‘भीड़ ने मेरे पिता को मार ही डाला था’: CJP प्रदर्शन में घायल पुलिसकर्मियों के परिजनों ने मीडिया के सामने बयां किया दर्द, कहा- वर्दी के पीछे भी होता है एक परिवार

राजधानी दिल्ली में कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के प्रदर्शन और ‘संसद चलो’ मार्च के दौरान हुई हिंसा में घायल हुए पुलिसकर्मियों के परिवार पहली बार सार्वजनिक रूप से सामने आए। शुक्रवार (31 जुलाई 2026) को आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में घायल जवानों के परिजनों ने उस दिन की घटनाओं को याद करते हुए अपना दर्द साझा किया।

उन्होंने आरोप लगाया कि प्रदर्शन के बाद केवल एक पक्ष की कहानी सामने आई, जबकि ड्यूटी निभाते हुए घायल हुए पुलिसकर्मियों और उनके परिवारों की पीड़ा को पर्याप्त महत्व नहीं दिया गया। परिजनों ने पुलिसकर्मियों के अधिकारों और उनके साथ हुई हिंसा पर संसद व न्यायपालिका से ध्यान देने की अपील भी की।

परिजनों ने सुनाई उस दिन की दर्दनाक कहानी

प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान कई परिवार भावुक हो गए। एक घायल पुलिसकर्मी के परिजन ने रोते हुए कहा, “जब मेरे पिता उस दिन ड्यूटी के बाद घर लौटे, तो उनकी खाकी वर्दी खून से पूरी तरह लाल थी। उनके सिर और हाथों पर गंभीर चोटें थीं।”

दिल्ली पुलिस के एक ACP की पत्नी अवनीत कौर ने भी उस रात को याद करते हुए कहा, “20 जुलाई की रात जब मेरे पति घायल अवस्था में घर पहुंचे, तो उनकी हालत देखकर मेरी रूह कांप गई। वह दृश्य मेरे और हमारी 2 साल की बेटी के लिए बेहद दर्दनाक और ट्रॉमेटिक था। मेरी मासूम बेटी अपने पिता को उस हालत में देखकर सहम गई थी।”

उन्होंने आगे कहा, “लोग यह भूल जाते हैं कि एक पुलिस अधिकारी सिर्फ एक अकेला इंसान या वर्दी नहीं होता। उसके पीछे उसका एक परिवार होता है-उसकी पत्नी, छोटे बच्चे और बूढ़े माता-पिता, जो हर पल घर पर उसके सुरक्षित लौटने का इंतजार करते हैं।”

‘मेरे पिता को लगभग मार ही डाला गया था’ : बेटी ने बयां किया दर्द

घायल सब-इंस्पेक्टर की बेटी ने अपने पिता की सेवा और उस दिन हुए हमले का जिक्र करते हुए कहा, “पुलिस में शामिल होने से पहले, मेरे पिता इंडियन नेवी में मरीन कमांडो थे। उन्होंने अपनी जिंदगी के 15 साल इंडियन नेवी को दिए। उस दिन मेरे पिता बैरिकेड्स पर तैनात थे, जहाँ बहुत भारी भीड़ मौजूद थी। पापा अक्सर घर पर बताते थे कि अब यह सिर्फ छात्रों का आंदोलन नहीं रह गया है, इसमें कुछ असामाजिक तत्व घुस चुके हैं।”

उन्होंने आगे बताया, “25 तारीख को प्रदर्शन के दौरान भीड़ ने मेरे पिता को जबरन खींच लिया और उन पर जानलेवा हमला कर दिया। उन्हें लगभग मार ही डाला गया था। हमले के बाद वे 4 घंटे से भी ज्यादा समय तक मौके पर बेहोश पड़े रहे। बाद में जब उनकी टीम के लोग उन्हें किसी तरह बचाकर घर लाए, तो उनकी पूरी वर्दी खून से लथपथ थी। एक तरफ मेरे पिता अस्पताल में जिंदगी और मौत की जंग लड़ रहे थे, उनकी वर्दी खून से सनी हुई थी, लेकिन जब मैंने सोशल मीडिया खोला तो देखकर दंग रह गई। सोशल मीडिया पर मेरे पिता को ही एक अपराधी और विलेन की तरह पेश किया जा रहा था।”

