता ने रविवार को ट्विटर पर एक सवाल किया। इसमें पूछा गया था कि क्या नए कोरोनो वायरस के मामले में पाकिस्तान की स्थिति भारत की तुलना में खराब है? निश्चित रूप से वह यह बताने की कोशिश कर रहे थे कि भारत की तुलना में पाकिस्तान के हालात बेहतर हैं।

इसको लेकर एक नेटीजन (सोशल मीडिया पर खासा एक्टिव रहने वाले और मीम्स बनाने वाले यूजर्स) ने फटाफट उन्हें पाकिस्तान के लिए फर्स्ट क्लास की टिकट ऑफर कर दी। वह यह जानना चाहता था कि अगर मेहता सच में हमारे पड़ोसी देश की स्थिति को बेहतर मानते हैं, तो वह निश्चित ही देश से बाहर जाने के लिए सहमत होंगे।

हंसल मेहता के ट्वीट का स्क्रीनशॉट

यूजर ने मेहता से कहा कि अगर आप वहाँ हमेशा के लिए जाना चाहते हैं, तो वो तत्काल फ्लाइट का फर्स्ट क्लास का टिकट बुक करवा के दे देगा। इस पर मेहता तंज कसते हुए कहते हैं कि पहले टिकट भेजो, या उसके लिए उनके बैंक की डिटेल चाहिए होगी। इसके बाद यूजर ने शर्त रखी कि अगर आप पाकिस्तान से वापस लौटते हैं, तो आपको टिकट की रकम का 10 गुना देना होगा। इसको लेकर मेहता ने कहा कि पहले पैसे भेजो, बाद में शर्त रखना।

इतनी बात के बाद हर कोई यह जानकर हैरान हो गया कि यूजर ने वास्तव में हंसल मेहता के नाम पर 20 अप्रैल 2021 के लिए मुंबई से दुबई और दुबई से पाकिस्तान जाने के लिए टिकट बुक की हुई है।

अपने ट्विटर अकाउंट पर यूजर ने टिकट का स्क्रीनशॉट शेयर किया है। नेटिजेंस अभी भी फिल्म निर्माता के जवाब का इंतजार कर रहे हैं।

वामपंथी मीडिया की भाषा बोलते हुए प्रसिद्ध फिल्म निर्माता हंसल मेहता ने साल 2019 के कुंभ मेले की मण्डली की एक पुरानी फोटो साझा करते हुए नागा साधुओं का मजाक उड़ाया था।

मेहता ने साल 2019 कुंभ मेले की मण्डली की एक पुरानी फोटो साझा की थी।

हालाँकि, इसके बाद से हंसल मेहता ने अपने अकाउंट को प्राइवेट कर लिया है।

दुबई से होकर पाकिस्तान जाने वाली मेहता की फ्लाइट 20 अप्रैल, 2021 को निर्धारित है। मेहता के पाकिस्तान जाने या फिर कागजों में उनका नाम रजिस्टर होने पर हम आपसे सभी जानकारी साझा करेंगे।

फिर केंद्र की शरण में केजरीवाल, PM मोदी से माँगी मदद: 7000 बेड और ऑक्सीजन की लगाई गुहार

दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने राजधानी में कोरोना की चिंताजनक स्थिति पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को चिट्ठी लिखी है। केजरीवाल ने पीएम मोदी से केंद्र सरकार के अस्पतालों में 10,000 में से कम से कम 7,000 बेड कोरोना मरीजों के लिए रिजर्व करने और तुरंत ऑक्सीजन मुहैया कराने की अपील की है।

केजरीवाल ने लिखा, “दिल्ली में कोरोना की स्थिति बेहद गंभीर हो गई है। कोरोना बेड्स और ऑक्सीजन की भारी कमी है। लगभग सभी ICU बेड्स भर गए हैं। अपने स्तर पर हम सभी प्रयास कर रहे हैं। आपकी मदद की जरूरत है। दिल्ली में केंद्र सरकार के अस्पतालों में लगभग 10 हजार बेड हैं। इनमें से केवल 1800 बेड कोरोना के लिए रिजर्व किए गए हैं। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए आपसे विनती है कि कम से कम 7000 बेड कोरोना मरीजों के लिए रिजर्व किए जाएँ। दिल्ली में ऑक्सीजन की भारी कमी हो रही है। हमें ऑक्सीजन भी तुरंत मुहैया कराई जाए।”

