राम मंदिर चंदा चोरी मामले में SC में सुनवाई, नई SIT से माँगी स्टेटस रिपोर्ट: तेजी से जाँच पूरी करने के दिए निर्देश

अयोध्या राम मंदिर में दान के पैसों में गड़बड़ी और चोरी मामले में सोमवार (27 जुलाई 2027) को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई। मुख्य न्यायाधीश (Chief Justice) सूर्या कांत, जस्टिस जोयमाल्या बागची और जस्टिस वी मोहना की पीठ ने मामले पर सुनवाई की। अदालत ने उत्तर प्रदेश सरकार की नई विशेष जाँच टीम (Special Investigation Team) को निर्देश दिया है कि वह अपनी जाँच की ताजा स्टेटस रिपोर्ट जल्द कोर्ट के सामने रखे।

बार एंड बेंच की रिपोर्ट के मुताबिक, सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई के दौरान सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने बताया कि राज्य सरकार ने एसआईटी का पुनर्गठन (Reconstitution) कर दिया है। अब इस नई जाँच टीम की अगुवाई पुलिस महानिरीक्षक (IG) किरण एस कर रहे हैं और इसमें कई वरिष्ठ पुलिस अधिकारी शामिल हैं। इसके साथ ही वित्तीय मामलों की सही पड़ताल के लिए फॉरेंसिक ऑडिटर (Forensic Auditor) को भी जाँच टीम में जोड़ा गया है।

याचिकाकर्ताओं के वकील देवदत्त कामत ने कोर्ट को बताया कि देशभर के आम श्रद्धालुओं ने मंदिर के लिए 100 से 500 रुपये तक का चंदा दिया था, लेकिन आरोप है कि यह पैसा ट्रस्ट तक नहीं पहुँचा। उन्होंने माँग की कि पूरी पारदर्शिता (Transparency) के लिए ट्रस्ट द्वारा काटी गई रसीदों को आधिकारिक वेबसाइट पर अपलोड किया जाए ताकि लोग अपने दान की पुष्टि कर सकें।

इस माँग पर CJI सूर्या कांत ने कहा, “पहले एसआईटी को अपनी रिपोर्ट जमा करने दीजिए। पारदर्शिता लाने के लिए जरूरी कदम बाद में उठाए जाएँगे। फिलहाल हमारा मुख्य उद्देश्य इस घटना की निष्पक्ष और तेज जाँच कराना है।” कोर्ट ने कहा कि अगर जाँच में एसआईटी को कोई परेशानी आती है तो अदालत आगे के निर्देश जारी करेगी।

याचिकाओं में मामले की जाँच सीबीआई (CBI) को सौंपने की माँग की गई थी। याचिकाकर्ताओं का कहना था कि पुरानी जाँच टीम के पास ऐसे वित्तीय गबन (Embezzlement) की जाँच के साधन नहीं थे। वहीं राजद सांसद सुधाकर सिंह ने भी सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में जाँच कराने और ट्रस्ट के सभी कागजी व डिजिटल रिकॉर्ड और सीसीटीवी फुटेज सुरक्षित रखने का आग्रह किया था।

सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई के दौरान सभी पक्षों को इस मामले में राजनीति न करने की सलाह दी है। अदालत का मकसद केवल यह सुनिश्चित करना है कि जाँच सही अंजाम तक पहुँचे। अब उत्तर प्रदेश की नई एसआईटी अगली सुनवाई पर अपनी रिपोर्ट पेश करेगी, जिसके बाद कोर्ट आगे का फैसला लेगा।