ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई की हत्या के पीछे इजरायल की सालों लंबी और बेहद सटीक जासूसी का हाथ था। एक ताजा रिपोर्ट के मुताबिक, इजरायली खुफिया एजेंसी मोसाद ने तेहरान के ट्रैफिक कैमरा नेटवर्क को हैक कर लिया था और मोबाइल फोन सिस्टम में सेंध लगा दी थी।
इससे इजरायल को खामेनेई के हर मूवमेंट, उनके बॉडीगार्ड्स की लोकेशन और उनके सुरक्षित ठिकानों की पल-पल की जानकारी तेल अवीव में बैठे-बैठे मिल रही थी।
दिन के उजाले में ‘सरप्राइज’ अटैक
फाइनेंशियल टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, इजरायल ने तेहरान की सड़कों पर लगे लगभग हर कैमरे का डेटा इनक्रिप्ट कर अपने सर्वर पर ले लिया था। इसी डेटा की मदद से इजरायल को पता चला कि शनिवार सुबह खामेनेई अपने करीब 40 टॉप सैन्य और राजनीतिक अधिकारियों के साथ एक मीटिंग कर रहे हैं।
हमले की योजना पहले रात की थी, लेकिन ‘सरप्राइज’ देने के लिए इसे सुबह 6 बजे अंजाम दिया गया। इजरायली फाइटर जेट्स ने महज 60 सेकंड के भीतर तीन सटीक निशाने साधकर पूरे कंपाउंड को उड़ा दिया।
अमेरिका और इजरायल का साझा ऑपरेशन
इस ऑपरेशन में अमेरिकी इंटेलिजेंस ने भी अहम भूमिका निभाई। जमीन पर मौजूद एक जासूस से सिग्नल मिलते ही अमेरिका और इजरायल ने यह कोऑर्डिनेटेड हमला शुरू किया। यह खुलासा भी हुआ है कि मोसाद ने इससे पहले हिजबुल्लाह के खिलाफ ‘पेजर अटैक’ के लिए फर्जी यूट्यूब विज्ञापनों और शेल कंपनियों का इस्तेमाल किया था। ईरान की सुरक्षा में सेंध इतनी गहरी थी कि टॉप लेवल के कमांडो की गतिविधियों से लेकर उनके निजी वाहनों की पार्किंग तक की जानकारी इजरायल के पास थी।

