मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव का असर हिंद महासागर तक दिखाई देने लगा है। ईरान ने अमेरिका और ब्रिटेन के संयुक्त सैन्य अड्डे डिएगो गार्सिया को निशाना बनाकर मिसाइल हमला करने की कोशिश की है, जिससे क्षेत्रीय सुरक्षा को लेकर नई चिंता पैदा हो गई है। हालाँकि यह हमला अपने लक्ष्य तक नहीं पहुँच सका, लेकिन इस घटनाक्रम ने ईरान की सैन्य क्षमता और उसकी रणनीतिक मंशा को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए हैं।
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, ईरान ने इस हमले में दो इंटरमीडिएट रेंज बैलिस्टिक मिसाइलें दागीं। इनमें से एक मिसाइल उड़ान के दौरान ही तकनीकी खराबी के चलते फेल हो गई। दूसरी मिसाइल को रोकने के लिए अमेरिकी नौसेना के एक युद्धपोत ने SM-3 इंटरसेप्टर का इस्तेमाल किया।
हालाँकि यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि इंटरसेप्शन पूरी तरह सफल रहा या नहीं, लेकिन इतना तय है कि डिएगो गार्सिया स्थित सैन्य अड्डे को किसी तरह का नुकसान नहीं हुआ।
WSJ: "Iran fired two intermediate-range ballistic missiles at Diego Garcia, a joint U.S.-U.K. military base in the middle of the Indian Ocean…Neither of the missiles hit the base, but the move marked a significant attempt by Iran to reach far beyond the Middle East and threaten…
— Steve Lookner (@lookner) March 21, 2026
मिसाइल रेंज को लेकर उठे सवाल
डिएगो गार्सिया ईरान से करीब 3500 से 4000 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। ऐसे में इस हमले की कोशिश ने ईरान की मिसाइल क्षमता को लेकर नई बहस छेड़ दी है। अब तक ईरान यह दावा करता रहा है कि उसने अपनी मिसाइलों की मारक क्षमता को 2000 किलोमीटर तक सीमित रखा है।
हालाँकि इस घटना से संकेत मिलते हैं कि उसके पास इससे अधिक दूरी तक मार करने वाली तकनीक मौजूद हो सकती है। फिलहाल यह स्पष्ट नहीं है कि ईरान ने इस हमले में कौन सी मिसाइलों का इस्तेमाल किया।
क्यों अहम है डिएगो गार्सिया और भारत के लिए क्या मायने?
हिंद महासागर में स्थित डिएगो गार्सिया एक बेहद महत्वपूर्ण सैन्य ठिकाना है, जहाँ से अमेरिका और ब्रिटेन एशिया और पश्चिम एशिया में अपने सैन्य अभियानों को अंजाम देते हैं। यह अड्डा भारत से लगभग 1800 किलोमीटर की दूरी पर है और रणनीतिक रूप से बेहद संवेदनशील माना जाता है।
हिंद महासागर क्षेत्र में इसकी मौजूदगी के कारण इसे भारत के पड़ोस में स्थित एक अहम सैन्य केंद्र के तौर पर देखा जाता है। इस घटनाक्रम से पहले ब्रिटेन ने अमेरिका को अपने सैन्य अड्डों के इस्तेमाल की अनुमति दी थी, ताकि ईरान के उन ठिकानों को निशाना बनाया जा सके जो होर्मुज जलडमरूमध्य में जहाजों पर हमले से जुड़े हैं।
इस फैसले के बाद ईरान ने कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए चेतावनी दी थी। ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अरागची ने कहा था कि यदि ब्रिटेन अमेरिका को अपने ठिकानों का इस्तेमाल करने देता है, तो इससे ब्रिटिश नागरिकों की सुरक्षा खतरे में पड़ सकती है। ताजा हमले की कोशिश को इसी चेतावनी के अमल के तौर पर भी देखा जा रहा है।

