राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के सरसंघचालक मोहन भागवत ने शनिवार (29 नवंबर 2025) को नागपुर में आयोजित राष्ट्रीय पुस्तक महोत्सव में कहा कि भारत की एकता कोई नई या ब्रिटिश शासन के बाद उभरी अवधारणा नहीं है बल्कि यह हमारी हजारों वर्षों पुरानी सांस्कृतिक पहचान का हिस्सा है।
उन्होंने महात्मा गाँधी की पुस्तक हिंद स्वराज का उल्लेख करते हुए कहा, “हिंद स्वराज्य में गाँधी ने कहा है कि अंग्रेज आने के पहले हम एकजुट नहीं थे। यह अंग्रेजों द्वारा हमको पढ़ाई गई उल्टी पट्टी है।” RSS प्रमुख के अनुसार, यह धारणा अंग्रेजों ने जानबूझकर भारतीयों के मन में बैठाई थी ताकि हम हमारी सांस्कृतिक जड़ों से अलग हो जाए।
भारतीय राष्ट्र की समझ अलग
भागवत ने कहा कि भारतीय ‘राष्ट्र’ की अवधारणा पश्चिमी मान्यताओं से बिल्कुल अलग है। पश्चिमी राष्ट्रवाद संघर्षों, युद्धों, सीमाओं और राजनीतिक संरचनाओं से परिभाषित हुआ जबकि भारत की पहचान संस्कृति, पारस्परिक सद्भाव और आध्यात्मिक एकता पर आधारित रही है।
उन्होंने यह भी कहा कि भारत में विविधता के बावजूद भाईचारे और सामूहिक अस्तित्व की भावना रही है। धर्म, भाषा, भोजन, क्षेत्र और परंपराओं की भिन्नता ने कभी भारतीयों को विभाजित नहीं किया, क्योंकि सभी स्वयं को भारत माता की संतान मानते आए हैं।
राष्ट्रवाद नहीं, राष्ट्रीयता: मोहन भागवत
भागवत ने कहा कि कुछ देशों में राष्ट्रवाद अत्यधिक अहंकार और वर्चस्व की मानसिकता के कारण विश्व युद्धों का कारण बना, इसलिए भारत ‘राष्ट्रवाद’ की जगह राष्ट्रीयता (Nationality) शब्द को प्राथमिकता देता है।
अपने संबोधन में उन्होंने युवाओं और लेखकों को यह संदेश दिया कि केवल जानकारी होना पर्याप्त नहीं है, बल्कि ज्ञान का उद्देश्य विवेक, संवेदना और समाज के प्रति जिम्मेदारी की भावना विकसित करना होना चाहिए। उनके अनुसार, जीवन की सच्ची संतुष्टि दूसरों की सहायता करने और समाज के लिए उपयोगी बनने से मिलती है।
‘प्रौद्योगिकी पर नियंत्रण जरूरी’
कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) पर बात करते हुए उन्होंने कहा कि तकनीक के विकास को रोका नहीं जा सकता, लेकिन उपयोगकर्ता को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि तकनीक उसके जीवन और मूल्यों पर नियंत्रण न पाए।
वैश्वीकरण पर अपने विचार रखते हुए उन्होंने कहा कि वर्तमान वैश्वीकरण केवल बाजार और लाभ पर आधारित है, जबकि असली वैश्वीकरण वह होगा जिसमें दुनिया को एक परिवार की तरह देखा जाए, जैसा कि भारतीय विचार वसुधैव कुटुंबकम में निहित है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि ऐसा वास्तविक वैश्वीकरण दुनिया में भारत ही लेकर आएगा।

