नक्सलवाद की साथी है कॉन्ग्रेस, राहुल गाँधी ने कईयों से की मुलाकात: HM अमित शाह, लोकसभा में कहा- 1970 से मार्च 26 तक ये माओवादियों के सबसे बड़े समर्थक

गृह मंत्री अमित शाह ने लोकसभा में सोमवार (30 मार्च 2026) को नक्सलवाद के खात्मे पर चर्चा के दौरान सरकार की उपलब्धियों का विस्तार से ब्योरा दिया। उन्होंने स्पष्ट किया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश 31 मार्च 2026 तक नक्सल मुक्त हो जाएगा। शाह ने कहा कि यह विचारधारा विकास की कमी से नहीं बल्कि विदेशी प्रेरित हिंसक माओवादी सोच से फैली है।

गृहमंत्री अमित शाह ने सदन को याद दिलाया कि पूर्व प्रधानमंत्री डॉक्टर मनमोहन सिंह ने भी स्वीकार किया था कि देश की सबसे बड़ी आंतरिक समस्या हथियारी माओवाद है, लेकिन उस समय कुछ नहीं हुआ। उन्होंने कहा, “मोदी सरकार में कई समस्याओं का निराकरण हुआ। अनुच्छेद 370 और 35ए हट गए। राम मंदिर बन चुका है। कई सारे बड़े काम जो आजादी के समय से देश की जनता चाहती थी कि कभी न कभी हो, वह सारे काम नरेंद्र मोदी के 12 साल में हुए हैं।”

शाह ने जोर देकर कहा कि ये 12 साल देश के लिए बहुत शुभंकर साबित हुए हैं। नक्सल मुक्त भारत भी इसी दौरान हो रहा है। उन्होंने पॉलिटिकल साइंस के विद्यार्थियों का हवाला देते हुए कहा कि नक्सल मूवमेंट के खात्मे को सबसे बड़ा फायदा माना जाएगा। गृह मंत्री ने बस्तर में CAPF, COBRA, छत्तीसगढ़ पुलिस और आदिवासी बाशिंदों की भूमिका की सराहना की। उन्होंने कहा, “अगर उनका सहयोग न होता तो कई रिकॉर्ड है। जब जनता साथ नहीं देती है तो बड़े-बड़े शहंशाह दुम हिलाकर भागे हैं।”

इस दौरान शाह ने नक्सलवाद के शिकार हुए हजारों युवाओं और शहीद जवानों को श्रद्धांजलि दी। उन्होंने कहा, “इस समस्या के कारण हजारों युवा मारे गए, जवान बलिदान हो गए, उन सभी को पूरे सदन की ओर से विनम्र श्रद्धांजलि देना चाहता हूँ।” अमित शाह ने माओवाद को विकास से पूरी तरह अलग बताया।

उन्होंने कहा, “यह विचारधारा क्या है माओवाद। हम जब आजाद हुए कहा- सत्यमेव जयते। माओवाद का ध्रुव वाक्य है- सत्ता बंदूक की नली से निकलती है। इनका लोकतंत्र पर कोई विश्वास नहीं।”

शाह ने विपक्षी सदस्यों की टिप्पणियों का जवाब देते हुए कहा कि अन्याय के खिलाफ लड़ने का तरीका संवैधानिक होना चाहिए। उन्होंने भगत सिंह और बिरसा मुंडा से की गई तुलना को खारिज करते हुए कहा, “इन्होंने तिलका मांझी, बिरसा मुंडा को आदर्श नहीं समझा। इन्होंने आदर्श माओ को कहा। इसमें भी ये फॉरेन से आयात करते हैं।” गृह मंत्री ने बस्तर को नक्सलियों द्वारा चुने जाने का कारण भी समझाया। उन्होंने बताया कि देश की आजादी के बाद दूर-दराज के इलाकों तक राज्य की पहुँच कम थी, विकास नहीं पहुँचा था। नक्सलियों ने इसी वैक्यूम का फायदा उठाया।

उन्होंने स्पष्ट किया कि गरीबी के कारण नक्सलवाद नहीं फैला, बल्कि नक्सलवाद के कारण ही इलाकों में गरीबी बनी रही। शाह ने आंकड़े दिए, “नक्सलबाड़ी, बस्तर, सहरसा और यूपी के बलिया की साक्षरता की दर 33 प्रतिशत है। प्रति व्यक्ति आय भी चारों क्षेत्रों में समान थी। नक्सलबाड़ी और बस्तर में नक्सल मूवमेंट पनपा लेकिन सहरसा और बलिया में नहीं क्योंकि वहां जंगल नहीं थे।” उन्होंने जोर दिया कि अन्याय किसी के साथ भी हो सकता है लेकिन हथियार उठाना लोकतांत्रिक तरीका नहीं है।

