दिल्ली में भारत-अरब देशों के विदेश मंत्रियों की ऐतिहासिक बैठक, 22 देश हो रहे शामिल: PM मोदी से भी करेंगे मुलाकात

भारत आज कूटनीतिक मंच पर एक अहम कदम उठाने जा रहा है। नई दिल्ली के भारत मंडपम में भारत-अरब विदेश मंत्रियों की दूसरी बैठक (India-Arab Foreign Ministers’ Meeting) आयोजित हो रही है। यह बैठक इसलिए भी खास मानी जा रही है क्योंकि करीब 10 साल बाद भारत और अरब लीग के देश इस उच्च स्तर पर फिर से एक साथ बैठकर रणनीतिक साझेदारी पर चर्चा कर रहे हैं।

इससे पहले ऐसी पहली बैठक वर्ष 2016 में बहरीन में हुई थी, जबकि भारत में यह आयोजन पहली बार हो रहा है। इस सम्मेलन में पश्चिम एशिया और उत्तरी अफ्रीका के 22 अरब देशों के प्रतिनिधि हिस्सा ले रहे हैं। भारत और संयुक्त अरब अमीरात (UAE) इस बैठक की सह-अध्यक्षता कर रहे हैं।

बैठक की शुरुआत शनिवार (31 जनवरी 2026) की शाम 4 बजे होगी और इससे पहले विदेशी प्रतिनिधि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात भी करेंगे।

10 साल बाद दिल्ली में ऐतिहासिक बैठक, भारत पहली बार मेजबान

India-Arab FMM भारत और अरब देशों के बीच सबसे उच्च स्तरीय संस्थागत मंच माना जाता है। भारत और अरब लीग के बीच संवाद की औपचारिक शुरुआत 2002 में एक समझौता ज्ञापन (MoU) के जरिए हुई थी। इसके बाद 2008 में अरब-इंडिया को-ऑपरेशन फोरम की स्थापना की गई।

भारत अरब लीग में एक ऑब्जर्वर देश के रूप में भी शामिल है, जिसमें कुल 22 सदस्य देश आते हैं। ऐसे में यह बैठक दोनों पक्षों के रिश्तों को नई दिशा देने वाला अवसर बन रही है।

6 देशों के विदेश मंत्री समेत कई वरिष्ठ नेता बैठक में शामिल

इस सम्मेलन में अरब दुनिया के कई प्रमुख देशों की मजबूत भागीदारी देखने को मिल रही है। फिलिस्तीन, कोमोरोस, सूडान, सोमालिया, लीबिया और ओमान सहित 6 देशों के विदेश मंत्री दिल्ली पहुँचकर बैठक में हिस्सा ले रहे हैं। वहीं मिस्र, यमन, कतर, UAE और सऊदी अरब की ओर से उप-विदेश मंत्री या राज्य मंत्री स्तर के प्रतिनिधि शामिल हो रहे हैं।

इसके अलावा जिबूती, अल्जीरिया, जॉर्डन, कुवैत, बहरीन, लेबनान, सीरिया, मॉरिटानिया और इराक जैसे देशों से वरिष्ठ अधिकारी आधिकारिक प्रतिनिधिमंडल के तौर पर भाग ले रहे हैं। यह व्यापक भागीदारी इस मंच की अहमियत को और मजबूत करती है।

व्यापार, ऊर्जा और क्षेत्रीय सुरक्षा पर रणनीतिक साझेदारी होगी मजबूत

पहली बैठक में सहयोग के पाँच प्रमुख क्षेत्र अर्थव्यवस्था, ऊर्जा, शिक्षा, मीडिया और संस्कृति तय किए गए थे। वहीं अब दूसरी बैठक में इन क्षेत्रों में सहयोग को और आगे बढ़ाने पर जोर रहेगा। आज की चर्चा में खासतौर पर व्यापार, निवेश, एनर्जी सेक्टर और क्षेत्रीय सुरक्षा जैसे मुद्दे केंद्र में रहेंगे।

इसके साथ ही वैश्विक चुनौतियों और अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भारत-अरब सहयोग को मजबूत करने की संभावनाओं पर भी बातचीत होने की उम्मीद है। विशेषज्ञों के अनुसार, यह बैठक भारत की वेस्ट एशिया नीति के लिए एक बड़ा गेम चेंजर साबित हो सकती है और भारत-अरब संबंधों को नई ऊँचाई दे सकती है।