हलाला और तीन तलाक की आड़ में नाबालिग के साथ सेक्स करना POCSO के तहत अपराध: इलाहाबाद HC

इलाहाबाद हाई कोर्ट ने निकाह हलाला के नाम पर एक महिला के साथ हुए शोषण के मामले में बड़ा फैसला सुनाया है। कोर्ट ने कहा है कि आपराधिक मामलों में पर्सनल लॉ की आड़ नहीं ली जा सकती और पॉक्सो (POCSO) एक्ट पर्सनल लॉ से ऊपर है।

इस टिप्पणी के साथ जस्टिस जेजे मुनीर और जस्टिस तरुण सक्सेना की बेंच ने पीड़िता की FIR रद्द करने की माँग वाली याचिका को खारिज कर दिया है। यह मामला साल 2016 से शुरू हुआ था। पीड़िता का आरोप है कि साल 2015 में जब वह सिर्फ 15 साल की थी, तब उसका निकाह अजहर नवाज नाम के शख्स से करा दिया था।

अगले ही साल मियाँ ने उसे तीन तलाक दे दिया था। इसके बाद दोबारा निकाह करने के बहाने नवंबर 2016 में एक मौलाना के साथ उसका ‘निकाह हलाला’ कराया गया। उस वक्त पीड़िता नाबालिग (16 साल) थी और उसने कोर्ट में बयान दिया कि उसे हलाला का मतलब भी नहीं पता था और उसके साथ जबरन रेप किया गया।

2025 में ‘डबल हलाला’ के नाम पर गैंगरेप

साल 2017 में पीड़िता का दोबारा निकाह अपने पहले मियाँ से हुआ। लेकिन कुछ साल बाद मियाँ ने उसे फिर तलाक दे दिया। फरवरी 2025 में मियाँ और उसके भाइयों ने महिला को फिर झांसा दिया।

उन्होंने कहा कि चूंकि दो बार तलाक हो चुका है, इसलिए इस बार ‘डबल हलाला’ करना होगा। इस बहाने मियाँ के भाइयों और भतीजों ने महिला के साथ गैंगरेप किया। विरोध करने पर पीड़िता और उसकी बेटी को जान से मारने की धमकी भी दी गई।

कोर्ट ने क्या कहा?

हाई कोर्ट ने साफ शब्दों में कहा कि जब बात किसी अपराध की हो, तो निकाह या पर्सनल लॉ की दुहाई देकर सजा से नहीं बचा जा सकता। अगर हलाला के नाम पर किसी नाबालिग लड़की के साथ शारीरिक संबंध बनाए जाते हैं, तो वहाँ पॉक्सो एक्ट (POCSO Act) पूरी तरह लागू होगा। कोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के पुराने फैसलों का हवाला देते हुए कहा कि 18 साल से कम उम्र की लड़की के साथ शारीरिक संबंध बनाना कानूनन अपराध है।

बचाव पक्ष के वकीलों ने दलील दी थी कि 2016 में तीन तलाक कानूनी था और पर्सनल लॉ के तहत नाबालिग की निकाह पूरी तरह अवैध नहीं होती। उन्होंने निकाह कराने वाले काजी और बुजुर्ग रिश्तेदारों को बेकसूर बताया। लेकिन हाई कोर्ट ने इन दलीलों को सिरे से खारिज कर दिया। कोर्ट ने कहा कि यह एक सुनियोजित अपराध है और इसमें शामिल सभी 9 आरोपितों की भूमिका की पूरी जाँच होनी जरूरी है।