केजरीवाल ने आगे लिखा, “DRDO दिल्ली में ICU के 500 बेड बना रहा है। इसके लिए आपका बेहद शुक्रिया। ये बढ़ाकर 1000 कर दिए जाएँगे तो बड़ी मेहरबानी होगी। इस महामारी में अभी तक हमें केंद्र सरकार से काफी सहयोग मिला है। मैं उम्मीद करता हूँ कि इन विषयों पर भी आप हमारी मदद जरूर करेंगे।”

केजरीवाल ने गृह मंत्री से की बात

इससे पहले मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने गृह मंत्री अमित शाह से फोन पर बात की और उन्हें कोरोना के बढ़ते मामलों को लेकर दिल्ली के हालातों पर जानकारी दी। उन्होंने कहा, “मैंने आज केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से फोन पर बात की है और इस गंभीर स्थिति में ऑक्सीजन, बेड और अन्य आवश्यक सुविधाओं की आपूर्ति के लिए अनुरोध किया है।” 

मुख्यमंत्री ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि दिल्ली सरकार के अस्पतालों में बहुत कम आईसीयू बेड उपलब्ध हैं। केजरीवाल ने कहा, “हमें तुरंत बेड और ऑक्सीजन की आपूर्ति की आवश्यकता है। दिल्ली सरकार अगले 3 दिनों में 6,000 बेड तैयार कर लेगी। कई स्कूलों, खेल परिसरों और अन्य सरकारी भवनों को कोविड केयर सेंटर में बदला जाएगा।”

पिछले 24 घंटे में संक्रमण दर 24 से बढ़कर 30 प्रतिशत हो गया है। कोरोना के लिए जो बेड रिजर्व है वह काफी तेजी से खत्म हो रहे हैं। आईसीयू बेड की दिल्ली में कमी हो गई है। 100 से भी कम आईसीयू बेड खाली हैं। ऑक्सीजन की भी दिल्ली में काफी कमी है। 

भारत के सबसे बड़े कोविड सेंटर को दोबारा खोला जाएगा

कोरोना वायरस के मामलों में अभूतपूर्व वृद्धि के मद्देनजर दक्षिण दिल्ली में स्थित देश के सबसे बड़े कोविड-19 सेंटर राधा स्वामी सत्संग ब्यास को दोबारा खोला जाएगा, जिसे फरवरी में बंद कर दिया गया था। गृहमंत्री अमित शाह की पहल पर छतरपुर स्थित राधा स्वामी सत्संग परिसर में दस हजार बेड क्षमता का कोविड केयर सेंटर बनकर तैयार हुआ था। 

छतरपुर में स्थित आध्यात्मिक संगठन के प्रबंधन ने इस बात की पुष्टि की है कि सेंटर को दोबारा खोला जाएगा। राधा स्वामी सत्संग ब्यास सेंटर के सचिव विकास सेठी ने कहा कि सरकार सेंटर को जल्द ही दोबारा खोलने की योजना बना रही है।

कुल 10,200 बिस्तरों वाले इस केन्द्र का उद्घाटन पिछले साल पाँच जुलाई को किया गया था। भारत-तिब्बत सीमा पुलिस इसका संचालन कर रही थी। 1,700 फीट लंबाई और 700 फीट चौड़ाई वाले इस केन्द्र का आकार मोटे तौर पर फुटबॉल के 20 मैदानों के बराबर है। इसमें 200 कक्ष हैं। प्रत्येक कक्ष में 50 बिस्तर हैं।

इससे पहले केजरीवाल ‘बेड की कोई कमी नहीं है’ का राग अलाप रहे थे, मगर अब केंद्र की शरण में पहुँच गए हैं। गौरतलब है कि पिछले साल भी दिल्ली में कोरोना वायरस की रोकथाम के लिए खुद गृहमंत्री अमित शाह ने मोर्चा सँभाला था। दिल्ली में कोरोना के बिगड़े हालात को संभालने के लिए अमित शाह ने 4 आईएएस अधिकारियों- अवनीश कुमार, मोनिका प्रियदर्शिनी, गौरव सिंह राजावत और विक्रम सिंह मलिक के COVID-19 के प्रबंधन में सहायता करने के लिए तुरंत दिल्ली में तबादले का निर्देश दिया था।

