आदिल मूल रूप से काजीगुंड का रहने वाला है और पहले राजकीय मेडिकल कॉलेज (जीएमसी) अनंतनाग में सीनियर रेजिडेंट डॉक्टर के तौर पर कार्यरत था।
पुलिस जाँच में खुलासा हुआ है कि उसने अस्पताल में आतंकियों के ठिकाने के रूप में इस्तेमाल किया। वह अस्पताल में ही हथियार छिपाता था और आतंकियों को सहयोग देता था। उसकी निशानदेही पर पुलिस ने अस्पताल के लॉकर से एक असॉल्ट राइफल और कई संदिग्ध सामग्री बरामद किए हैं।
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, आदिल घाटी में जैश-ए-मोहम्मद का नेटवर्क दोबारा खड़ा करने की योजना बना रहा था। वह अपने साथियों के साथ श्रीनगर के नौगाम इलाके में जैश के पोस्टर लगाने में भी शामिल था। इन पोस्टरों के बाद पुलिस ने इलाके की सीसीटीवी फुटेज खंगाली और छह लोगों को हिरासत में लिया।
पूछताछ के दौरान पता चला कि इनमें से एक व्यक्ति डॉक्टर है, जो कोड नामों से अपने नेटवर्क से संपर्क करता था। इस जानकारी के आधार पर स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप (SOG) ने उत्तर प्रदेश के सहारनपुर में छापा मारकर आदिल को गिरफ्तार किया। वह कुछ महीनों से अंबाला रोड स्थित एक निजी अस्पताल में नौकरी कर रहा था।
अब तक इस केस में कुल आठ लोगों की गिरफ्तारी हो चुकी है, वहीं पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि आदिल के संपर्क में और कौन लोग थे तथा जैश के पुनर्गठन की साजिश में उनकी भूमिका क्या थी।

