Homeरिपोर्टअंतरराष्ट्रीयकरतारपुर कॉरिडोर समझौता: लंगर और प्रसाद मिलेगा पाकिस्तान में, लेकिन देने होंगे 20 डॉलर

करतारपुर कॉरिडोर समझौता: लंगर और प्रसाद मिलेगा पाकिस्तान में, लेकिन देने होंगे 20 डॉलर

भारत के विरोध के बावजूद भी वह यात्रियों से 20 डॉलर फीस लेने पर अड़ा है। जिसे भारत ने दुर्भाग्यपूर्ण बताया है। भारत ने कहा है कि ये दुर्भाग्यपूर्ण है कि भारत के विरोध के बावजूद पाकिस्तान ने तीर्थ यात्रियों से चार्ज वसूलने के फैसले को नहीं बदला।

भारत और पाकिस्तान के बीच आज (अक्टूबर 24, 2019) करतारपुर कॉरिडोर को लेकर फैसला हो गया। दोनों देशों के वरिष्ठ अधिकारियों ने आज यानी गुरुवार को इस मामले के मद्देनजर सहमति पत्र पर अपने-अपने हस्ताक्षर किए। भारत की ओर से इस मौक़े पर गृह मंत्रालय के अधिकारी एससीएल दास उपस्थित रहे, जबकि पाकिस्तान की ओर से विदेश मंत्रालय के अधिकारी मोहम्मद फैसल।

दोनों देशों के बीच पहले ये समझौता 23 अक्टूबर को साइन किया जाना था, लेकिन आखिरी मौक़े पर इसकी तिथि एक दिन आगे बढ़ा दी गई। लंबे इंतजार के बाद दोनों देशों के बीच ये समझौता हुआ।

गृह मंत्रालय के संयुक्त सचिव एससीएल दास ने इसपर हस्तात्क्षर करने के बाद जानकारी दी कि आज से पोर्टल पर करतारपुर कॉरिडोर जाने के लिए रजिस्ट्रेशन किया जा सकता है। उन्होंने बताया कि कॉरिडोर सुबह से शाम तक खुला रहेगा, लेकिन सुबह यात्रा करने वाले तीर्थयात्रियों को उसी दिन लौटना होगा।

इस दौरान गृह मंत्रालय के संयुक्त सचिव ने बताया कि पाकिस्तान इस समझौते में गुरुद्वारे के परिसर में लंगर और प्रसाद वितरण के लिए महत्तवपूर्ण प्रावधान बनाने को राजी हो गया है।

लेकिन, बता दें भारत के विरोध के बावजूद भी वह यात्रियों से 20 डॉलर फीस लेने पर अड़ा है। जिसे भारत ने दुर्भाग्यपूर्ण बताया है। भारत ने कहा है कि ये दुर्भाग्यपूर्ण है कि भारत के विरोध के बावजूद पाकिस्तान ने तीर्थ यात्रियों से चार्ज वसूलने के फैसले को नहीं बदला। उल्लेखनीय है कि इससे पहले भारत ने पाकिस्तान को यात्रियों से 20 डॉलर चार्ज वसूलने वाले फैसले पर पुनर्विचार करने को कहा था, लेकिन पाकिस्तान इसपर राजी नहीं हुआ।

गौरतलब है कि इस समझौते के बाद पाकिस्तान ने करतारपुर का गलियारा तीर्थयात्रियों के लिए 9 नवंबर से खोलने का ऐलान किया है। इसका उद्घाटन प्रधानमंत्री इमरान खान द्वारा किया जाएगा। ये कॉरिडोर करतारपुर के दरबार साहिब को पंजाब के गुरदासपुर जिला के डेरा बाबा नानक धर्मस्थल से जोड़ेगा। जिससे भारतीय तीर्थयात्री वहाँ केवल वैध पासपोर्ट की मदद से बिना वीजा जा पाएँगे।

Join OpIndia's official WhatsApp channel

  सहयोग करें  

'द वायर' जैसे राष्ट्रवादी विचारधारा के विरोधी वेबसाइट्स को कभी पैसों की कमी नहीं होती। देश-विदेश से क्रांति के नाम पर ख़ूब फ़ंडिग मिलती है इन्हें। इनसे लड़ने के लिए हमारे हाथ मज़बूत करें। जितना बन सके, सहयोग करें

ऑपइंडिया स्टाफ़
ऑपइंडिया स्टाफ़http://www.opindia.in
कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

संबंधित ख़बरें

ख़ास ख़बरें

आर्कबिशप पीटर मचाडो कौन हैं, जो चाहता है धर्मांतरण विरोधी कानून और गोहत्या कानून में बदलाव: कर्नाटक में कांग्रेस अध्यक्ष खड़गे से क्या...

आर्कबिशप की कॉन्ग्रेस अध्यक्ष खड़गे से मुलाकात के सियासी मायने निकाले जा रहे हैं। बैंगलुरु में हुई इस मुलाकात के बाद आर्कबिशप ने खुद अपनी माँगों को सार्वजनिक किया।

अग्निवीरों के रोजगार पर कांग्रेस शासित राज्यों की चुप्पी क्यों? बीजेपी सरकारों ने बनाई नीति, विपक्षी राज्यों में अब भी इंतजार

अग्रिवीरों का पहला बैच 31 दिसंबर 2026 को अपना कार्यकाल पूरा करेगा जिसमें से 75 फीसदी सेना छोड़ देंगे। इनके जॉब को लेकर कॉन्ग्रेस सरकारें कोई प्लान नहीं बना पाई है।
- विज्ञापन -