इसके साथ ही गृहमंत्री ने दिल्ली सरकार के दो वरिष्ठ IAS अधिकारियों एससीएल दास और एसएस यादव को केंद्र के साथ जुड़ने का निर्देश दिया। गृह मंत्री अमित शाह के निर्देश पर आईसीएमआर दिल्‍ली में कोविड 19 टेस्टिंग के लिए मोबाइल वैन उपलब्‍ध कराने में दिल्‍ली सरकार की मदद की थी।

‘पंडित मुक्त’ गाँव वाला वीडियो वायरल होने के बाद भाजपा नेता सुहैल पाशा ने दिया पार्टी से इस्तीफा

हिंदू और खासकर ‘पंडित’ विरोधी वीडियो वायरल होने के बाद उत्तराखंड के देहरादून से भाजपा के अल्पसंख्यक मोर्चा के पूर्व जिलाध्यक्ष सुहैल पाशा ने पार्टी से शुक्रवार को इस्तीफा दे दिया। वह जीवनगढ़ गाँव की प्रधान के पति हैं।

भाजपा के मुस्लिम नेता द्वारा हिंदुओं को धमकाने का यह वीडियो बुधवार (14 अप्रैल ) को पछवादून खबर ने जारी किया, जिसमें सुहैल पाशा जीवनगढ़ गाँव को पंडितों से मुक्त करने का दावा कर रहे हैं। उन्होंने दावा किया, “जीवनगढ़ कभी पंडितों का केंद्र कहा जाता था। लेकिन, आज यह पंडितों से मुक्त होने की कगार पर है।”

वीडियो में सुहैल पाशा ने धमकी दी कि अगर क्षेत्र में होली समारोह आयोजित किया जाता है, तो वह मुसलमानों को “पिट बाजार” के बीच में नमाज करने के लिए कहेंगे। पाशा ने चेतावनी दी है कि वह एक साइनबोर्ड लगाएँगे और मुसलमानों को बाजार में ईद की नमाज अदा करने के लिए कहेंगे।

पूर्व बीजेपी नेता ने कहा, “हमारे पास पहले से ही एक मस्जिद है। हमें बाजार में ऐसा (नमाज) करने की कोई आवश्यकता नहीं है, लेकिन हम अराजकता पैदा करने के लिए ऐसा करेंगे।”

वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद बजरंग दल, विश्व हिंदू परिषद, उत्तराखंड प्रगति मंच समेत कई संगठनों ने आगे आकर सुहेल पाशा के खिलाफ कार्रवाई की माँग की। संगठनों ने आरोप लगाया कि ब्राह्मण समुदाय के खिलाफ पाशा की टिप्पणियों ने उनकी धार्मिक भावनाओं को आहत किया है।

सुहैल पाशा का इस्तीपा पत्र

अराजकता फैलाने की धमकी वाले वीडियो के विरोध में देहरादून में हरबर्टपुर चौक पर प्रदर्शन किया गया। इस दौरान प्रदर्शनकारियों ने सुहैल पाशा के पुतले फूँके। आंदोलनकारियों ने चेतावनी दी कि एक जिला-स्तर के नेता द्वारा ऐसी टिप्पणियों को बर्दाश्त नहीं करेंगे। उन्होंने आरोपित नेता के खिलाफ कड़ी कार्रवाई नहीं होने पर विरोध प्रदर्शन तेज करने की चेतावनी भी दी है।

हिंदू विरोधी कमेंट के बाद सुहैल पाशा ने पार्टी से दिया इस्तीफा

हिंदू विरोधी वीडियो वायरल होने के बाद कड़ी आलोचना का सामना कर रहे भाजपा नेता ने शुक्रवार को पार्टी से इस्तीफा दे दिया। अपने इस्तीफे में सुहैल पाशा ने दावा किया कि उनका यह वीडियो एडिटेड है और इसे दुर्भावना के चलते वायरल किया गया है। ताकि यह दिखाया जा सके कि उन्होंने “समाज के एक विशेष वर्ग के खिलाफ अपमानजनक टिप्पणी की है।”

