पूर्व DGP बृजलाल ने सड़क पर नमाज़ बैन पर दी CM योगी को बधाई, सपा-कॉन्ग्रेस पर तुष्टिकरण का लगाया आरोप: कहा- हनुमानगढ़ी के सामने इफ्तारी की हुई थी कोशिश

उत्तर प्रदेश के पूर्व डीजीपी और वर्तमान राज्यसभा सांसद बृजलाल ने सूबे की कानून-व्यवस्था और अतीत की राजनीति को लेकर एक बड़ा बयान दिया है। उन्होंने सड़कों पर नमाज़ पढ़ने को प्रतिबंधित करने के फैसले की सराहना करते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को बधाई दी है। इसके साथ ही उन्होंने पूर्ववर्ती समाजवादी पार्टी और कॉन्ग्रेस सरकारों पर मुस्लिम तुष्टिकरण की राजनीति करने का तीखा आरोप लगाया है।

बृजलाल ने अतीत की सरकारों पर निशाना साधते हुए कहा, “समाजवादी और कॉन्ग्रेस सरकारों में राष्ट्रपति भवन, प्रधानमन्त्री आवास और मुख्यमंत्रियों के सरकारी बंगलों में इफ्तार होते थे और नमाज़ पढ़ी जाती थी। केंद्रीय और राज्य सरकारों के मंत्रियों में रोजा इफ्तार करने की होड़ लगी रहती थी। लज़ीज़ पकवानों को परोसने में भी होड़ लगी रहती थी। बड़े-बड़े पदाधिकारी टोपी और गमछा ओढ़ कर इफ्तार पार्टियों में भाग लेते थे।”

उन्होंने प्रशासनिक अधिकारियों के रवैये पर भी सवाल उठाए। सांसद ने कहा, “हद तो तब हो गई जब कुछ डीएम, एसएसपी, एसपी, कमिश्नर, डीआईजी, आईजी भी मुख्यमंत्री की नज़रों में चढ़ने के लिए अपने सरकारी बंगलों में रोजा इफ्तार कराने लगे थे। हिंदू त्योहारों पर कोई समारोह इन पदाधिकारियों के यहाँ आयोजित करने की कल्पना करना भी महा पाप था।”

साल 2003 की एक घटना का ज़िक्र करते हुए उन्होंने बताया कि मुलायम सिंह यादव की सरकार के दौरान लखनऊ के आईजी ज़ोन अयोध्या के प्रसिद्ध हनुमानगढ़ी मंदिर के ठीक सामने जबरन इफ्तार कराना चाहते थे। उन्होंने एक वामपंथी प्रोफेसर का हवाला देते हुए कहा कि आईजी ने राजनीतिक आकाओं के साथ मिलकर मंदिर के सामने नमाज़ और इफ्तार की साज़िश रची थी।

बृजलाल के मुताबिक, तत्कालीन एसएसपी फैजाबाद (अब अयोध्या) ने इस कार्यक्रम को रोक दिया, जिससे नाराज़ आईजी ने कहा था कि अगर वे एसएसपी होते तो हनुमानगढ़ी की छत पर इफ्तार करवाते। पूर्व डीजीपी ने दावा किया, “जानकारी हुई कि मुसलमान महंत जी के घर में जाने वालो तीनों सीढ़ियों पर भी चटाई बिछा कर नमाज़ अदा करेंगे और हनुमानगढ़ी मंदिर तक सटकर नमाज पड़ेंगे। जैसे ही एक मुस्लिम ने योजनानुसार पहली सीढ़ी पर चटाई बिछायी, पुलिस ने उठाकर फेंक दिया।”

बयान के अंत में उन्होंने आरोप लगाया कि इस इफ्तार के दौरान महंत के आवास में स्थापित गणेश जी और देवताओं की प्रतिमाएँ अपवित्र हुईं।

उन्होंने सपा सरकार पर कड़ा प्रहार करते हुए कहा, “यह था समाजवादी पार्टी का तुष्टिकरण जिन्होंने रामभक्तों पर गोलियाँ चलवाकर सरयू जी के जल को लाल कर दिया था। मुलायम सिंह यादव बाबरी-ढाँचे के विध्वंस की भरपाई करना चाहते थे जिसमें एक कर्तव्यनिष्ठ आईपीएस अधिकारी के कारण सफल नहीं हो पाए।”