अंग्रेजों की औपनिवेशिक, विभाजनकारी तथा जनजातीय नीतियों और ईसाई शिक्षा ने यह गढ़ा कि इस क्षेत्र की सभी जनजातियाँ मंगोल हैं, क्रूर, जंगली तथा हिंसक हैं। परन्तु उनमें प्रचलित अनेक रीतियाँ, लोक-मान्यताएँ, जीवन-मूल्य तथा परम्पराएँ शेष भारत की परम्पराओं से लेशमात्र भी अलग नहीं हैं। इसका उल्लेख वेदों से लेकर महाभारत और रामायण तक में...
बरसाना से रवाना होते ही दूर दराज से पहुँच रहे लोगों की भीड़ जुटना शुरू हो जाती है। कोई बरसाना में मौजूद मंदिरों के दर्शन कर रहा था तो कोई मंदिरों में खेले जाने वाली लड्डू मार होली का आनंद ले रहा था। यही क्रम देर रात तक चलता रहा।
पिछले साल भूवैज्ञानिकों द्वारा यहाँ बाढ़ तलछट परतों के ज्ञान के साथ निर्देशित साइट पर हुई खुदाई के दौरान उलूग खान का नाम चर्चा में आया। इसके अलावा इस खुदाई से ये भी पता चला कि आखिर उस समय मंदिर के परिसर से क्या-क्या गायब हुआ था।
बीते साल भारतीय वायुसेना ने बालाकोट में आतंकी ठिकानों को ध्वस्त कर दिया था। इस घटना से करीब 189 साल पहले भी बालाकोट में रणजीत सिंह की सेना ने जिहादियों का ऐसे ही सफाया किया था।
साल 1976। ब्रिटेन के प्रधानमंत्री क्लीमेंट एटली से एक इंटरव्यू में पूछा गया- भारत की आजादी में 1942 के भारत छोड़ो आंदोलन की क्या भूमिका थी? एटली ने मुस्कुराते हुए जवाब दिया- बहुत मामूली। एटली ने भारत छोड़ने की जो प्रमुख वजह बताई वह एक बिसरा दिया गया विद्रोह है।
हम्पी में उसी जगह पर हनुमान जी की विश्व की सबसे विशालकाय प्रतिमा का निर्माण करने का फैसला लिया गया है, जहाँ पहली बार भगवान राम की उनसे मुलाकात हुई थी। इसकी ऊँचाई 215 फीट होगी। मतलब अयोध्या के श्रीराम से 10 फीट कम!
शिवाजी महाराज की तलवार पर 10 हीरे जड़े हुए थे, जो इस वक्त लंदन में हैं। उनकी तलवार प्रिंस ऑफ वेल्स एडवर्ड सप्तम को नवंबर 1875 में उनकी भारत यात्रा के दौरान कोल्हापुर के महाराज ने उपहार स्वरूप भेंट की थी। लेकिन कभी भी इस तलवार को वापस लाने के कोशिश नहीं की गई।
इस युद्ध के 350 साल पूरे होने पर हमें ध्यान रखने की आवश्यकता है कि तानाजी द्वारा लड़ा गया ये युद्ध आम युद्ध नहीं था। क्योंकि ये किला लगभग 4,304 फुट की ऊँचाई पर स्थित है। जिस तक पहुँचने के लिए तानाजी ने यशवंती नामक गोह प्रजाति की छिपकली का प्रयोग किया था।
19 जनवरी 1990 की भयावह घटनाएँ बस शुरुआत थी। अंतिम प्रहार 26 जनवरी को होना था, जो उस साल जुमे के दिन थी। 10 लाख लोग जुटते। आजादी के नारे लगते। गोलियॉं चलती। तिरंगा जलता और इस्लामिक झंडा लहराता। लेकिन...