पाशा ने अपनी सफाई में कहा कि उन्होंने यह टिप्पणी एक परिवार के खिलाफ की थी, जिसने दाखपत्थर ग्राम पंचायत की जमीन पर कब्जा कर लिया था। पूर्व भाजपा नेता ने कहा कि उन्होंने उस परिवार को बाहर करने को कहा था, न कि ब्राह्मण समुदाय को।

सुहेल पाशा ने अपने त्याग पत्र में आगे दावा किया कि यह वीडियो उनके खिलाफ साजिश है। उन्होंने इस मामले की निष्पक्ष जाँच और “असली” दोषियों को सजा देने की माँग की। राज्य के बीजेपी प्रमुख से अपना इस्तीफा मंजूर करने की अपील करते हुए सुहैल पाशा ने जोर देकर कहा कि उन्होंने मुस्लिम बहुल क्षेत्र में पार्टी को मजबूत बनाया है।

SC के जज रोहिंटन नरीमन ने वेदों पर की अपमानजनक टिप्पणी: वर्ल्ड हिंदू फाउंडेशन की माफी की माँग, दी बहस की चुनौती

वर्ल्ड हिन्दू फाउंडेशन के संस्थापक स्वामी विज्ञानानंद ने उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीश रोहिंटन नरीमन द्वारा ऋग्वेद को लेकर की गई टिप्पणियों को तथ्यात्मक रूप से गलत एवं अपमानजनक बताते हुए कहा है कि उनकी टिप्पणियों से विश्व के 1.2 अरब हिंदुओं की भावनाएँ आहत हुईं हैं। उन्हें अपने विवादास्पद बयान वापस लेने चाहिए।

बता दें कि न्यायमूर्ति नरीमन ने 16 अप्रैल को 26वें न्यायमूर्ति सुनंदा भंडारे स्मृति व्याख्यान के दौरान ऋग्वेद का उद्धरण देते हुए सनातन परंपरा में महिलाओं की प्रतिष्ठा के संबंध में विवादास्पद टिप्पणी की थी। न्यायमूर्ति नरीमन ने अपने व्याख्यान में विश्व भर की महिलाओं के इतिहास के बारे में बोलते हुए कहा था, “ऋग्वेद का कहना है कि महिलाओं के साथ स्थायी दोस्ती न करें क्योंकि वह हाइना की तरह रहेंगी।” 

स्वामी विज्ञानानंद ने कहा कि ऋग्वेद सहित वेदों को सही ढंग से समझने के लिए ऋषि पाणिनि के व्याकरण, निरुक्त और प्रतिष्ठा का ज्ञान होना चाहिए। उन्होंने कहा कि वेद ऐसे ग्रंथ नहीं हैं जिनकी केवल शाब्दिक व्याख्या की जाए। वेदों को समझने के लिए वैदिक संस्कृत का ज्ञान अनिवार्य है और वैदिक संस्कृत आधुनिक संस्कृत से कई मायनों में भिन्न है। एक और बात समझनी बहुत आवश्यक है कि वेद तो केवल मंत्र संहिता हैं। वेदों के व्याख्या कम से कम 5 विषयों/ग्रंथों – पाणिनि व्याकरण, निघंटु, निर्कुट, प्रातिशाख्य एवं ब्राह्मण की पूर्ण जानकारी के बिना संभव नहीं है।

उन्होंने न्यायमूर्ति नरीमन को संबोधित करते हुए कहा, “मेरा यह मानना है कि वेदों और प्राचीन हिंदू ग्रंथों की व्याख्या करने की आप में अर्हता नहीं है। अतः आपको गौण स्रोतों से प्राप्त जानकारी के आधार पर प्राचीन हिंदू ग्रंथों पर कोई भी टिप्पणी करने से बचना चाहिए। आप देश की न्यायपालिका में जिम्मेदार पद पर आसीन हैं। आपको इस देश के महान धर्म और संस्कृति के विराट वैभव से संबंधित कोई भी बात जिम्मेदारी के साथ ही कहनी चाहिए। आपने अपनी ग़लत टिप्पणी के द्वारा विश्व के हिंदू धर्म के 1.2 अरब अनुयायियों की भावनाओं को गंभीर रूप से आहत किया है।”

