दिल्ली के जंतर-मंतर पर हुए कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के प्रदर्शन के बाद अब मामला सिर्फ सड़क तक सीमित नहीं रह गया है। पुलिस की जाँच की दिशा अब सोशल मीडिया तक पहुँच चुकी है। दिल्ली पुलिस को शक है कि प्रदर्शन के दौरान हुई हिंसा की घटनाओं और उससे जुड़े वीडियो-तस्वीरों को लेकर सोशल मीडिया पर एक सुनियोजित अभियान चलाया गया। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, यही वजह है कि पुलिस अब उन सोशल मीडिया अकाउंट्स की भी जांच कर रही है, जिनका संबंध पाकिस्तान से बताया जा रहा है।
दिल्ली पुलिस ने 20 जुलाई 2026 को ‘संसद मार्च’ में हुए हंगामे को लेकर कई FIR भी दर्ज की हैं। वहीं 70 से ज्यादा लोगों को हिरासत में लिया गया है। दिल्ली के पुलिस कमिश्नर अनुराग कुमार के मुताबिक, प्रदर्श में हुई हिंसा में 118 से ज्यादा सुरक्षाकर्मी घायल भी हुए। वहीं पुलिस ने 3000 प्रदर्शनकारियों पर लाठीचार्ज और गिरफ्तारी के दावे का खंडन किया है।
🚨आज हुए उग्र प्रदर्शन के दौरान ड्यूटी पर तैनात दिल्ली पुलिस के विशेष आयुक्त, संयुक्त आयुक्त, अतिरिक्त आयुक्त और उपायुक्त रैंक के अधिकारियों सहित दिल्ली पुलिस और केन्द्रीय पुलिस बलों के कुल 118 पुलिसकर्मियों से अधिक को चोटें आई, @CPDelhi श्री अनुराग कुमार ने अस्पताल जाकर घायल… pic.twitter.com/SGpiONjbd7
— Delhi Police (@DelhiPolice) July 20, 2026
पुलिस ने साफ किया कि प्रदर्शन को पेशेवर तरीके से संभाला गया और सोशल मीडिया पर फैलाई जा रही हर बात सही नहीं है। लोगों से अपील भी की गई कि वे किसी भी अफवाह पर भरोसा न करें और सिर्फ आधिकारिक जानकारी पर ही विश्वास करें।
प्रदर्शन के पीछे ‘टूलकिट’
जाँच एजेंसियाँ अब यह पता लगाने में जुटी हैं कि क्या इन सोशल मीडिया पोस्टों के पीछे कोई संगठित नेटवर्क काम कर रहा था। यह भी देखा जा रहा है कि कहीं पहले से तैयार किसी ‘टूलकिट‘ के जरिए एक जैसी भाषा, तस्वीरें और संदेश अलग-अलग सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर तो नहीं फैलाए गए। अगर ऐसा पाया जाता है तो इसमें शामिल लोगों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जा सकती है।
रिपोर्ट्स के मुताबिक, जाँच का दायरा सिर्फ सोशल मीडिया पोस्ट तक सीमित नहीं रहेगा। पुलिस यह भी पता लगा रही है कि वायरल वीडियो और तस्वीरें किसने सबसे पहले अपलोड कीं, उन्हें किन-किन अकाउंट्स ने तेजी से शेयर किया और क्या इनमें विदेशी सोशल मीडिया नेटवर्क की कोई भूमिका थी। डिजिटल फॉरेंसिक टीम भी इस पूरे मामले की जाँच में जुटी हुई है।
इस बीच पुलिस ने दोहराया कि नई दिल्ली जिले में भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 163 के तहत पहले से प्रतिबंधात्मक आदेश लागू हैं। संसद का मानसून सत्र चलने की वजह से इलाके में सुरक्षा व्यवस्था पहले से ही कड़ी थी। थी। पुलिस का कहना है कि प्रदर्शन के दौरान जब कुछ लोग संसद की ओर बढ़ने लगे तो उन्हें रोकने के लिए जरूरी कदम उठाए गए, लेकिन सोशल मीडिया पर जिस तरह की हिंसा और बड़े पैमाने पर कार्रवाई के दावे किए गए, वे सही नहीं हैं।
विदेशी सोशल मीडिया अकाउंट्स ने फैलाई भ्रामक जानकारी
अधिकारियों ने बताया कि सोशल मीडिया पर कई संदिग्ध हैंडल्स के जरिए भ्रामक जानकारी फैलाई गई, जिनमें कुछ अकाउंट्स पाकिस्तान से संचालित हो रहे थे। इनमें झूठा दावा किया गया था कि हिंसा के दौरान सात प्रदर्शनकारियों की मौत हो गई, 391 घायल हुए और 250 लोगों को गिरफ्तार किया गया।
दिल्ली पुलिस की जाँच में अगर यह साबित होता है कि विदेशी सोशल मीडिया अकाउंट्स ने जानबूझकर गलत जानकारी फैलाकर माहौल बिगाड़ने की कोशिश की, तो संबंधित कानूनी प्रावधानों के तहत कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल पुलिस सोशल मीडिया डेटा, वायरल पोस्ट, वीडियो, डिजिटल गतिविधियों और संदिग्ध अकाउंट्स की कड़ियां जोड़कर पूरे मामले की तह तक पहुंचने की कोशिश कर रही है।
प्रदर्शन के बाद सोशल मीडिया पर बड़ी संख्या में ऐसे पोस्ट सामने आए जिनमें दावा किया गया कि पुलिस ने प्रदर्शनकारियों पर बर्बर कार्रवाई की, भारी लाठीचार्ज किया और बड़ी संख्या में लोगों को हिरासत में लिया। लेकिन शुरुआती जाँच में पुलिस को कई पोस्ट संदिग्ध लगे। जाँच में यह भी सामने आया कि कुछ पोस्ट पाकिस्तान से संचालित सोशल मीडिया हैंडल्स से शेयर किए गए या फिर उन्हें वहाँ से बढ़ावा दिया गया। इसी वजह से इन हैंडल्स की भूमिका की गहराई से जाँच की जा रही है।

