तमिलनाडु की सत्तारूढ़ पार्टी DMK ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर चुनाव आयोग की ओर से राज्य में कराए जा रहे मतदाता सूची के विशेष पुनरीक्षण (SIR) को रद्द करने की माँग की है। पार्टी का कहना है कि यह प्रक्रिया असंवैधानिक, मनमानी और लोकतांत्रिक अधिकारों का उल्लंघन करती है।
DMK की इस याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने 11 नवंबर 2025 को सुनवाई करने का फैसला किया है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, मुख्य जज बी आर गवई और जस्टिस के विनोद चंद्रन की पीठ के सामने DMK की ओर से वकील विवेक सिंह ने याचिका पर तत्काल सुनवाई की माँग की थी। इस पर मुख्य जज ने कहा, “इसे मंगलवार को सूचीबद्ध करें।”
DMK के संगठन सचिव आर एस भारती ने 3 नवंबर 2025 को सुप्रीम कोर्ट में यह याचिका दायर की थी। इसमें चुनाव आयोग के 27 अक्टूबर 2025 के आदेश को चुनौती दी गई है, जिसके तहत राज्य में मतदाता सूची का विशेष पुनरीक्षण किया जा रहा है।
याचिका में कहा गया है कि यह कदम संविधान के अनुच्छेद 14, 19 और 21 यानी समानता, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और जीवन के अधिकार के साथ-साथ जन प्रतिनिधित्व अधिनियम (Representation of People Act) और 1960 के मतदाता पंजीकरण नियमों का उल्लंघन करता है।
DMK ने कोर्ट से आग्रह किया है कि वह चुनाव आयोग के इस आदेश को रद्द करे और तमिलनाडु में इस विशेष पुनरीक्षण प्रक्रिया को रोकने के निर्देश दे।

