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‘तुम गणपति की मूर्तियाँ क्यों बनाते हो’: हिंदू कारीगर के परिवार पर अमीन, रफीक और यूसुफ ने किया हमला, गुजरात के राजकोट की घटना

"हमें हजारों रुपए का नुकसान हुआ है। लेकिन हिंदू होने के नाते हमारे भगवान की मूर्ति तोड़े जाने से हमारी भावनाएँ भी आहत हुई हैं। हम कई दिनों से कड़ी मेहनत कर रहे थे और अब गणेश चतुर्थी आने से बीस दिन पहले यह हो गया।”

गुजरात के राजकोट में शनिवार (अगस्त 26, 2023) को भगवान गणेश की मूर्ति बनाते समय एक हिंदू परिवार पर मुस्लिम लोगों ने हमला कर दिया। इस मामले में राजकोट तालुका पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज की गई है। तीन आरोपितों अमीन, रफीक और समीर को गिरफ्तार किया है। आरोप है कि राजस्थान के किशन राठौड़ और उनके परिवार पर इन तीन ने हमला किया और गणपति की मूर्तियों को भी तोड़ डाला।

इस संबंध में दर्ज एफआईआर की कॉपी ऑपइंडिया के पास मौजूद है। पीड़ित किशन राठौड़ ने शिकायत में कहा है कि राजकोट के धोलरा रोड इज शक्तिनगर गुरुकृपा फैक्ट्री के बगल में एक घर किराए पर ले रखा है। यहीं वे मूर्तियाँ बनाते हैं जो उनके जीविका का साधन है। जिस जगह वे काम करते हैं, उसके मालिक का नाम इरफान सिद्दीकी है।

किशन राठौड़ ने बताया है कि वे 26 अगस्त की रात करीब 10 बजे मूर्तियों पर पेंटिंग का काम कर रहे थे, तभी राजकोट के रसूलपुरा इलाके का रहने वाला अमीन हबीब समा नाम का व्यक्ति अपने दो साथियों के साथ आया और तोड़फोड़ शुरू कर दी। उसने उनसे इस जगह पर रहने और मूर्तियाँ बनाने का कारण पूछा। भद्दी-भद्दी गालियाँ दी और मूर्तियों को खंडित करना शुरू कर दिया। किशन ने बताया है कि उन्होंने और उनके परिवार ने तीनों को रोकने की कोशिश की, तो उन लोगों ने परिवार पर हमला बोल दिया।

पीड़ित राठौड़ के अनुसार अमीन, रफीक और समीर ने उनके साले किशन को लोहे की पाइप से मारा। जब उन्होंने मकान मालिक इरफान सिद्दीकी की भाभी नसीम बेन को बुलाया, तो हमलावरों ने उन्हें भी मारा और उनकी गाड़ी को भी तोड़ दिया। इसके बाद राठौड़ ने पुलिस को घटना की सूचना दी। पुलिस के आते ही आरोपित फरार हो गए।

इस मामले में पुलिस ने किशन राठौड़ की शिकायत पर आईपीसी की धारा 447, 294 (बी), 323, 295, 427 और 114 और मोटर वाहन अधिनियम की धारा 135 के तहत मामला दर्ज कर लिया और तीनों आरोपितों को गिरफ्तार कर लिया है। पुलिस की गिरफ्त में आए तीनों लोगों की पहचान अमीन हबीब समा, रफीक इस्माइल मंसूरी और समीर यूसुफ शाहमदार के रूप में की गई है। इस हमले की खबर स्थानीय मीडिया में भी छपी है।

पीड़ित ने ऑपइंडिया से साझा की आपबीती

ऑप इंडिया से बातचीत मे पीड़ित किशन राठौड़ ने बताया कि उनकी हमलावरों से कोई दुश्मनी नहीं है। उन्हें पता तक नहीं है कि हमला क्यों किया। हालाँकि उन्होंने यह भी बताया कि हमलावरों के समूह ने पहले भी उनके घर पर पथराव किया था। गालियाँ और धमकी दी थी।

26 अगस्त की घटना के बारे में उन्होंने बताया, “रात करीब 9.30 बजे पास की सड़क पर लोगों का एक समूह जोर-जोर से चिल्लाकर गालियां दे रहा था। थोड़ी देर बाद उन्होंने मेरे स्टॉल के पास एक खंभे पर पत्थर फेंके और हमें धमकी देते हुए कहा- बाहर निकलो, बाहर निकलो। हमारे स्टॉल पर ताला लगा हुआ था, लेकिन हम दरवाजे के पास ही थे। कुछ ही मिनटों में वे आकर हंगामा करने लगे।”

राठौड़ के अनुसार उनलोगों ने उनके एक कारीगर को पीटकर घायल कर दिया। मेरे बीच बचाव करने पर उसे छोड़ दिया। मैंने उन्हें रोकने की कोशिश की पर वे नहीं माने। वे कह रहे थे- तुम्हें जो करना है करो, हम सब तोड़ देंगे। राठौड़ ने बताया कि जब उन्होंने पुलिस को घटना की सूचना दी तो हमलावर भाग खड़े हुए।

यह पूछे जाने पर कि क्या हमलावरों के साथ पहले कोई झगड़ा हुआ था, राठौड़ ने बताया, “हमारी किसी से कोई दुश्मनी नहीं है और न ही मेरी उनसे कभी किसी तरह की बातचीत हुई है। हम गरीब आदमी हैं, भगवान की मूर्तियाँ बनाकर जीविका चलाते हैं। हमारा किसी से कोई झगड़ा नहीं है। मुझे नहीं पता कि उन्होंने हमारे साथ ऐसा क्यों किया। हो सकता है कि मकान मालिक के साथ उनका विवाद हो। लेकिल मैं यकीनी तौर पर इसके बारे में नहीं जानता।” उन्होंने यह भी बताया कि हमले के वक्त घर में बच्चे और महिलाएँ भी मौजूद थीं।

‘मैं हिंदू, मेरे भगवान की मूर्तियाँ तोड़ी’

राठौड़ ने कहा, “हमें हजारों रुपए का नुकसान हुआ है। लेकिन हिंदू होने के नाते हमारे भगवान की मूर्ति तोड़े जाने से हमारी भावनाएँ भी आहत हुई हैं। हम कई दिनों से कड़ी मेहनत कर रहे थे और अब गणेश चतुर्थी आने से बीस दिन पहले यह हो गया।” उन्होंने पुलिस से आरोपितों को सख्त सजा देने की माँग करते हुए कहा है कि ऐसी कार्रवाई की जाए ताकि ऐसी हरकत कोई दोबारा न कर सके।

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મેઘલસિંહ પરમાર
મેઘલસિંહ પરમાર
ઇતિહાસ-રાજકારણમાં રુચિ ધરાવતો, ઘટનાઓના ઊંડાણમાં જઈને બૃહદ પરિપેક્ષથી જોવામાં-લખવામાં વિશેષ રસ ધરાવતો પત્રકાર. ક્યારેક લેખક, ક્યારેક રિસર્ચર, ક્યારેક ફેક્ટચેકર.

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