‘कश्मीर का कोई कब्रिस्तान ऐसा नहीं, जहाँ पाकिस्तानी आतंकी दफन न हो’: हिजबुल कमांडर ने कैमरे पर उगला सच, दुनिया के सामने उतरी PAK की इज्जत

पाकिस्तान लंबे समय से अंतरराष्ट्रीय मंचों पर यह दावा करता रहा है कि जम्मू-कश्मीर में सक्रिय आतंकवाद से उसका कोई संबंध नहीं है। हालाँकि अब पाकिस्तान के ही आतंकी संगठन हिजबुल मुजाहिदीन का एक शीर्ष कमांडर के बयान ने इस दावे की पोल खोल दी है।

हिजबुल मुजाहिदीन का डिप्टी चीफ शमशीर खान ने पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) के मुजफ्फराबाद में आयोजित एक सार्वजनिक कार्यक्रम के दौरान स्वीकार किया कि पाकिस्तान से आए आतंकी वर्षों से कश्मीर में सक्रिय रहे हैं और वहाँ मारे जाने के बाद दफन भी किए गए।

कैमरे पर कबूला आतंकिस्तान का सच

सोशल मीडिया पर सामने आए एक वीडियो में हिजबुल मुजाहिदीन का कमांडर शमशीर खान ने सार्वजनिक मंच से ऐसा बयान दिया, जिसे पाकिस्तान के सीमापार आतंकवाद को लेकर अब तक के सबसे बड़े कबूलनामों में माना जा रहा है।

पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) के मुजफ्फराबाद में जमात-ए-इस्लामी के एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए उसने कहा कि कश्मीर का कोई कब्रिस्तान ऐसा नहीं है, जहाँ पाकिस्तान के आतंकियों की कब्र न हो। उसने कहा, “लोलाब, कुपवाड़ा से लेकर कठुआ तक कश्मीर में ऐसा कोई कब्रिस्तान नहीं है, जहाँ कोई पाकिस्तानी आतंकी दफन न हो।”

उसका यह वीडियो 8 जुलाई 2026 का बताया जा रहा है। इस बयान से साफ संकेत मिलता है कि पाकिस्तान के अलग-अलग हिस्सों से आए आतंकी वर्षों तक जम्मू-कश्मीर में सक्रिय रहे और सुरक्षाबलों के साथ मुठभेड़ों में मारे जाने के बाद वहीं दफनाए गए।

भारत लंबे समय से अंतरराष्ट्रीय मंचों पर पाकिस्तान के आतंकवाद को बढ़ावा देने की सच्चाई सामने लाता रहा है और समय-समय पर इसके सबूत भी पेश किए हैं। ऐसे में शमशीर खान का यह बयान भारत के रुख को और मजबूत करता है।

PoK में भी बढ़ रहा विरोध, प्रदर्शनकारियों पर लगाए भारत समर्थक होने के आरोप

शमशीर खान का यह बयान उस समय आया है, जब पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) में लोग पाकिस्तानी सरकार और फौज के खिलाफ लगातार प्रदर्शन कर रहे हैं। ‘जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी’ (JAAC) के नेतृत्व में चल रहे इन विरोध प्रदर्शनों में लोग अपने अधिकारों और स्थानीय समस्याओं को लेकर आवाज उठा रहे हैं।

अपने भाषण के दौरान शमशीर ने JAAC पर भी हमला बोला और संगठन पर पाकिस्तान के साथ गद्दारी करने तथा भारत के हित में काम करने जैसे आरोप लगाए। गौरतलब है कि पाकिस्तान के अवैध कब्जे वाले कश्मीर (PoK) में इस समय हालात बेहद तनावपूर्ण बने हुए हैं।

बढ़ती महँगाई, आटे की कमी, बिजली के भारी-भरकम बिलों और बुनियादी अधिकारों के हनन को लेकर स्थानीय आवाम ने पाकिस्तानी हुकूमत और वहाँ की क्रूर फौज के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। इन हिंसक प्रदर्शनों और सुरक्षाबलों की सीधी गोलीबारी में सैकड़ों लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि सैकड़ों अन्य गंभीर रूप से घायल हैं।

इस पूरे विरोध प्रदर्शन की अगुवाई कर रहे प्रमुख स्थानीय संगठन JAAC पर पाकिस्तानी हुकूमत ने देश विरोधी और हिंसक होने के झूठे आरोप लगाकर उसे बैन कर दिया है। सरकार का दावा है कि यह संगठन विदेशी ताकतों के इशारे पर काम कर रहा है, जबकि स्थानीय लोगों का कहना है कि यह बैन सिर्फ उनकी आवाज को दबाने की एक सोची-समझी साजिश है।

क्या है हिजबुल मुजाहिदीन, जिसका डिप्टी चीफ है शमशीर खान?

हिजबुल मुजाहिदीन की स्थापना वर्ष 1989 में हुई थी और यह संगठन लंबे समय से जम्मू-कश्मीर में आतंकवादी गतिविधियों में शामिल रहा है। संगठन का घोषित उद्देश्य जम्मू-कश्मीर को भारत से अलग कर पाकिस्तान में मिलाना है, जिसके लिए उसने वर्षों तक हिंसा और आतंक का रास्ता अपनाया।

इस संगठन ने भारतीय सुरक्षाबलों, सैन्य प्रतिष्ठानों और आम नागरिकों को निशाना बनाकर कई आतंकी हमले किए हैं। हिजबुल का प्रमुख सैयद सलाउद्दीन है और इसका मुख्यालय पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर के मुजफ्फराबाद में स्थित है। भारत के अलावा अमेरिका और यूरोपीय संघ भी हिजबुल मुजाहिदीन को प्रतिबंधित विदेशी आतंकी संगठन घोषित कर चुके हैं।

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