‘50% हुई मुस्लिम आबादी तो राज्य को बांग्लादेश में मिलाने की हो सकती है साजिश’: असम CM हिमंता ने चेताया, बोले- अब BJP ही ‘जाति, माटी और भेती’ को बचा सकती

असम के गुवाहाटी में बीजेपी की राज्य कार्यकारिणी बैठक के दौरान मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने असम के भविष्य को लेकर एक बड़ा और गंभीर दावा किया है। हिमंता बिस्वा ने चेतावनी देते हुए कहा कि राज्य में बांग्लादेशी मूल के मुस्लिमों की आबादी जिस तेजी से बढ़ रही है, वह असम की पहचान के लिए खतरे की घंटी है।

सीएम सरमा के मुताबिक, अगर यह आबादी 50 प्रतिशत के आँकड़े को पार कर जाती है, तो असम को बांग्लादेश का हिस्सा बनाने की कोशिशें शुरू हो सकती हैं। उन्होंने बताया कि राज्य में मुस्लिम आबादी पहले ही 40 प्रतिशत के करीब पहुँच चुकी है, जिसे आज हर कोई अपनी आँखों से देख सकता है।

मुख्यमंत्री ने कॉन्ग्रेस पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि दशकों तक चली तुष्टीकरण की राजनीति की वजह से असम में एक ऐसी ‘नई सभ्यता’ खड़ी हो गई है, जिसकी तादाद अब करीब डेढ़ करोड़ तक पहुँच चुकी है। साल 2011 की जनगणना का उदाहरण देते हुए उन्होंने समझाया कि तब राज्य में 34 प्रतिशत मुस्लिम थे, जिनमें से 31 प्रतिशत बांग्लादेशी मूल के थे।

सीएम सरमा ने अंदेशा जताया कि 2027 तक यह संख्या और बढ़ेगी। उन्होंने जोर देकर कहा कि अब सिर्फ भाजपा ही असम की ‘जाति, माटी और भेती’ (समाज, जमीन और आधार) को बचा सकती है। पीएम मोदी और अमित शाह के नेतृत्व में पार्टी इस लड़ाई को पूरी मजबूती से लड़ने और जीतने के लिए तैयार है।