खामेनेई के लिए सड़कों पर उतरे कट्टरपंथियों ने J&K में किया पथराव: पुलिस ने चेताया- दंगा नहीं करेंगे बर्दाश्त, मीडिया से भी कहा- भ्रम न फैलाएँ

ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की अमेरिका-इजरायली हवाई हमले में मौत के बाद जम्मू-कश्मीर में तनाव चरम पर है। मंगलवार (3 मार्च) को पूँछ जिले के कई हिस्सों में पूरी तरह बंद (शटडाउन) रखा गया। स्थानीय लोगों ने न केवल अपनी दुकानें और कारोबार बंद रखे, बल्कि सड़कों पर उतरकर अमेरिका और इजरायल के खिलाफ जोरदार नारेबाजी की।

पिछले तीन दिनों से घाटी और जम्मू संभाग के शिया बहुल इलाकों में शोक और विरोध प्रदर्शनों का सिलसिला जारी है, जिसे देखते हुए पुलिस और CRPF को हाई अलर्ट पर रखा गया है। पुलिस ने मीडिया आउटलेट्स से अनुरोध किया है कि कोई भी भ्रामक जानकारी ना फैलाएँ।

बाजार बंद और सड़कों पर विरोध

पूँछ के साथ-साथ राजौरी जिले के बुद्धल और कोटरांका जैसे इलाकों में भी मंगलवार (3 मार्च) को सन्नाटा पसरा रहा। लोग शेख-उल-आलम मस्जिद के बाहर जमा हुए और अमेरिका-इजरायल के संयुक्त सैन्य अभियान की कड़ी निंदा की।

प्रदर्शनकारियों ने इन हमलों को अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन और मुस्लिम जगत के खिलाफ आक्रामकता करार दिया। राजौरी शहर में युवाओं ने ‘ईरान सॉलिडेरिटी मार्च’ निकाला और अमेरिकी व इजरायली नेताओं के पुतले व पोस्टर जलाए

श्रीनगर में सुरक्षा सख्त, आंसू गैस के गोले छोड़े गए

श्रीनगर के लाल चौक पर सुरक्षा लगातार दूसरे दिन भी कड़ी रही। सोमवार (2 मार्च) को जब बड़ी भीड़ विरोध प्रदर्शन के लिए जमा हुई, तो स्थिति को नियंत्रित करने के लिए पुलिस को आंसू गैस के गोलों का इस्तेमाल करना पड़ा।

इससे पहले, शिया समुदाय के लोगों ने श्रीनगर स्थित संयुक्त राष्ट्र सैन्य पर्यवेक्षक समूह (UNMOGIP) के मुख्यालय के बाहर भी प्रदर्शन किया था। लोग हाथों में काले झंडे और खामेनेई की तस्वीरें लेकर चल रहे थे।

वैश्विक शांति के लिए बताया बड़ा खतरा

पीडीपी नेता मोहम्मद फारूक इंकलाबी ने इन प्रदर्शनों को संबोधित करते हुए कहा कि एक संप्रभु राष्ट्र के नेतृत्व को निशाना बनाना वैश्विक शांति के लिए खतरनाक है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की चुप्पी पर भी सवाल उठाए। बता दें कि ईरान ने खामेनेई की मौत पर 40 दिनों के राजकीय शोक की घोषणा की है, जिसका असर कश्मीर के धार्मिक और सामाजिक जीवन पर भी देखा जा रहा है।