बलोच नेशनल मूवमेंट के नेता हकीम बलोच ने पाकिस्तानी फौजी प्रमुख आसिम मुनीर और शहबाज शरीफ सरकार को कड़ी चुनौती दी है। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान बलोचिस्तान के खनिजों की दुनिया के सामने प्रदर्शनी तो लगा सकता है, लेकिन बलोच स्वतंत्रता सेनानियों की इजाजत के बिना वहाँ से एक पत्थर भी बाहर नहीं निकल सकता। उनका इशारा उस घटना की ओर था जब आसिम मुनीर और शहबाज शरीफ ब्रीफकेस में रेयर अर्थ मिनरल्स भरकर अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप को दिखा रहे थे।
न्यूज 18 पर छपे एक्सक्लूसिव इंटरव्यू में हकीम बलोच ने कहा, “पाकिस्तानी हुक्मरान और फौज बलोचिस्तान से ब्रीफकेस भर-भरकर अमेरिका ले जा सकते हैं, वहाँ ट्रंप के सामने इन खनिजों की नुमाइश कर सकते हैं और निवेश के नाम पर पैसे बटोर सकते हैं। लेकिन क्या आप वाकई इन मिनरल्स को जमीन से निकाल कर ले जा पाएंगे? बलोचिस्तान में हो रहे जुल्मों के खिलाफ बलोच कौम लड़ रही है और हम आपको अपनी जमीन को लूटने की इजाजत हरगिज नहीं देंगे।”
हकीम ने ‘ऑपरेशन हेरोफ-2‘ का जिक्र करते हुए दावा किया कि बलोच स्वतंत्रता सेनानियों ने पाकिस्तानी फौजी, अर्धसैनिक बलों और पुलिस के 220 जवानों को मार गिराया है। हालाँकि बलोच लिबरेशन आर्मी के 27 स्वतंत्रता सेनानी भी शहीद हुए, जिनमें मजीद ब्रिगेड के 14 फिदायीन शामिल हैं।
हकीम बलोच ने कहा कि नुश्की शहर और वहाँ का सैन्य कैंप अभी भी स्वतंत्रता सेनानियों के कब्जे में है। पंजगुर, पसनी और ग्वादर में भी पाकिस्तानी फौजी और बलोच राष्ट्रवादी लड़ाकों के बीच लड़ाई जारी है।
अंतरराष्ट्रीय समुदाय को संदेश देते हुए उन्होंने कहा कि हमले तब तेज होते हैं जब जुल्म की इंतहा हो जाती है। पाकिस्तान इसे छोटा सुरक्षा मुद्दा बताकर दुनिया को गुमराह करता है, लेकिन हकीकत यह है कि बलोच अब पाकिस्तान के साथ नहीं रहना चाहते। मैसेज साफ है- बलूचिस्तान खाली करो।
महिला स्वतंत्रता सेनानियों हवा बलोच और असीफा मेंगल की भूमिका पर हकीम बलोच ने कहा कि पाकिस्तानी फौज ने बलोचिस्तान को नर्क बना दिया है, इसलिए अब महिलाएँ भी फ्रंटलाइन पर लड़ने को मजबूर हैं। उन्होंने चेतावनी दी कि जब घर की महिलाएँ हथियार उठा लें, तो समझ जाना चाहिए कि हालात कितने गंभीर हैं। संदेश स्पष्ट है- बलोचिस्तान अपनी आजादी की अंतिम लड़ाई लड़ रहा है और पाकिस्तानी फौज को यहां से जाना होगा।