स्वामी विज्ञानानंद ने न्यायमूर्ति नरीमन को इस विषय पर एक खुली सार्वजनिक बहस के लिए आमंत्रित करते हुए कहा, “मैं आपसे इतना अनुरोध करना चाहता हूँ कि आपने अपने व्याख्यान में ऋग्वेद से संबंधित जो भी गलत व्याख्या की है, उसके लिए आप हिंदू समाज से क्षमा माँगे और अपने शब्द वापस लें। यदि आपको वेदों की व्याख्या से संबंधित मेरी किसी भी बात पर संशय है तो मैं किसी भी मंच पर आपके साथ चर्चा करने की खुली चुनौती देता हूँ।”

उन्होंने कहा कि हमारे धर्म शास्त्रों और इतिहास के साथ औपनिवेशिक कुप्रथाओं के कारण भारत को काफी नुकसान उठाना पड़ा है। भारत में ज्यादा बौद्धिक कहे जाने वाले लोगों ने वेदों के अंग्रेजी अनुवाद को ही पढ़ा है। लेकिन उस अनुवाद और असली ग्रंथ में बहुत अंतर है। इसी वजह से ज्यादातर लोगों को उथला ज्ञान हैं। उन्होंने उम्मीद जताई कि न्यायमूर्ति नरीमन इस मुद्दे की गंभीरता को समझते हुए जल्द से जल्द ऋग्वेद के बारे में अपने भ्रामक शब्दों को वापस लेंगे।

बता दें कि स्वामी विज्ञानानंद संन्यास आश्रम में प्रवेश करने से पहले भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) के प्रतिभाशाली छात्र रहे हैं। बाद में उन्होंने संस्कृत भाषा पर पीएचडी की तथा पाणिनि व्याकरण, वेदांग, पूर्वी दर्शन, ब्राह्मण ग्रन्थ और वैदिक संहिता पर अध्ययन, शोध और अध्यापन किया।

माँ ने कहा था- ‘मेरी चिंता नहीं अपनी ड्यूटी करो’: अंतिम संस्‍कार के फौरन बाद ड्यूटी पर लौटे गुजरात के दो डॉक्‍टर

कोरोनावायरस संक्रमण के दौरान एक ओर जहाँ देश में लापरवाही और संवेदनहीनता की खबरें आती रहती हैं, वहीं दूसरी ओर गुजरात से एक ऐसी खबर आई जिसने कर्तव्यनिष्ठा और ईमानदारी की मिसाल कायम की। दरअसल, गुजरात में दो कोरोना डॉक्टर अपनी माँ का निधन होने के बाद उनका अंतिम संस्कार करके तुरंत ही अपनी ड्यूटी पर लौट आए और मरीजों की सेवा में जुट गए। इनमें से एक डॉक्टर की माँ की मृत्यु कोरोनावायरस के संक्रमण के चलते हुई जबकि दूसरे कोरोना डॉक्टर की माँ बुढ़ापे की परेशानियों के चलते स्वर्गवासी हुईं।

माँ के अंतिम संस्कार के बाद काम पर लौटीं डॉ. शिल्पा :

डॉ. शिल्पा पटेल गुजरात के वड़ोदरा में राज्य द्वारा संचालित SSG अस्पताल में एनाटॉमी विभाग में एसोसिएट प्रोफेसर के तौर पर पदस्थ थीं। उनकी 77 वर्षीय माँ कान्ता अंबालाल पटेल 7 अप्रैल को कोरोनावायरस से संक्रमित हो गईं जिसके बाद उन्हें मेहसाना से वड़ोदरा लाया गया जहाँ उन्हें SSG अस्पताल में भर्ती किया गया। 15 अप्रैल को कान्ता की मौत हो गई।

इसके बाद डॉ. शिल्पा पटेल ने अपने भाई के साथ मिलकर अपनी माँ के शव का कोविड प्रोटोकॉल के अनुसार अंतिम संस्कार किया और पीपीई किट पहनकर अपनी ड्यूटी पर वापस लौट आईं।

परिवार के साथ किया अपनी माँ का अंतिम संस्कार और काम पर लौट आए डॉ. राहुल परमार :

