भारत की बात

गिरनार की गोद में शिवत्व का साक्षात्कार: भावनाथ मेले में भीड़ के बीच आत्मिक शांति की अनोखी यात्रा, जानिए मेरा अनुभव

गुजरात के जूनागढ़ के गिरनार पर्वत की तलहटी में महाशिवरात्रि के शुभ अवसर पर भावनाथ महादेव मंदिर में प्रतिवर्ष एक अनूठा मेला लगता है।

वेदों के ज्ञान से लेकर पुराणों की कथाओं तक फैली एक परंपरा, जहाँ स्वयं भगवान शिव करते थे निवास: जानें जूनागढ़ के भावनाथ महादेव...

गुजरात के जूनागढ़ में स्थित भावनाथ महादेव मंदिर केवल एक धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि हजारों वर्षों से प्रवाहित सनातन चेतना का जीवंत केंद्र है।

गणतंत्र दिवस को बनाया शोक दिवस, हिंदी पर की घटिया राजनीति और 70+ छात्रों की मौत: जानें कैसे 61 साल पहले भाषाई घृणा फैलाकर...

डीएमके ने इसे उत्तर भारत बनाम दक्षिण भारत का रंग दे दिया, जबकि कॉन्ग्रेस ने अपने विरोध को हिंदी विरोध से जोड़कर सत्ता बचाने की कोशिश की।

सेना युद्ध में, RSS सेवा मोर्चे पर: 1947 से 71 तक युद्ध में राष्ट्रसेवा की कहानी जिसे वाम इतिहास ने किया अनदेखा, नेहरू ने...

जवाहरलाल नेहरू ने 1963 की गणतंत्र दिवस परेड के लिए RSS के स्वयंसेवकों को निमंत्रण दिया। 3000 स्वयंसेवक पूर्ण गणवेश में परेड में पहुँचे।

स्वामी विवेकानंद जयंती पर विशेष: शिकागो से सनातन की पताका लहराने वाले महान संत, पश्चिम को भारतीय संस्कृति से जोड़ा; युवाओं को दिखाई राष्ट्रप्रेम...

स्वामी विवेकानंद ने सनातन धर्म को विश्व मंच पर स्थापित किया, पश्चिम को भारतीयता से जोड़ा और भारत को आत्मविश्वास दिया।

ताशकंद में आधी रात में मौत, नहीं हुआ पोस्टमॉर्टम फिर भी शरीर पर ‘कट’ के निशान: जानें- शास्त्री के साथ उस रात क्या हुआ...

लाल बहादुर शास्त्री की मौत के बाद उन्हें जहर दिए जाने के आरोप लगे, उनके शरीर पर कट के निशान भी मिले लेकिन उनका पोस्टमॉर्टम नहीं किया गया था।

बार-बार इस्लामी आक्रमण, बार-बार प्रतिरोध और पुनर्निर्माण की गाथा: सनातन सभ्यता की पहचान सोमनाथ मंदिर को जीवित रखने के लिए हर युग में खड़े...

सोमनाथ आज भी अडिग खड़ा है, केवल एक मंदिर के रूप में नहीं, बल्कि भारतीय सभ्यता की कभी न हार मानने वाली जिजीविषा के प्रतीक के रूप में।

सिर्फ भगवान शिव का स्थान ही नहीं, अनंत काल से समंदर में सनातन की शक्ति का प्रतीक भी है सोमनाथ: जानें- व्यापारिक नेटवर्क से...

सोमनाथ मंदिर टूटने के बाद वहाँ मस्जिद नहीं बनी क्योंकि इसका उद्देश्य धर्म परिवर्तन नहीं बल्कि मंदिर की आर्थिक-कानूनी भूमिका समाप्त करना था।

भारत में होते लाहौर और सियालकोट, कॉन्ग्रेस की दब्बू नीतियों ने सब बिगाड़ा: जानिए- 60 साल पहले हुए ताशकंद समझौते को, जिसकी कीमत अब...

अगर ताशकंद समझौता न होता तो आज लाहौर शहर पाकिस्तान का नहीं, बल्कि भारत का हिस्सा होता। हमारा नक्शा कितना अलग और मजबूत दिखता।

लाखों की फौज के साथ सोमनाथ मंदिर तोड़ने पहुँचा जफर खान, 16 साल के योद्धा ने 11 दिन बहाया खून: पढ़ें- सिर कटने पर...

महाप्रतापी हमीर सिंहजी गोहिल ने सनातन परंपरा के मान्य द्वादशलिंगों में से प्रथम सोमनाथ मंदिर को बचाने के लिए अपने प्राणों की चिंता नहीं की।

ताज़ा ख़बरें

प्रचलित ख़बरें