‘अवार्ड वापसी’ गैंग के सरगना आनंद पटवर्धन ने किया रेपिस्ट तरुण तेजपाल का बचाव, पीड़िता पर ही उठाए सवाल: बॉम्बे HC को भी घेरा

बॉम्बे हाई कोर्ट ने तहलका मैगजीन के संस्थापक तरुण तेजपाल को अपनी ही सहकर्मी के साथ बलात्कार के मामले में दोषी करार दिया। कोर्ट के इस फैसले के ठीक एक दिन बाद, अवॉर्ड वापसी गैंग के मुखिया आनंद पटवर्धन शुक्रवार (7 अगस्त) को तरुण तेजपाल के बचाव में उतर आए।

यह पूरा मामला साल 2013 का है। नवंबर 2013 में गोवा में एक ‘थिंकफेस्ट’ कार्यक्रम का आयोजन किया गया था। इस दौरान तरुण तेजपाल की एक जूनियर सहकर्मी ने आरोप लगाया था कि होटल की लिफ्ट के अंदर तरुण तेजपाल ने उसका यौन शोषण किया था। इन आरोपों ने देश में आक्रोश का माहौल पैदा किया। भारत में कार्यस्थल पर महिलाओं के साथ होने वाले यौन उत्पीड़न के मामलों में यह सबसे बड़े और चर्चित मामलों में गिना जा रहा है।

CCTV फुटेज का हवाला देकर आनंद पटवर्धन ने पीड़िता और हाई कोर्ट पर उठाए सवाल

पत्रकार के ए शाजी द्वारा लिखी गई फेसबुक पोस्ट पर प्रतिक्रिया देते हुए, जिसे गीता शेषु ने शेयर किया था, आनंद पटवर्धन ने दुष्कर्म पीड़िता के साथ-साथ बॉम्बे हाई कोर्ट पर भी सवाल उठाने की कोशिश की। फेसबुक पर की गई टिप्पणी में उसने कहा, “यह जटिल मामला है। तहलका मोदी और बीजेपी के लिए एक बड़ा काँटा था और निश्चित तौर पर उन्होंने 2014 के चुनावों से पहले इसे खत्म करने के लिए हर संभव कोशिश की।”

76 वर्षीय षड्यंत्र सिद्धांतों पर विश्वास करने वाले आनंद पटवर्धन ने आगे कहा, “दूसरी तरफ, तेजपाल का अपनी युवा सहकर्मियों पर हमला करना निंदनीय है। क्या यह दुष्कर्म था? उसे और पीड़िता को लिफ्ट में जाते हुए और ऊपर की मंजिल पर उससे बाहर निकलते हुए CCTV फुटेज देखने के बाद, जहाँ दोनों सामान्य तरीके से बात कर रहे थे, मुझे नहीं लगता कि लिफ्ट के अंदर कोई हिंसक घटना हुई थी। लिफ्ट के अंदर CCTV नहीं था।”

इस तरह उन्होंने दुष्कर्म की घटना को ही खारिज करने की कोशिश की। इसके बाद उन्होंने बॉम्बे हाई कोर्ट के फैसले पर भी सवाल उठाते हुए इसे मोदी सरकार के निर्देशों से जोड़ने का प्रयास किया। उन्होंने कहा, “अब हाई कोर्ट ने उसे दोषी पाया है। यह भी कोई आश्चर्य की बात नहीं है, क्योंकि अब बीजेपी को हमारी अदालतों से वह मिल रहा है जो वह चाहती है।”

आनंद पटवर्धन के कमेंट का स्क्रीनशॉट

अवार्ड वापसी के बाद अब तरुण तेजपाल के बचाव में उतरे पटवर्धन

आनंद पटवर्धन अब न्यूजलॉन्ड्री जैसे लोगों की कतार में शामिल हो गए हैं, जो तरुण तेजपाल के बचाव को लेकर बिना किसी खेद और झिझक के खड़े रहे हैं।

दिलचस्प बात यह है कि आनंद पटवर्धन अक्टूबर 2015 में उस समय सुर्खियों में आए थे, जब उन्होंने बढ़ती असहिष्णुता और विविधता तथा अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के लिए बढ़ते खतरों का आरोप लगाते हुए अवार्ड वापसी अभियान के तहत अपना राष्ट्रीय पुरस्कार लौटा दिया था।

इससे पहले भी उन्होंने 2016 में मालदा में हिंदुओं के खिलाफ हुई हिंसा को सही ठहराने की कोशिश की थी। उस समय आनंद पटवर्धन ने कहा था, “आइए कुछ बातें स्पष्ट कर लेते हैं। मैं मालदा में हुई भीड़ की हिंसा का विरोध करता हूँ, जो हिंदू महासभा के एक नेता द्वारा पैगंबर मोहम्मद के खिलाफ अपमानजनक टिप्पणी किए जाने के कारण भड़की थी।”