डॉयलाग और टेरर साथ-साथ नहीं- सरकार का स्टैंड क्लियर, फिर भी पाकिस्तान परस्त 61 भारतीयों का मन बातचीत के लिए कुलबुलाया: जानिए- PM मोदी और शहबाज को पत्र में क्या लिखा

भारत सरकार का स्टैंड पाकिस्तान को लेकर बिल्कुल स्पष्ट है कि आतंकवाद और बातचीत साथ-साथ नहीं चल सकते। पाकिस्तान की जमीन से भारत के खिलाफ आतंकवाद को बढ़ावा मिलता रहा है और अब तो उसके नेता और कट्टरपंथी चेहरे भारत में मार-काट जैसी गीदड़भभकी देने लगे हैं। ऐसे माहौल में बातचीत की वकालत करना न सिर्फ हकीकत से आँख मूँदना है बल्कि उन सुरक्षाबलों और नागरिकों के बलिदान का भी अपमान है जिन्होंने पाकिस्तान प्रायोजित आतंकवाद की कीमत अपने खून से चुकाई है।

इसके बावजूद देश के भीतर कुछ लोग हर हाल में पाकिस्तान से बातचीत का राग अलापते दिखते हैं। वो इस बात के लिए बिलबिलाते रहते हैं कि दोनों देशों के बीच बातचीत हो। अब ऐसे ही भारत के 61 लोगों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ को पत्र लिखा है कि दोनों देश बातचीत करना शुरू कर दें। इन पाकिस्तान परस्तों में कुछ पुराने पाक प्रेमी हैं तो कुछ कट्टरपंथी चेहरे हैं। इन लोगों ने पाकिस्तान के कुछ लोगों के साथ मिलकर यह चिट्ठी लिखी है जिसमें कश्मीर पर बातचीत से लेकर कई मुद्दों पर बातचीत शुरू करने की बात की गई है।

इस चिट्ठी पर भारत के 61 और पाकिस्तान के 56 लोगों ने हस्ताक्षर किए हैं। हस्ताक्षर करने वालों में कॉन्ग्रेस नेता मणिशंकर अय्यर, फारूक अब्दुल्ला, महबूबा मुफ्ती, मीरवाइज उमर फारूक, RJD सांसद मनोज झा, रॉ के पूर्व प्रमुख ए एस दुलत, पाकिस्तान के पूर्व विदेश मंत्री खुर्शीद महमूद कसूरी, पूर्व राजनयिक अशरफ जहांगीर काजी और वैज्ञानिक परवेज हूदभॉय जैसे कई प्रमुख नाम शामिल हैं। यह पहल सेंटर फॉर पीस एंड प्रोग्रेस के अध्यक्ष ओ पी शाह की ओर से की गई है।

चिट्ठी में की गई हैं क्या-क्या माँगें?

इस चिट्ठी में कहा गया है कि भारत और पाकिस्तान दुनिया की करीब एक-पाँचवीं आबादी का प्रतिनिधित्व करते हैं और दोनों देशों की बड़ी युवा आबादी बेहतर भविष्य, रोजगार और विकास की हकदार है। इसमें दोनों देशों के बीच पूर्ण राजनयिक संबंध बहाल करने, नई दिल्ली और इस्लामाबाद में फिर से उच्चायुक्त नियुक्त करने और आम नागरिकों के लिए वीजा सेवाएँ शुरू करने की माँग की गई है।

इस अपील में भारत और पाकिस्तान के प्रधानमंत्रियों से ये माँगें की गई हैं:

साझा भविष्य की अपील: दोनों सरकारों से कहा गया है कि वे टकराव और अलगाव की जगह बातचीत, शांति और सहयोग को चुनें। दक्षिण एशिया का भविष्य संघर्ष से नहीं बल्कि शांति, समृद्धि और साझा प्रगति से बनना चाहिए।

तुरंत कूटनीतिक कदम उठाएँ: दोनों देशों के बीच पूरे राजनयिक संबंध फिर से बहाल किए जाएँ। नई दिल्ली और इस्लामाबाद में हाई कमिश्नरों की फिर से नियुक्ति हो। दोनों देशों के नागरिकों के लिए सामान्य वीजा सेवा फिर से शुरू की जाए।

बातचीत फिर से शुरू करना: सभी लंबित मुद्दों पर व्यापक द्विपक्षीय बातचीत दोबारा शुरू की जाए। जम्मू-कश्मीर पर भी चर्चा फिर से शुरू हो, जिसमें 2004 से 2007 के बीच बने बातचीत के ढाँचे पर फिर विचार किया जाए। क्षेत्र में तनाव घटाने और सेना की मौजूदगी कम करने की दिशा में कदम उठाए जाएँ। दोनों देशों की सुरक्षा चिंताओं को भी ध्यान में रखा जाए।

लोगों और परिवारों को फिर जोड़ना: यात्रा प्रतिबंधों को आसान किया जाए ताकि आम लोग एक-दूसरे से मिल सकें। बँटे हुए परिवारों, छात्रों, शिक्षकों, पत्रकारों, कलाकारों, व्यापारियों और सामाजिक संगठनों के बीच आदान-प्रदान शुरू हो। संस्कृति, शिक्षा, खेल और धार्मिक यात्राओं के जरिए भरोसा बढ़ाया जाए।

व्यापार और आर्थिक सहयोग बहाल करना: दोनों देशों के बीच व्यापारिक रास्ते फिर खोले जाएँ। सामान्य व्यापारिक संबंध बहाल हों। Most Favoured Nation या उसके बराबर गैर-भेदभाव वाले व्यापारिक इंतजाम फिर शुरू किए जाएँ। क्षेत्रीय आर्थिक सहयोग और साझा समृद्धि को बढ़ावा दिया जाए।

यातायात और कनेक्टिविटी लिंक दोबारा खोलना: अटारी-वाघा भूमि सीमा को व्यापार और यात्रा के लिए पूरी तरह खोला जाए। श्रीनगर-मुजफ्फराबाद बस सेवा, दिल्ली-लाहौर बस सेवा, समझौता एक्सप्रेस और थार एक्सप्रेस ट्रेन सेवा फिर शुरू की जाए। कारगिल-स्कार्दू रूट खोला जाए। कमर्शियल उड़ानों के लिए एयरस्पेस फिर खोला जाए ताकि यात्रा का समय और खर्च कम हो।

धार्मिक और सांस्कृतिक पहुँच बढ़ाना: करतारपुर साहिब कॉरिडोर फिर खोला जाए। कश्मीरी पंडितों के पवित्र स्थल शारदा पीठ, जो नीलम वैली में है, वहाँ जाने की सुविधा दी जाए। सीमा के दोनों तरफ धार्मिक और सांस्कृतिक विरासत स्थलों की यात्राएँ आसान की जाएँ। तीर्थयात्रा और सांस्कृतिक आदान-प्रदान को बढ़ावा दिया जाए।

मीडिया स्वतंत्रता और सूचना का आदान-प्रदान: मीडिया आउटलेट्स, न्यूज चैनलों और डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर लगी पाबंदियाँ हटाई जाएँ। दोनों देशों के पत्रकारों को यात्रा और काम करने की छूट दी जाए। मीडिया संस्थानों के बीच प्रोफेशनल आदान-प्रदान बढ़ाया जाए ताकि गलत सूचनाओं का मुकाबला हो और लोगों की समझ बेहतर हो।