अमित शाह ने नक्सलवाद की समयरेखा भी बताई। 1969 में नक्सलबाड़ी से शुरू हुए आंदोलन का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि 2004 में CPI माओवादी का गठन हुआ। उन्होंने कॉन्ग्रेस शासन के दौरान माओवादियों को समर्थन दिए जाने का आरोप लगाया। शाह ने कहा, “92 प्रतिशत हथियार पुलिस के लूटे हुए हैं। थाने लूटे गए, गोलियाँ लूट ली गईं।” उन्होंने वामपंथी विचारधारा पर प्रहार करते हुए कहा कि यह केवल रक्तपात और वैक्यूम पैदा करने का काम करती है।

गृह मंत्री ने नक्सलियों द्वारा चलाई गई समानांतर सरकार का जिक्र किया। उन्होंने बताया कि बस्तर में नक्सलियों के अपने गृह मंत्री और आपूर्ति मंत्री थे। वार्षिक वसूली 240 करोड़ रुपए थी। शाह ने कहा, “जो हथियार डाल देता है उसी से चर्चा होती है। हमारी सरकार की पॉलिसी है।” उन्होंने छत्तीसगढ़, झारखंड, बिहार समेत कई राज्यों में नक्सलियों द्वारा किए गए हमलों का उदाहरण दिया।

अंत में अमित शाह ने फिर से 31 मार्च 2026 की डेडलाइन दोहराई। उन्होंने कहा, “मैं कहता हूँ कि नक्सलवाद मूल कहाँ से आया। हमारे देश में किसी भी तरह से ऐसी स्थिति नहीं थी जहां ऐसी विचारधारा पनप पाए।” शाह ने रूस और चीन से कम्युनिस्ट पार्टी के उदय का इतिहास भी बताया और कहा कि भारत में यह विदेशी प्रेरणा से आई। उन्होंने सभी को संवैधानिक रास्ते से लड़ने की अपील की।

अमित शाह ने यूपीए सरकार के समय एनएसी का जिक्र करते हुए कहा कि इसकी एक फोरम बनाई गई। हर्ष मंदर की अध्यक्षता वाले फोरम में एक शीर्ष नक्सली की पत्नी भी सदस्य थी। प्रधानमंत्री रूरल फेलोशिप का एक फेलो महेश राउत महाराष्ट्र में नक्सलियों के साथ संबंध के केस में पकड़ा गया। इसे छुड़ाने के लिए जयराम रमेश ने कॉन्ग्रेस के मुख्यमंत्री को पत्र लिखा। 76 जवान मारे गए थे और छत्तीसगढ़ में पी चिदंबरम जश्न में थे। पी चिदंबरम ने कहा कि हम तो आपसे हथियार छोड़ने को कहेंगे नहीं, आप हथियारबंद आजादी की लड़ाई में विश्वास करते हो।”

गृहमंत्री अमित शाह ने कहा, “राहुल गाँधी कई बार नक्सलियों और इनके समर्थकों के साथ देखे गए। हिडमा जब मारा गया, कितने हिडमा मारोगे के नारे लगे। राहुल गाँधी ने इस वीडियो को खुद शेयर किया। भारत जोड़ो यात्रा के दौरान भी राहुल गाँधी नक्सल संगठनों से जुड़े लोगों के साथ देखे गए। कॉन्ग्रेस की नक्सल समर्थक विचारधारा इसकी जिम्मेदार है। यह बात यहाँ से रुकेगी नहीं, यह बात चुनाव तक जाएगी और इसका जवाब उनको देना पड़ेगा।

सदन में चर्चा के दौरान जब विपक्ष ने टोका तो शाह ने कड़े तेवर दिखाते हुए कहा, “मुझे उकसाओ मत, मैं आज तय करके आया हूँ और पूरी बात बताकर ही जाऊँगा।” लोकसभा में गृहमंत्री अमित शाह ने सुरक्षा बलों, पुलिस और आदिवासियों की बहादुरी को सलाम किया और कहा कि अब नक्सलवाद के दिन लद गए है।