असम की भाजपा सरकार ने लंबे समय से निष्क्रिय पड़े इमिग्रेंट्स (एक्सपल्शन फ्रॉम असम) एक्ट-1950 को फिर से सक्रिय कर अवैध घुसपैठियों को तेजी से बाहर करने की मुहिम शुरू की है। इस कड़ी में बिस्वनाथ जिले की प्रशासन ने दो बांग्लादेशी महिलाओं को 24 घंटे के अंदर भारत छोड़ने का आदेश जारी किया है।
रिपोर्ट्स के मुताबिक, 20 दिसंबर को जारी आदेश में असमुल खातून और अफूजा बेगम को विदेशी नागरिक घोषित किया गया है। दोनों को 2005 में ही बिस्वनाथ के फॉरेनर्स ट्रिब्यूनल ने विदेशी करार दिया था। आदेश में कहा गया है कि उनकी मौजूदगी भारत और असम की आंतरिक सुरक्षा व सार्वजनिक हित के लिए हानिकारक है। उन्हें धुबरी, श्रीभूमि या साउथ सलमारा-मानकाचार कॉरिडोर से देश छोड़ने को कहा गया है।
Remove yourselves from India in 24 hours: Assam – relying on dormant 1950 Act – gives ultimatum to 15 people https://t.co/VI5qR1id1k
— The Indian Express (@IndianExpress) December 18, 2025
बिस्वनाथ के पुलिस अधीक्षक अजग्वरन बसुमतारी ने पुष्टि की कि दोनों महिलाएँ गोलपारा जिले के मटिया ट्रांजिट कैंप में हिरासत में हैं। उन्होंने कहा, “वे डिटेंशन में हैं और डिपोर्टेशन की प्रक्रिया चल रही है। बॉर्डर सिक्योरिटी फोर्स से क्लियरेंस मिलते ही इसे अंजाम दिया जाएगा।”
इसी तरह नागाँव जिले में 17 दिसंबर को 15 लोगों को ऐसे ही नोटिस जारी किए गए। ये लोग 1990 से 2021 के बीच अलग-अलग वर्षों में ट्रिब्यूनल द्वारा विदेशी घोषित हो चुके थे। नागाँव के उपायुक्त देवाशीष शर्मा ने आदेश जारी किए। उन्होंने कहा, “कई लोगों ने हाईकोर्ट में अपील की थी, लेकिन खारिज हो गई। जिला पुलिस की निगरानी में इन्हें उचित समय पर हटाया जाएगा।”
नागाँव के पुलिस अधीक्षक स्वप्ननील डेका ने बताया कि ये 15 लोग मटिया डिटेंशन सेंटर में हैं और डिपोर्टेशन प्रक्रिया जारी है। 19 दिसंबर को इन्हें कैंप से बॉर्डर की ओर ले जाया गया, लेकिन अभी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
इससे पहले सोनितपुर जिले में कैबिनेट की मंजूरी के बाद एक्ट का पहला इस्तेमाल हुआ, जहाँ पाँच लोगों को 24 घंटे में देश छोड़ने का आदेश दिया गया। हालाँकि पुलिस ने बाद में कहा कि उनके ठिकाने का पता नहीं और वे फरार हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि ये लोग दस साल से ज्यादा पहले इलाका छोड़ चुके थे।
मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा कई महीनों से इस कानून के इस्तेमाल की वकालत कर रहे हैं। जून में उन्होंने कहा था कि जिला आयुक्त अगर किसी को पहली नजर में विदेशी मानें तो ट्रिब्यूनल का इंतजार किए बिना बांग्लादेश वापस धकेल दिया जाए।
1950 का यह एक्ट विभाजन के बाद पूर्वी पाकिस्तान से असम में आने वाली घुसपैठ को रोकने के लिए बनाया गया था। इसमें केंद्र सरकार को ऐसे व्यक्ति को राज्य या देश छोड़ने का आदेश देने का अधिकार है, जिसकी मौजूदगी सार्वजनिक हित या आदिवासी समुदाय के लिए नुकसानदेह हो। सितंबर में असम कैबिनेट ने इसका एसओपी मंजूर किया, जिसके बाद अब यह सक्रिय हो गया है।

