पश्चिम बंगाल के तीन दिवसीय दौरे में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने रविवार (19 जुलाई 2026) को भारत के पहले म्यूजियम ऑफ वर्ड यानी शब्द संग्रहालय का उद्घाटन किया।
म्यूजियम का उद्घाटन क करते हुए अमित शाह ने कहा, “बंगाल में कई तरह के म्यूजियम हैं और मेरा मानना है कि यह ‘म्यूजियम ऑफ वर्ड’ बहुत कम समय में अपनी अलग पहचान बना लेगा। यहाँ आने वाले शब्द-प्रेमी और जिज्ञासु लोग जरूर ही कुछ मूल्यवान हासिल करेंगे।”
#WATCH कोलकाता, पश्चिम बंगाल: केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने नेशनल लाइब्रेरी में नवनिर्मित ‘म्यूज़ियम ऑफ़ वर्ड’ के पहले चरण का उद्घाटन किया।
— ANI_HindiNews (@AHindinews) July 19, 2026
एक जनसभा को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा, "… किसी भी देश-प्रदेश की संस्कृति और उसकी अभिव्यक्ति भाषा के बिना संभव हो ही नहीं सकती है।… pic.twitter.com/TqTqjYrcCj
उन्होंने कहा, “किसी भी देश-प्रदेश की संस्कृति और उसकी अभिव्यक्ति भाषा के बिना संभव हो ही नहीं सकती है। भाव से उत्पन्न शब्दों के बिना भाषा नहीं बन सकती है… मैं मानता हूँ कि यह शब्द म्यूजियम हमारी भाषा और संस्कृति से हमारी आने वाली पीढ़ियों को शिक्षित करेगा।”
उन्होंने आगे बताया कि म्यूजियम ऑफ वर्ड की यह इमारत कभी बंगाल के गवर्नर का सरकारी निवास हुआ करता था लेकिन इसके लिए इससे बेहतर कोई और मकसद नहीं हो सकता था। उन्होंने इस इमारत को म्यूजियम ऑफ वर्ड के लिए चुने जाने के फैसले को सही सही बताया।
यह म्यूजियम कोलकाता के अलीपुर स्थित नेशनल लाइब्रेरी परिसर की ऐतिहासिक बेल्वेडियर हाउस इमारत में बनाया गया है, जो कि लगभग 30 एकड़ के परिसर वाली बेल्वेडियर एस्टेट का हिस्सा है, जो कभी बंगाल के पहले गवर्नर जनरल वॉरेन हेस्टिंग्स का निवास हुआ करता था। बाद में 1854 से यह बंगाल के लेफ्टिनेंट गवर्नर का आवास बनी और 1948 में यहीं नेशनल लाइब्रेरी ऑफ इंडिया संचालित हो रही है।
म्यूजिम ऑफ वर्ड की खासियतें
फिलहाल इस म्यूजियम का पहला चरण ही जनता के लिए खोला गया है। 15 अगस्त तक म्यूजियम को आम जनता के लिए निशुल्क खुला रहेगा। दैनिक जागरण की रिपोर्ट के मुताबिक, इसमें 22 भारतीय भाषाओं और 9 डिजिटल गैलरियों को एक ही छत के नीचे प्रदर्शित किया गया है यानी संविधान की आठवीं अनुसूचि में शामिल 22 आधिकारिक भारतीय भाषाओं की उत्पत्ति, विकास और सभ्यतागत प्रभाव को यहाँ वैज्ञानिक तरीके से दिखाया गया है।
इस परियोजना की परिकल्पना प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने साल 2021 में की थी, यानी करीब पाँच साल की योजना और निर्माण के बाद यह म्यूजियम आम जनता के लिए खुल पाया है।
Kolkata, West Bengal: Union Home Minister Amit Shah inaugurated the “Museum of Word” at the National Library in Kolkata in the presence of CM Suvendu Adhikari and other dignitaries pic.twitter.com/cAPTflDyN3
— IANS (@ians_india) July 19, 2026
म्यूजियम का संचालन संस्कृति मंत्रालय के अधीन नेशनल काउंसिल ऑफ साइंस म्यूजियम्स (NCSM) और नेशनल लाइब्रेरी के देखरेख में हो रहा है। इसका मकसद भारतीय भाषाओं की बहुभाषी मौखिक और लिखित विविधता को प्रदर्शित करना है, ताकि भाषा से जुड़े पहलू के लिए यह एक संग्रह केंद्र और गतिविधि केंद्र दोनों का काम कर सके।
गैलरियों की बनावट भी खास तरीके से सोची गई है। यहाँ की गैलरियाँ पहले जानी-पहचानी भाषाई अवधारणाओं से शुरू होकर मातृभाषाओं की खोज और भाषा सीखने के शुरुआती संवेदी अनुभवों की ओर बढ़ती हैं, फिर आगे अलग-अलग भारतीय भाषाओं के विकास को समझाती हैं और अंत में भाषा के मौखिक व प्रदर्शनकारी पहलुओं पर आधारित गतिविधि क्षेत्रों में खुलती हैं।
यह भारत का पहला ऐसा म्यूजियम है जो केवल लिखे हुए शब्द तक सीमित नहीं, बल्कि भाषा से जुड़ी सांस्कृतिक और सामाजिक अहमियत को भी वस्तुओं और इंटरैक्टिव माध्यमों के जरिए दिखाता है यानी यह एक ‘इमर्सिव’ या डूब जाने वाला अनुभव देने वाला म्यूजियम है, जो केवल पढ़ने-लिखने तक सीमित नहीं बल्कि सुनने-महसूस करने का अनुभव भी देता है।

