उत्तर प्रदेश के शामली में हरियाणवी गायक और सोशल मीडिया पर मशहूर चेहरा अंकित बालियान की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। अब इस मामले ने राजनीतिक रंग पकड़ लिया है। समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव ने इस दुखद घटना पर बयान देते हुए इसे जाट समाज के गुस्से से जोड़ दिया, और भाजपा के साथ-साथ जाट नेताओं पर भी सवाल दागे। इसी बात पर केंद्रीय मंत्री और रालोद प्रमुख जयंत चौधरी भड़क गए और उन्होंने साफ-साफ कह दिया कि ऐसे मामलों में जाति खोजना संवेदनहीनता से कम कुछ नहीं है।
अखिलेश यादव ने X (पहले ट्विटर) पर लिखा था कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को जाट समाज में उबल रहे गुस्से और अंकित के दुखी पिता की बात सुननी चाहिए। साथ ही उन्होंने उन जाट नेताओं को भी लपेटे में लिया जो भाजपा के साथ खड़े हैं, यह कहते हुए कि पार्टी को बस वोट से मतलब है। यानी एक हत्या, जिसकी अभी जाँच ही चल रही है, उसे सीधे जातीय राजनीति और चुनावी समीकरण से जोड़ दिया गया।
लोकप्रिय युवा गायक स्व. अंकित बालियान के दुखी पिता से बात करके हमने उन्हें ये आश्वासन दिया कि इंसाफ़ की इस लड़ाई में हम हर क़दम पर उनके साथ हैं।
— Akhilesh Yadav (@yadavakhilesh) August 28, 2026
रक्षाबंधन के ठीक पहले जिन बहनों ने अपना भाई खोया है और माता-पिता ने पुत्र उनका दुख अपार है। बालियान समाज भी अपने उभरते हुए सितारे को… pic.twitter.com/rGEVGmhFlW
जयंत चौधरी ने अखिलेश को दिया करारा जवाब
जयंत चौधरी को यह बात रास नहीं आई। उन्होंने पलटवार करते हुए कहा कि इतनी दुखद घटना पर जाति की राजनीति करना संवेदनहीनता की हद है। उनका इशारा साफ था कि पहले अंकित बालियान एक कलाकार थे, एक इंसान थे, उसके बाद कोई और पहचान या राजनीतिक हिसाब-किताब आता है।
किसी भी अपराध में पीड़ित के साथ सभ्य समाज की संवेदना होती है, और सम्पूर्ण समाज का सहारा होता है।
— Jayant Singh (@jayantrld) August 28, 2026
हत्या जैसा संगीन अपराध में मृतक की जाति को तलाशना और कहना की उसके जाति के लोगों में आक्रोश है, अपने आप में संवेदनहीनता है क्योंकि ऐसी घड़ी में सभी विचार, जाति और क्षेत्र या अन्य भेद…
अब घटना के बारे में जानिए
अंकित बालियान की हत्या बुधवार, 26 अगस्त 2026 की शाम को हुई थी। यह घटना उत्तर प्रदेश के शामली जिले में एक जिम के बाहर लगभग शाम 6:45 से 7:00 बजे के बीच हुई। चार हमलावरों ने उन पर कई राउंड गोलियाँ चलाईं, जिसके बाद उन्हें अस्पताल ले जाया गया, जहाँ उन्हें मृत घोषित कर दिया गया।
अंकित बालियान हरियाणवी गानों और यूट्यूब पर अपनी पहचान बना चुके थे। घटना वाले दिन वे जिम से निकल ही रहे थे कि बाइक पर सवार कुछ हमलावरों ने उन पर ताबड़तोड़ गोलियाँ चला दीं।

पुलिस खंगाल रही CCTV
पुलिस ने केस दर्ज कर छानबीन शुरू कर दी है और आसपास के CCTV कैमरों की फुटेज खंगाली जा रही है ताकि हमलावरों की पहचान हो सके। हत्या के पीछे क्या वजह रही, इसका भी पता लगाया जा रहा है।
परिवार में मातम के साथ-साथ गुस्सा भी है। घरवालों की माँग है कि आरोपियों को जल्द से जल्द पकड़ा जाए और सख्त सजा दी जाए। सोशल मीडिया पर कुछ लोग इसे गैंगवार से जोड़कर देख रहे हैं, हालाँकि अभी तक इसकी कोई पुख्ता पुष्टि सामने नहीं आई है।
बिना जाँच अखिलेश ने चला जाट समाज में नाराजगी का कार्ड
इस पूरे घटनाक्रम में दोनों नेताओं का नजरिया साफ अलग-अलग दिखता है। अखिलेश यादव ने इसे जाट समाज के आक्रोश और भाजपा-जाट नेताओं की राजनीति से जोड़कर देखा, जबकि जयंत चौधरी ने इसे सिर्फ इंसाफ और संवेदनशीलता का मुद्दा बताया और जाति की राजनीति से दूर रहने की सलाह दी।
यह भी नहीं भूलना चाहिए कि पश्चिमी उत्तर प्रदेश में जाट वोट हमेशा से चुनावी गणित का बड़ा हिस्सा रहे हैं। ऐसे में किसी गंभीर अपराध को जातीय नाराजगी के फ्रेम में डालना राजनीतिक तौर पर फायदे का सौदा लग सकता है, लेकिन इससे न तो जाँच आगे बढ़ती है और न ही पीड़ित परिवार को इंसाफ जल्दी मिलता है।
जयंत चौधरी का जवाब असल में इसी सोच पर चोट है। उनका कहना है कि हत्या जैसे मामलों पर राजनीति करने के बजाय ध्यान अपराधियों को पकड़ने और परिवार को न्याय दिलाने पर होना चाहिए।

