‘150 साल तक मिठाई दी, फिर भी उन्होंने हमला किया’: गुजरात के बहियाल में हिंदुओं ने नए साल पर मुस्लिमों के साथ टोपरू-साकर परंपरा की बंद

गुजरात के गाँधीनगर के बहियाल गाँव में आजादी से पहले से ही टोपरू-साकर की परंपरा रही है। इस दौरान नववर्ष के पहले दिन हिंदू मुस्लिमों से मिलते थे और भाईचारे के नाम पर एक-दूसरे को चीनी और टोपरू खिलाते थे। हिंदू समुदाय के लोग टोपरू लाते थे और मुस्लिम चीनी लाते थे।

बहियाल गाँव की यह परंपरा लगभग 150 सालों से चली आ रही थी। लेकिन हाल ही में नवरात्रि के दौरान बहियाल में गरबा कर रहे हिंदुओं पर इस्लामी कट्टरपंथियों ने पथराव किया। चुन-चुनकर हिंदुओं की दुकानों और मंदिरों को भी निशाना बनाया गया। इसके बाद ही हिंदू समुदाय ने एकजुट होकर नए साल पर इस परंपरा को पूरी तरह से बंद करने का फैसला लिया।

नए साल से पहले हिंदू समुदाय ने बैठक में यह फैसला लिया है। एक हिंदू नेता ने बताया कि नए साल में सभी हिंदू रामजी मंदिर में इकट्ठा होते हैं और गाँव की छोटी-बड़ी समस्याओं का समाधान करते हैं। उस दिन रामजी मंदिर में अन्नकूट का प्रसाद चढ़ाया जाता है और हिंदू नेता उसमें से टोपरा प्रसाद लेकर मुस्लिम इलाके में जाते हैं, जहाँ मुस्लिम नेता चीनी लेकर आते हैं।

हिंदू नेता ने आगे बताया कि इस त्योहार पर हर हिंदू और मुस्लिम एकत्रित होकर टोपरू और चीनी इकट्ठा करते हैं और प्रसाद ग्रहण करते हैं। उन्होंने कहा, “नवरात्रि पर हुए हमले के चलते हिंदू समुदाय ने यह फैसला लिया है कि 150 साल पुरानी इस परंपरा को अब से बंद किया जाएगा।” उन्होंने यह भी कहा कि 150 सालों से मिठाई परोसी जाती रही है। इसके बावजूद मुस्लिमों ने हमला किया। हिंदू समुदाय का कहना है कि यह एकतरफा है।