PoK में प्रदर्शनों को बेदर्दी से कुचल रही पाकिस्तानी फौज, 120+ की मौत, सैकड़ों घायल: जानिए क्यों इस्लामाबाद की हुकूमत के खिलाफ खड़ी हुई रावलकोट की आवाम

पाकिस्तान के अवैध कब्जे वाले कश्मीर (PoK) में इस समय हालात बेहद तनावपूर्ण बने हुए हैं। बढ़ती महँगाई, आटे की कमी, बिजली के भारी-भरकम बिलों और बुनियादी अधिकारों के हनन को लेकर स्थानीय आवाम ने पाकिस्तानी हुकूमत और वहाँ की क्रूर फौज के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है।

सूत्रों और मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, पिछले कुछ समय से जारी इन हिंसक प्रदर्शनों और सुरक्षाबलों की सीधी गोलीबारी में अब तक 120+ लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि सैकड़ों अन्य गंभीर रूप से घायल हैं। शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे नागरिकों पर आँसू गैस के गोले छोड़े गए और लाठियाँ बरसाई गईं, जिसके जवाब में प्रदर्शनकारियों ने भी पथराव किया। इस दौरान 4 पाकिस्तानी फौजी भी मारे गए और करीब 25 वर्दीधारी घायल भी हो गए।

हालाँकि विदेशी मीडिया ने 11 लोगों की मौत और 70+ घायलों की पुष्टि की है। यहाँ ये भी बताना अहम है कि पीओके में इंटरनेट बंद है, ऐसे में सही जानकारियों का बाहर आना मुश्किल हो रहा है। वहीं, पाकिस्तानी मीडिया ने पूरी तरह से चुप्पी तान ली है।

लोगों की माँग विधानसभा की उन 12 सीटों को खत्म करने की भी है, जो पीओके से पलायन कर चुके लोगों के लिए रिजर्व्ड है। पीओके के लोगों का आरोप है कि इन सीटों पर पाकिस्तानी फौज और पंजाबी हुकूमत अपने ‘कारिंदों’ को बैठाती है, जिसकी वजह से स्थानीय लोगों के हक पर डाला पड़ रहा है। इस जन-आंदोलन को दबाने के लिए पाकिस्तानी सुरक्षा बल और रेंजर्स लगातार बर्बरता का सहारा ले रहे हैं, जिसके कारण पूरे क्षेत्र में बड़े पैमाने पर हिंसा भड़क उठी है।

पाकिस्तानी फौज और सरकार इस आंदोलन को कुचलने के लिए हर हथकंडा अपना रही है। इंटरनेट सेवाओं को पूरी तरह से ठप कर दिया गया है ताकि वहाँ हो रहे मानवाधिकारों के उल्लंघन की तस्वीरें दुनिया के सामने न आ सकें। जगह-जगह से एक्टिविस्टों और आम नागरिकों को जबरन उठाकर जेलों में ठंसा जा रहा है।

इस पूरे विरोध प्रदर्शन की अगुवाई कर रहे प्रमुख स्थानीय संगठन ‘ज्वॉइंट अवामी एक्शन कमेटी‘ (JAAC) पर पाकिस्तानी हुकूमत ने देश विरोधी और हिंसक होने के झूठे आरोप लगाकर उसे प्रतिबंधित (बैन) कर दिया है। सरकार का दावा है कि यह संगठन विदेशी ताकतों के इशारे पर काम कर रहा है, जबकि स्थानीय लोगों का कहना है कि यह बैन सिर्फ उनकी आवाज को दबाने की एक सोची-समझी साजिश है।

लगातार हो रहे अत्याचारों के बीच अवामी एक्शन कमेटी ने कहा, “पाकिस्तानी फौज हमें आतंकवादी घोषित करके हमारी जायज माँग को कुचलना चाहती है। हमारा यह आंदोलन कोई राजनीतिक एजेंडा नहीं है, बल्कि यह हमारे जिंदा रहने की लड़ाई है। हमें न तो आटा मिल रहा है, न बिजली और हमारे संसाधनों को इस्लामाबाद लूटे जा रहा है। जब तक फौज यहाँ से पीछे नहीं हटती और हमारा हक नहीं मिलता, यह जंग जारी रहेगी।”

PoK में चल रहे पाकिस्तानी फौजी हुकूमत के दमन का इंग्लैंड में भी विरोध हुआ है। इंग्लैंड में पाकिस्तानी उच्चायोग के सामने लोगों ने प्रदर्शन किया है, तो यूके के 50+ सांसदों ने भी पाकिस्तानी हुकूमत को पत्र लिखकर कार्रवाई को तुरंत रोकने और हालात को सामान्य करने की माँग की है।

मानवाधिकार संगठनों ने भी PoK में पाकिस्तानी सेना की इस क्रूर कार्रवाई की कड़े शब्दों में निंदा की है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि पाकिस्तान सरकार ने समय रहते जनता की बुनियादी माँगों को पूरा नहीं किया और बल प्रयोग बंद नहीं किया, तो यह असंतोष एक बड़े गृहयुद्ध का रूप ले सकता है।