उत्तर प्रदेश के नोएडा एक्सप्रेसवे पुलिस स्टेशन में एक युवती के खिलाफ जंतर-मंतर पर एक प्रदर्शन के दौरान प्रधानमंत्री के खिलाफ आपत्तिजनक टिप्पणी करने के मामले में शिकायत दर्ज कराई गई है। आरोपित के खिलाफ जीरो FIR भी ग्रेटर नोएडा में ही दर्ज कराई गई है।
गाजियाबाद के इंदिरापुरम में रहने वाली सुप्रीम कोर्ट की वकील स्मृति सिंह की शिकायत के आधार पर नोएडा सेक्टर 168 की रहने वाली रुचिका सिंह के खिलाफ BNS 2023 के प्रावधानों के तहत मामला दर्ज किया गया है। पुलिस ने कार्रवाई शुरू कर दी है। बताया जाता है कि रुचिका सिंह ब्यूटी पार्लर चलाती हैं। उसका आपत्तिजनक टिप्पणी करने वाला वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल होने का दावा किया जा रहा है।
A case has been registered at Noida Expressway Police Station against Ruchika Singh following allegations that she made an objectionable remark about the Prime Minister during a demonstration at Jantar Mantar.
— NewsAgnika (@NewsAgnika) July 30, 2026
The FIR was filed on the basis of a complaint submitted by Smriti… pic.twitter.com/y037gjidRm
शिकायत में जानबूझकर विद्वेष फैलाना, सामाजिक तनाव पैदा करने और शांति भंग करने का आरोप है। अभी तक आरोपित रुचिका सिंह को पुलिस ने हिरासत में नहीं लिया है। पुलिस फिलहाल वीडियो फुटेज और दूसरे सबूतों की जाँच कर रही है और इसके बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।
पुलिस रुचिका सिंह की सोशल मीडिया एकाउंट भी खँगाल रही है। मैलोनी का भी इसने वीडियो में जिक्र किया और पीएम मोदी को भद्दी भद्दी गालियाँ दी थी। इसका वीडियो भी वायरल हुआ था।
ये मामला सार्वजनिक जगह पर संवैधानिक पदों पर बैठे व्यक्तियों के लिए अपमानजनक भाषा के इस्तेमाल से जुड़ा हुआ है इसके लिए कानून में आईपीसी की धाराओं के अलावा सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की धाराएँ भी लगाई जा सकती है।
वकील स्मृति सिंह का कहना है कि पीएम का पद राष्ट्र की गरिमा से जुड़ा हुआ है। वे राष्ट्र का प्रतिनिधित्व करते हैं और आपत्तिजनक बयान देकर गरिमा को ठेस पहुँचाया गया है। इससे जनभावनाएँ आहत हुई हैं।
आपको बता दें कि जंतर मंतर पर छात्रों के प्रदर्शन के दौरान कई लोगों ने प्रधानमंत्री मोदी के खिलाफ आपत्तिजनक शब्दों का प्रयोग किया। इतना ही नहीं बैनर और पोस्टर पर भी आपत्तियाँ जताई गई।
एफआईआर पर कॉकरोच जनता पार्टी के प्रवक्ता सौरभ दास ने आपत्ति जताई है। उन्होने इसे वादाखिलाफी माना है और केन्द्र से पूछा है कि जब एफआईआर दर्ज नहीं करने की बात हुई थी तो क्यों किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि अगर कोई अपमाजनक भाषा का इस्तेमाल करता है तो उसपर सिविल मानहानि का केस हो सकता है लेकिन प्रदर्शनकारियों पर आपराधिक मामला दर्ज करना बेहद गलत है।