वड़ोदरा के SSG अस्पताल में ही प्रिवेन्टिव एण्ड सोशल मेडिसिन विभाग में पदस्थ डॉ. राहुल परमार की माँ की स्वाभाविक मृत्यु हुई। गुरुवार (15, अप्रैल) को गाँधीनगर डॉ. परमार की माँ कान्ता परमार (67 वर्ष) बुढ़ापे की समस्याओं के चलते स्वर्ग सिधार गईं। डॉ. परमार ने कहा कि उनकी माँ की मृत्यु एक स्वाभाविक मृत्यु ही थी और अपने परिवार के साथ उनका अंतिम संस्कार करके वह वापस अपने काम पर लौट आए। डॉ. परमार मध्य गुजरात के सबसे बड़े अस्पताल में कोविड मैनेजमेंट के नोडल अधिकारी तथा डेड बॉडी डिस्पोजल टीम का हिस्सा हैं।

माँ की ही सीख ने किया प्रेरित :

अपनी माँ की सीख को याद करते हुए डॉ. शिल्पा ने कहा कि उनकी माँ ने सदैव यही कहा कि वो बिना किसी चिंता के अपनी ड्यूटी पर ध्यान दें। यही बात उन्होंने मृत्यु से कुछ घंटे पहले भी कही। अपनी माँ की इसी सीख का सम्मान करते हुए डॉ. शिल्पा ने अपनी माँ का अंतिम संस्कार किया और काम पर लौट आईं।

राहुल गाँधी अब नहीं करेंगे चुनावी रैली: 4 राज्य में जम कर की जनसभा, बंगाल में हार देख कोरोना का बहाना?

सभी चुनावी राज्यों में रैलियों को संबोधित करने के बाद राहुल गाँधी ने सोशल मीडिया के माध्यम से यह घोषणा की कि अब वह पश्चिम बंगाल में किसी भी चुनाव रैली में शामिल नहीं होंगे। उन्होंने ट्विटर के माध्यम से इसकी जानकारी दी।  

राहुल गाँधी ने कोविड-19 की खराब होती परिस्थितियों का हवाला देते हुए कहा कि वह अब पश्चिम बंगाल में बचे तीन चरण के चुनाव में होने वाली अपनी सभी रैलियों को रद्द करते हैं। उन्होंने बाकी नेताओं से भी चुनावी रैलियों पर पुनर्विचार करने के लिए कहा है।

यहाँ ध्यान देने योग्य बात यह है कि अपनी बहन प्रियंका गाँधी वाड्रा के साथ राहुल ने कई राज्यों में कई चुनाव रैली की हैं जबकि कोरोनावायरस का संक्रमण तब भी बढ़ ही रहा था।

4 अप्रैल को 2021 को राहुल गाँधी ने केरल में एक चुनाव रैली को संबोधित किया था। केरल सर्वाधिक संक्रमित मरीजों की संख्या में भारत में दूसरे स्थान पर है। 4 अप्रैल को केरल में 11 लाख से अधिक कुल संक्रमित मरीज और 28,000 सक्रिय मरीज थे। उसके बाद केरल में 18 अप्रैल को सक्रिय मरीजों की संख्या बढ़कर 80,000 हो गई।

तमिलनाडु में भी 28 मार्च 2021 को राहुल गाँधी की एक बड़ी जनसभा हुई। उस समय तमिलनाडु में कुल सक्रिय मरीजों की संख्या 13,070 थी। आज तमिलनाडु में सक्रिय मरीजों की संख्या लगभग 65,000 है।

इस वीडियो में प्रियंका गाँधी वाड्रा को असम से बिदाई देने के लिए कॉन्ग्रेस द्वारा जुटाई गई लोगों की भीड़ दिखाई दे रही है।

असम, तमिलनाडु, केरल और केंद्र शासित प्रदेश पुडुच्चेरी में चुनाव संपन्न हो चुके हैं।

पश्चिम बंगाल में कॉन्ग्रेस, लेफ्ट पार्टियों के साथ गठबंधन में है लेकिन उनके सरकार बनाने की संभावनाएँ न के बराबर हैं। आशंका तो यह भी व्यक्त की जा रही है कि कॉन्ग्रेस और उसके गठबंधन को 2016 के चुनावों से भी कम सीटें प्राप्त होंगी।  

बांग्लादेश से लाई गई किशोरी से करवा रहे थे देह व्यापार: मिजानूर, अजमिरा खातून और मुर्तजा शेख गिरफ्तार