उन्होंने यह भी कहा, “ठीक अगले दिन, मुझे पता चला कि जिन लोगों ने मेरे पिता पर हमला किया था, वे अपने जुर्म को छिपाने के लिए सुप्रीम कोर्ट जा रहे थे और उनके और सभी पुलिसकर्मियों के खिलाफ शिकायतें दर्ज करा रहे थे। मुझे बहुत दुख हुआ और मैंने तय किया कि मुझे भी अपने पिता के लिए न्याय माँगना चाहिए। मुझे पुलिस के अन्य परिवारों का समर्थन मिला और हम सुप्रीम कोर्ट गए। हमने एक वकील से माननीय सुप्रीम कोर्ट के सामने हमारा पक्ष रखने का अनुरोध किया। वकील ने हमें भरोसा दिलाया कि इस देश के नागरिक के तौर पर हमारे भी समान अधिकार हैं और हमें भी न्याय मिलेगा।”

इसी दौरान एक अन्य पुलिसकर्मी की बेटी गुंजन ने कहा, “मेरे पिता जब घर आते थे, तो कहते थे कि अब ये स्टूडेंट प्रोटेस्ट नहीं रहा, इसमें गलत लोग जुड़ गए हैं। 20 जुलाई को मेरे पिता के साथी उन्हें रात 10 बजे घर लेकर आए। उनके सिर पर 5 टाँके थे। उनकी यूनिफॉर्म खून से लथपथ थी, फिर भी सोशल मीडिया पर उन्हें ही क्रिमिनल बताया गया।”

परिजनों ने संसद और न्यायपालिका से लगाई गुहार

प्रेस कॉन्फ्रेंस में घायल ASI की पत्नी सीमा ने बताया, “मैंने 20 जुलाई शाम 7 बजे पति को कॉल किया, तो वो हॉस्पिटल में थे। इलाज करा रहे थे। भीड़ में शरारती तत्व एक्टिव हो गए थे। उन्होंने पत्थर और हथियारों से पुलिस के जवानों को घायल कर दिया था। फिर उनका फोन बंद हो गया।”

उन्होंने आगे कहा, “मुझे डर लग रहा था। 11 बजे वो घर आए, उन्होंने बताया कि संसद की सुरक्षा के लिए बैरिकेडिंग की गई थी, उसे तोड़ा और पुलिस फोर्स पर हमला किया। ड्यूटी के दौरान मिला हेलमेट पूरी तरह टूट गया था। इससे मेरी रूह कांप गई थी।”

सीमा ने संसद से अपील करते हुए कहा, “मैं संसद में बैठे प्रतिनिधियों से अपील करना चाहती हूँ कि जो हमारे पुलिसकर्मी और परिवार हैं, उसके अधिकारों और हमलों के बारे में संसद में सवाल किए जाएँ। 20 तारीख के बाद ये ही नेरेटिव चलाया जा रहा है कि छात्रों को पुलिस ने पीटा, लेकिन प्रोटेस्ट का दूसरा हिस्सा कुछ ओर ही है।”

प्रेस कॉन्फ्रेंस में मौजूद परिजनों ने बताया कि प्रदर्शन और ‘संसद चलो’ मार्च के दौरान 148 से अधिक पुलिसकर्मी घायल हुए थे, जिनमें कई गंभीर रूप से जख्मी हैं। उन्होंने कहा कि कुछ घायल पुलिसकर्मियों और उनके परिवारों ने न्याय की माँग को लेकर सुप्रीम कोर्ट का भी रुख किया है।

परिवारों का कहना है कि ड्यूटी के दौरान घायल हुए जवानों की पीड़ा और उनके अधिकारों पर भी समान रूप से चर्चा होनी चाहिए, क्योंकि वर्दी के पीछे भी एक परिवार हर दिन उनकी सुरक्षित वापसी का इंतजार करता है।