राजधानी दिल्ली में कॉकरोचों के प्रदर्शन के दौरान मीडियाकर्मियों पर लगातार हमला हो रहा है, इसके अलावा बदसलूकी की Videos भी सामने आ रही है। कॉकरोच जनता पार्टी के प्रदर्शन को कवर करने पहुँचे विभिन्न मीडिया संस्थानों के पत्रकारों के साथ न सिर्फ धक्का-मुक्की की गई, बल्कि ‘गोदी मीडिया हाय-हाय’ के उग्र नारे लगाते हुए उन पर अज्ञात वस्तुएँ और सफेद रंग का पदार्थ भी फेंका गया। कॉकरोच जनता पार्टी के इन प्रदर्शनकारियों के नाम पर गुंडों का असल चेहरा सबके सामने आ रहा है। घटना से जुड़े तमाम बदसलूकी के Videos सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे है।
एबीपी न्यूज़ के पत्रकार को घेरा, सफेद रंग का पदार्थ फेंका
वायरल वीडियो में साफ देखा जा सकता है कि एबीपी न्यूज़ (ABP News) के रिपोर्टर जब तिलचट्टों के प्रोटेस्ट की कवरेज कर रहे थे, तभी कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के उग्र समर्थकों और प्रदर्शनकारियों की भीड़ ने उन्हें चारों तरफ से घेर लिया। भीड़ ने रिपोर्टर के खिलाफ नारेबाजी शुरू कर दी और डराने-धमकाने की नीयत से मॉब लिंचिंग जैसी स्थिति पैदा कर दी।
हद तो तब हो गई जब शांत होकर वहाँ से निकल रहे पत्रकार पर सफेद रंग का कुछ पदार्थ फेंका गया। यही नहीं, उपद्रवियों ने पत्रकार की शर्ट की जेब में जबरन कुछ ठूँसने का प्रयास भी किया। प्रदर्शन में मौजूद चेहरे ढके और मुखौटा लगाए युवक किसी भी लिहाज से आम प्रदर्शनकारी नहीं, बल्कि भाड़े के गुंडे प्रतीत हो रहे थे, जिन्हें केवल हंगामा, दंगा और हिंसा फैलाने के उद्देश्य से भेजा गया था।
Finally Godi media getting the treatment which they truly deserve 🙌 pic.twitter.com/0PvgsfXA0g
— Veena Jain (@Vtxt21) July 21, 2026
गुंडों ने महिला पत्रकारों को भी नहीं बख्शा
एक नजर इस वीडियो पर भी डाले। खुद को प्रदर्शनकारी बताने वाले ये भाड़े के गुंडों ने पुरुष पत्रकारों के अलावा महिला पत्रकारों को भी नहीं बख्शा। आंदोलन के समय, आंदोलनकारियों ने महिला पत्रकारों पर बड़े पैमाने पर हमले किए, और कुछ जगहों पर महिला पत्रकारों के साथ छेड़छाड़ भी की गई। ये कहीं से भी स्टूडेंट नहीं दिखाई देते है, ये केवल मौके का फायदा उठाने वाले दंगाई थे। इनके नारे ध्यान से सुनिए। तब आपको पता चलेगा कि ये दंगाई कौन थे।
कालच्या आंदोलनात महिला पत्रकारांवर आंदोलकांनी मोठ्या प्रमाणावर हल्ले केले,काही ठिकाणी महिला पत्रकारांबरोबर विनयभंगाचे प्रकारही घडले.
— ℳ𝖆𝖓𝖔𝖏 ℛ𝖆𝖓𝖊 (@wordsMahfil) July 21, 2026
ते विद्यार्थी नव्हतेच,ते दंगलखोर होते. त्यांच्या घोषणा नीट लक्षपूर्वक ऐका.मग तुमच्या लक्षात येईल की ते दंगलखोर कोण होते. pic.twitter.com/l1AojWi5y5
पहली घटना नहीं: ‘ऑपइंडिया’ के पत्रकार अनुराग मिश्रा पर दो बार हमला
यह पहली बार नहीं है जब कॉकरोच जनता पार्टी के प्रदर्शन में पत्रकारों को निशाना बनाया गया हो। इससे पहले भी ‘ऑपइंडिया’ (OpIndia) के ग्राउंड रिपोर्टर अनुराग मिश्रा जब जंतर-मंतर पर समर्थकों से उनकी माँगों को लेकर बातचीत कर रहे थे, तब सीजेपी के लोगों ने उन्हें घेरकर सरेआम गुंडागर्दी की थी।
जंतर मंतर पर सामने आई कॉकरोचों की गुंडागर्दी, OpIndia के पत्रकार @Anurragmishra पर किया हमला
— ऑपइंडिया (@OpIndia_in) July 18, 2026
क्या यही है अभिजीत दिपके के शांतिपूर्ण प्रदर्शन की सच्चाई? क्या अब सवाल भी नहीं पूछ सकते पत्रकार?
कौन हैं ये अराजक तत्व? क्या इनकी गुंडागर्दी की जिम्मेदारी लेंगे सोनम वांगचुक, विजेता… pic.twitter.com/VzzT8kROx4
अनुराग मिश्रा के साथ बदसलूकी, धक्का-मुक्की और शारीरिक हमला किया गया था। घटना का वीडियो सामने आने के बाद यह स्पष्ट हो गया कि कॉकरोच जनता पार्टी के कार्यक्रमों में पत्रकारों पर हमला एक पैटर्न बन चुका है। पत्रकार अनुराग मिश्रा ने साहसिक रुख अपनाते हुए कहा था, “हम वहाँ सिर्फ निष्पक्षता से सवाल पूछ रहे थे। लेकिन सवाल पसंद न आने पर हमला कर दिया गया। अगर देश की राजधानी में ही पत्रकार सुरक्षित नहीं हैं, तो लोकतंत्र का क्या मतलब रह जाता है?”
शांतिपूर्ण आंदोलन के नाम पर हिंसा-उपद्रव
किसी भी लोकतांत्रिक व्यवस्था में विरोध-प्रदर्शन का अधिकार शांतिपूर्ण होना चाहिए, लेकिन कॉकरोच जनता पार्टी के इस प्रदर्शन में हाथों में पत्थर, चेहरे पर नकाब और आक्रामकता देखने को मिली। अगर यह वास्तव में एक वैचारिक प्रदर्शन होता, तो प्रदर्शनकारी अपनी बात शांति से रखते, न कि पत्रकारों पर हमले करते और उन्हें बेइज्जत करते।
Yesterday, police vehicles were vandalized, stones were pelted, and everything possible was done to create anarchy
— Desh_Bhakati🇮🇳 (@Desh_bhakati) July 21, 2026
But it was still failure of the government pic.twitter.com/PnmmW921Bv
इस प्रदर्शन में जो सबसे ज्यादा सेफ साइज में बैठे है वो अभिजीत दीपके, AAP पार्टी के तमाम नेता (जिनका Video हंगामे के बीच हँसता हुआ आया था), विपक्ष, और वामपंथी। क्योंकि इन लोगों ने मासूमों को आगे करके, उनके बीच गुड़ों को भेजकर माहौल को उग्र कर दिया है, जिससे ये साबित हो सके, कि केंद्र में बैठी सरकार लोगों की सुनती नहीं है और मासूम स्टूडेंट्स पर अपने पुलिसकर्मियों से हमला करवाती है।