एटीएस से मिली सूचना के आधार पर एसओजी पुलिस ने बांग्लादेश से गुजरात के सूरत लाई गई किशोरी को रेलवे स्टेशन इलाके में मुक्त करवा कर मानव तस्कर गिरोह से जुड़े एक महिला समेत तीन बांग्लादेशी नागरिकों को गिरफ्तार किया है। ये लोग किशोरी के परिवार को रुपए का लालच देकर दलालों के मार्फत अवैध रूप से भारत लाए थे और यहाँ उससे देह व्यापार करवाया जा रहा था।

पुलिस ने बताया कि गिरोह का मुख्य सूत्रधार बांग्लादेश के नडाइल जिले के माधव पासा गाँव का मूल निवासी मिजानूर शेख उर्फ शरीफुल, उसकी बीबी अजमिरा खातून व नडाइल जिले के ही पस्तोहनिया गाँव का निवासी मुर्तजा शेख मिल कर मानव तस्करी का गिरोह चलाते हैं।

वे बांग्लादेश के नाइडल जिले के अति गरीब परिवारों की मजबूरी का फायदा उठा कर उन्हें अपने जाल में फँसाते हैं और गरीब परिवार की मासूम लड़कियों को भारत में काम दिलवाने और उनके परिजनों को रुपए का लालच देकर वे किशोरियों व युवतियों को भारत लाते हैं। फिर यहाँ उनसे देह व्यापार करवा कर उनका शोषण करते हैं। वे अब तक बांग्लादेश से न जाने कितनी किशोरियों और युवतियों को मानव तस्करी के जरिए भारत में लाकर देह व्यापार के दलदल में धकेल चुके हैं। उनके और कितने साथी व गिरोह सक्रिय है! इस बारे में पूछताछ की जा रही है।

दलाल ने मात्र 4,000 में सीमा पार करवाई 

पुलिस के मुताबिक, पीड़ित किशोरी भी बांग्लादेश के नडाइल जिले की रहने वाली है। उसके परिवार को रुपए का लालच देकर यहाँ लाया गया। मिजानुर और अजमिरा ने उसे बांग्लादेश से सूरत लाने का काम मुर्तजा को सौंपा था और उसे पन्द्रह हजार रुपए दिए थे। मुर्तजा ने बांग्लादेशी दलाल जिलाल को सीमा पार करवा कर भारत में घुसपैठ करने के लिए चार हजार रुपए दिए थे। भारत में घुसने के बाद वह कोलकाता होते हुए पीड़ित किशोरी को सूरत ले आया था और उसे मिजानुर और उसकी बीबी के हवाले कर दिया था।

रेलवे स्टेशन इलाके में करवाते थे देह व्यापार 

मिजानुर और अजमिरा किशोरी को अपने साथ रखते थे और उससे देह व्यापार करवाते थे। वे रेलवे स्टेशन और अन्य स्थानों पर ग्राहकों की तलाश में जाते और उसकी देह का सौदा कर रुपए वसूलते थे। जिसमें से बहुत कम उसके परिजनों को देते थे। उनके बारे में एटीएस से एसओजी को सूचना मिलने पर एसओजी ने पड़ताल शुरू की। शुक्रवार को मुखबिरों से उनके रेलवे स्टेशन इलाके में स्थित सिटी बस स्टैंड पर होने की पुख्ता सूचना मिलने पर एसओजी ने कार्रवाई की। एसओजी ने किशोरी को मुक्त करवाकर चिल्ड्रन हेल्प लाइन को सौंप दिया और उनके खिलाफ महिधरपुरा थाने में मामला दर्ज किया। बांग्लादेशी दलाल जिलाल को वांछित घोषित किया है।

सभी तरह के फर्जी पहचान पत्र मिले 

मिजानूर और उसकी बीबी अजमिरा दोनों शहर के निकट खोलवड़ गाँव में कामरेज रोड पर स्थित पंचवटी कॉम्प्लेक्स में रहते हैं। उन्होंने भारत के मतदाता पहचान पत्र, पैन कार्ड, आधार कार्ड, ड्राइविंग लाइसेंस समेत सभी तरह के फर्जी पहचान पत्र बना रखे हैं। लंबे समय से वे अवैध रूप से भारत में रह रहे हैं। भरूच में मदीना मस्जिद के पास रहने वाले मुर्तजा ने भी अपने सभी तरह के फर्जी पहचान पत्र बना रखे हैं। वह भी लंबे समय से अवैध रूप से भारत में रह रहा है। पुलिस को इनके पास कार्ड बरामद हुए है। शातिर मुर्तजा पहले भी 2013 में फर्जी दस्तावेज बना कर अवैध रूप से भारत में रहने के आरोप में ओलपाड़ थाने में पकड़ा गया था। लेकिन बाद में फिर लौट आया था।

