360 गवाह, 43 सबूत और 13 गिरफ्तार: NEET-UG पेपर लीक मामले में CBI ने दाखिल की चार्जशीट, विशेष फास्ट ट्रैक कोर्ट में होगी सुनवाई

देश की सबसे बड़ी मेडिकल प्रवेश परीक्षा NEET-UG 2026 के पेपर लीक मामले में केंद्रीय जाँच ब्यूरो (CBI) ने 13 गिरफ्तार आरोपितों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल कर दी है। यह चार्जशीट दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट में पेश की गई है और अब मामले की सुनवाई पेपर लीक मामलों के लिए गठित विशेष फास्ट ट्रैक कोर्ट में होगी।

जाँच एजेंसी का दावा है कि उसने पेपर लीक की पूरी साजिश, इसके स्रोत और प्रश्नपत्र को अभ्यर्थियों तक पहुँचाने वाले नेटवर्क का पता लगा लिया है। फिलहाल सभी 13 आरोपित न्यायिक हिरासत में हैं और मामले की जाँच अभी भी जारी है।

360 गवाह, 422 दस्तावेज और 43 अहम सबूतों के आधार पर तैयार हुई चार्जशीट

CBI की आर्थिक अपराध शाखा की ओर से दाखिल चार्जशीट में 360 गवाहों के बयान, 422 महत्वपूर्ण दस्तावेज और 43 भौतिक साक्ष्यों को शामिल किया गया है। जाँच एजेंसी के अनुसार, डिजिटल फॉरेंसिक रिपोर्ट, हस्तलेखन विशेषज्ञों की राय और विषय विशेषज्ञों की जाँच से यह पुष्टि हुई है कि परीक्षा से पहले प्रश्नपत्र का अवैध रूप से प्रसार किया गया था।

इसी आधार पर आरोपितों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) 2023 की विभिन्न धाराओं, भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 और पब्लिक एग्जामिनेशन (अनुचित साधनों की रोकथाम) अधिनियम, 2024 के तहत मुकदमा दर्ज किया गया है। CBI ने स्पष्ट किया है कि फॉरेंसिक विश्लेषण और नए तथ्यों के आधार पर आगे भी कार्रवाई की जा सकती है।

NTA विशेषज्ञों, बिचौलियों और कोचिंग संस्थानों से जुड़े लोग आरोपितों में शामिल

चार्जशीट में कुल 13 लोगों को आरोपित बनाया गया है। इनमें राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) से जुड़े बायोलॉजी विशेषज्ञ मनीषा मंधारे, केमिस्ट्री विशेषज्ञ प्रह्लाद विठ्ठलराव कुलकर्णी और फिजिक्स विशेषज्ञ मनीषा संजय हवालदार के अलावा कई बिचौलिए शामिल हैं।

आरोपितों में यश यादव, मंगलिलाल बिवाल, दिनेश बिवाल, विकास बिवाल, शुभम माधुकर खैरनार, धनंजय निवृत्ति लोखंडे, मनीषा संजय वाघमारे और डॉ मनोज भगवानराव शिरुरे के नाम भी हैं।

इसके अलावा लातूर स्थित RCC कोचिंग इंस्टीट्यूट के संचालक शिवराज रघुनाथ मोटेगांवकर तथा पुणे के APMA कोचिंग इंस्टीट्यूट से जुड़े फिजिक्स फैकल्टी एवं COO तेजस हर्षदकुमार शाह को भी आरोपित बनाया गया है।

CBI का आरोप है कि इन लोगों ने पेपर लीक की साजिश में अलग-अलग भूमिकाएँ निभाईं और लीक प्रश्नपत्र अभ्यर्थियों तक पहुँचाने में सहयोग किया।

FIR से लेकर देशभर में छापेमारी तक, जाँच में जुटीं कई विशेष टीमें

CBI के अनुसार, 3 मई 2026 को आयोजित NEET-UG परीक्षा में पेपर लीक की शिकायत मिलने के बाद केंद्र सरकार के उच्च शिक्षा विभाग ने 12 मई 2026 को एजेंसी को जाँच सौंपी थी। उसी दिन FIR दर्ज कर जाँच शुरू की गई। इसके लिए 72 अधिकारियों और 8 साइबर फॉरेंसिक विशेषज्ञों की विशेष टीमें गठित की गईं।

जाँच के दौरान महाराष्ट्र, राजस्थान, हरियाणा और दिल्ली सहित कई राज्यों में 92 स्थानों पर छापेमारी की गई, जहाँ से मोबाइल फोन, लैपटॉप, डिजिटल डिवाइस और महत्वपूर्ण दस्तावेज बरामद किए गए। एजेंसी ने आरोपितों के बैंक खाते, बैंक लॉकर और एक डीमैट खाते को भी फ्रीज किया है।

CBI का कहना है कि पेपर लीक से जुड़े पूरे नेटवर्क की पहचान कर ली गई है और जाँच अभी जारी है। चार्जशीट दाखिल होने के बाद अब विशेष फास्ट ट्रैक कोर्ट में इस मामले की सुनवाई होगी, जहाँ पेश किए गए साक्ष्यों और गवाहों के आधार पर आगे की न्यायिक प्रक्रिया चलेगी।