लखनऊ के मोहनलालगंज क्षेत्र में रविवार (9 अगस्त 2026) को चंगाई सभा की आड़ में ईसाई धर्मांतरण का मामला सामने आया है। बजरंग दल और श्रीराम सनातन सेवा समिति के कार्यकर्ताओं ने एक मकान के भीतर संचालित चर्च में धर्मांतरण संबंधी गतिविधियाँ होने का आरोप लगाया, जिसके बाद काफी हंगामा हुआ।
मामला सिसेंडी थाना क्षेत्र के रायपुर भदेशवा नयाखेड़ा गाँव का है। कार्यकर्ताओं का कहना है कि चर्च में प्रार्थना सभा की आड़ में हिंदुओं को प्रलोभन देकर धर्मांतरण के लिए प्रेरित किया जा रहा था। सूचना मिलने पर पहुँची पुलिस एक महिला समेत दो लोगों को पूछताछ के लिए थाने ले गई। पुलिस ने वहाँ लगे कुछ पोस्टर भी हटवाए और मामले की जाँच शुरू कर दी है।
चंगाई सभा में पहुँचे हिंदू संगठन, लोगों के भागने का दावा
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, गाँव के सेंट स्टीफन बिलीवर्स ईस्टर्न चर्च में रविवार (9 अगस्त 2026) सुबह करीब साढ़े 11 बजे प्रार्थना सभा शुरू हुई थी। सभा में लगभग 30 से 35 लोगों के शामिल होने की बात सामने आई है। इसी दौरान बजरंग दल के कार्यकर्ताओं को मकान के अंदर चर्च चलने और धर्मांतरण कराए जाने की सूचना मिली।
इसके बाद बजरंग दल और श्रीराम सनातन सेवा समिति के सदस्य मौके पर पहुँचे। संगठन के लोगों को देखकर वहाँ मौजूद कुछ लोग वहाँ से भाग गए। मौके पर एक पादरी भी मिला, जिसकी पहचान लखनऊ के दौधन खेड़ा बरौली खलीलाबाद निवासी चंद्रिका प्रसाद के रुप में हुई है।
संगठन के कार्यकर्ताओं ने उसके नाम को लेकर सवाल उठाए और हिंदू नाम रखने की वजह पूछी, जिसका वह स्पष्ट जवाब नहीं दे सका। विरोध के दौरान वहाँ तनाव की स्थिति बन गई। संगठन के लोगों ने पुलिस को सूचना दी और आरोप लगाया कि हिंदुओं को लालच देकर ईसाई धर्मांतरण के लिए तैयार किया जा रहा है।
पुलिस ने 2 को हिरासत में लिया, जाँच के लिए टीम गठित
हंगामे की सूचना पर सिसेंडी चौकी से पुलिस टीम मौके पर पहुँची और स्थिति को नियंत्रित किया। पुलिस एक महिला समेत दो लोगों को पूछताछ के लिए अपने साथ ले गई। चर्च परिसर में लगे पोस्टरों को भी हटवाया गया और कुछ सामग्री पुलिस ने अपने कब्जे में ली। बाद में मौके पर मौजूद लोगों को मोहनलालगंज थाने लाया गया।
पुलिस अब प्रार्थना सभा के आयोजन, वहाँ मौजूद लोगों और लगाए गए धर्मांतरण के आरोपों से जुड़े तथ्यों की जाँच कर रही है। मोहनलालगंज के इंस्पेक्टर रामबाबू सिंह के अनुसार, आरोपों की जाँच के लिए विशेष पुलिस टीम बनाई गई है। जाँच में सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
पुरानी घटना के बाद फिर उठा धर्मांतरण का मुद्दा, नेटवर्क की भी जाँच
मोहनलालगंज क्षेत्र में धर्मांतरण को लेकर यह कुछ ही हफ्तों में सामने आया दूसरा मामला है। इससे पहले 23 जुलाई को भरसवा गाँव के एक निवासी ने शिकायत की थी कि कुछ लोग उन्हें लगातार चर्च आने के लिए प्रेरित करते थे और धर्म परिवर्तन करने पर संतान प्राप्ति जैसे प्रलोभन दिए जाते थे।
शिकायतकर्ता ने विरोध करने पर धमकी देने का भी आरोप लगाया था। इसके बाद गाँव में हंगामा हुआ था और ग्रामीणों ने आरोप लगाया था कि बाहर से आया एक समूह लोगों को लालच देकर धर्म परिवर्तन के लिए दबाव बना रहा है। पुलिस ने उस मामले में सात लोगों को गिरफ्तार किया था, जिन्हें कोर्ट में पेश करने के बाद जेल भेज दिया गया।
यह भी सामने आया कि इस नेटवर्क से जुड़े कुछ लोग अपनी पहचान छिपाकर आरक्षण का लाभ उठा रहे थे। पहले भी ऐसा सामने आ चुका है कि अब ईसाई मिशनरियाँ धर्म परिवर्तन कराने वालों से नाम या सरनेम बदलने को नहीं कहती। लोग अपनी पहचान, जाति और सरकारी दस्तावेज वही रखते हैं लेकिन धर्म बदल चुके होते हैं।
ऐसा इसलिए किया जा रहा है ताकि सरकारी योजनाओं, आरक्षण और अन्य सुविधाओं का लाभ पहले की तरह मिलता रहे और किसी को शक भी न हो।