छत्तीसगढ़ में कोविड अस्पताल में आग, 5 की मौत: मरीजों-परिजनों को खुद ही बचानी पड़ी जान

शनिवार (17 अप्रैल 2021) को छतीसगढ़ की राजधानी रायपुर के एक निजी अस्पताल में आग लगने से कोरोना वायरस से संक्रमित 5 मरीजों की मौत हो गई। एक मरीज की मौत आग से जलने जबकि 4 अन्य मरीजों की मौत दम घुटने से हुई। बताया जा रहा है कि अस्पताल में आग लगने की स्थिति से निपटने के लिए कोई सेफ्टी मैनेजमेंट नहीं था।

रायपुर के पचपेड़ी नाका स्थित राजधानी अस्पताल को कोविड अस्पताल में परिवर्तित किया गया था। दो फ्लोर के इस अस्पताल में हादसे के दौरान 50 मरीज भर्ती थे। शनिवार को आईसीयू वार्ड के पंखे में हुए शॉर्ट सर्किट के कारण कोविड वार्ड में आग लग गई। आग के कारण सभी कमरों में धुआँ भर गया।

इस घटना में आग से झुलसने के कारण एक मरीज की मौत हो गई जबकि ऑक्सीजन सप्लाई सिस्टम फेल होने के कारण दम घुटने से चार अन्य मरीजों की मृत्यु हुई है। मरने वालों में रमेश साहू, एल. ईश्वर राव, वंदना गजमाला, देवकी सोनकर और भाग्यश्री शामिल हैं।

छत्तीसगढ़ में रायपुर का राजधानी अस्पताल (फोटो : दैनिक भास्कर)

चीफ मेडिकल अधिकारी डॉ. मीरा बघेल ने दैनिक भास्कर को सूचना दी कि घटना के बाद 29 मरीजों को अलग-अलग सरकारी और निजी अस्पतालों में ले जाया गया है जबकि 10 मरीजों को यशोदा अस्पताल में भर्ती किया गया है।

अस्पताल प्रबंधन की लापरवाही

राजधानी अस्पताल की इस घटना में अस्पताल प्रबंधन की लापरवाही सामने आ रही है। शुरुआत में आग लगने के दौरान ही अस्पताल प्रबंधन ने कोई गंभीरता नहीं दिखाई, जिससे आग बढ़ती गई। मरीजों के साथ आए हुए परिजनों ने काँच तोड़कर धुआँ निकलने की जगह बनाई। प्रशासन के विलंब से पहुँचने के कारण मरीजों के परिजनों को स्वयं ही मरीजों की व्यवस्था करनी पड़ी।

अस्पताल में आग लगने के बाद की स्थिति को नियंत्रित करने के लिए कोई सेफ्टी मैनेजमेंट सिस्टम नहीं था। दैनिक भास्कर की रिपोर्ट के अनुसार स्वास्थ्य विभाग ने किसी भी कोविड अस्पताल से सुरक्षा संबंधी कोई जानकारी नहीं ली थी। इस घटना के बाद स्वास्थ्य विभाग सक्रिय हुआ।  

परिजनों को स्वयं करनी पड़ी मरीजों की व्यवस्था (फोटो : दैनिक भास्कर)

आपको बता दें कि छत्तीसगढ़ में कोरोना वायरस का संक्रमण लगातार बढ़ता जा रहा है। पिछले 24 घंटों के दौरान राज्य में 16,000 से अधिक संक्रमित मरीज मिले और 158 संक्रमितों की मौत हुई। इसके साथ ही छत्तीसगढ़ में सक्रिय मरीजों की संख्या बढ़कर 1,30,400 हो गई है।

हमसे जुड़ें

292,985FansLike
82,232FollowersFollow
394,000SubscribersSubscribe