मध्य प्रदेश के धार स्थित ऐतिहासिक भोजशाला परिसर को लेकर चल रहा विवाद बढ़ता जा रहा है। हाई कोर्ट में जारी सुनवाई के बीच मामला अब सुप्रीम कोर्ट तक पहुँच गया है। मुस्लिम पक्ष से जुड़ी संस्था कमाल मौलाना वेलफेयर सोसायटी ने विशेष आवेदन दाखिल कर हस्तक्षेप की माँग की है।
कमाल मौलाना वेलफेयर सोसायटी ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल कर अनुरोध किया है कि मध्य प्रदेश हाई कोर्ट की इंदौर खंडपीठ में 2 अप्रैल 2026 को प्रस्तावित सुनवाई से पहले, उनकी आपत्तियों पर 1 अप्रैल 2026 को ही विचार किया जाए। सोसायटी का कहना है कि वैज्ञानिक सर्वे की वीडियोग्राफी के फुटेज उन्हें उपलब्ध कराए जाएँ।
सर्वे की वीडियोग्राफी और प्रक्रिया पर उठाए सवाल
विवाद भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) द्वारा भोजशाला परिसर में किए जा रहे वैज्ञानिक सर्वे से जुड़ा है। सोसायटी के अध्यक्ष अब्दुल समद के अनुसार, 11 मार्च 2026 को उन्होंने सर्वे की पूरी वीडियोग्राफी उपलब्ध कराने की माँग की थी, लेकिन 16 मार्च 2026 की सुनवाई में इस मुद्दे पर विस्तार से चर्चा नहीं हुई और कोई स्पष्ट आदेश भी जारी नहीं किया गया।
दूसरी ओर हाई कोर्ट के जस्टिस विजय कुमार शुक्ला और जस्टिस आलोक अवस्थी ने हाल ही में भारी सुरक्षा व्यवस्था के बीच स्थल का निरीक्षण किया और ASI अधिकारियों से सर्वे की प्रगति के साथ-साथ वहाँ पूजा और नमाज की व्यवस्थाओं को लेकर भी जानकारी ली।
कमाल मौलाना वेलफेयर सोसायटी ने हिंदू फ्रंट फॉर जस्टिस द्वारा दायर मूल याचिका की वैधता पर भी सवाल उठाए हैं। उनका तर्क है कि यह याचिका सुनवाई के योग्य नहीं है, फिर भी इस पर लगातार सुनवाई हो रही है। अब 2 अप्रैल 2026 को हाई कोर्ट में होने वाली सुनवाई अहम है, जिसमें ऐतिहासिक तथ्यों और ASI की प्रारंभिक रिपोर्ट पर चर्चा हो सकती है।

