मिडिल ईस्ट में अमेरिका और तेहरान के बीच जारी तनाव के बीच एक अहम घटनाक्रम सामने आया है जो दोनों देशों के रिश्तों में बदलाव का संकेत दे सकता है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, ईरान के नए सर्वोच्च नेता मोजतबा खामेनेई अमेरिका के साथ बातचीत के लिए तैयार हो सकते हैं। यह दावा अल-अरेबिया ने इजरायली मीडिया के हवाले से किया है।
अगर यह रिपोर्ट सही निकलती है तो यह ऐसे समय में एक बड़ा कूटनीतिक अवसर हो सकता है जब दोनों देशों के बीच तनाव काफी ज्यादा है। हालाँकि, तेहरान ने पहले अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के दावों को खारिज करते हुए अमेरिका के साथ किसी भी तरह की बातचीत से साफ इनकार किया था।
इसी बीच ट्रंप ने कहा है कि अमेरिका और ईरान के प्रतिनिधियों के बीच बैकचैनल बातचीत में कई अहम बिंदुओं पर सहमति बनी है। उन्होंने बताया कि बातचीत हुई थी और आगे भी जारी रहने की संभावना है। इससे किसी समझौते की उम्मीद जरूर बनी है लेकिन स्थिति अभी स्पष्ट नहीं है।
ट्रंप ने यह भी बताया कि उनके मिडिल ईस्ट दूत स्टीव विटकॉफ और जेरेड कुशनर भी इन बातचीतों में शामिल रहे। हालाँकि, उन्होंने बातचीत के विषय पर ज्यादा जानकारी नहीं दी। ट्रंप ने यह भी कहा कि ईरान के पास अभी कुछ नेता बचे हैं।
दूसरी ओर, ईरान से बिल्कुल अलग तस्वीर सामने आ रही है। ईरान की सरकारी एजेंसी फार्स न्यूज एजेंसी ने इन दावों को खारिज कर दिया है। एजेंसी ने एक सूत्र के हवाले से कहा कि अमेरिका के साथ किसी भी तरह की सीधी या मिडिल मैन के जरिए बातचीत नहीं हो रही है।
यह विरोधाभास कोई नई बात नहीं है। अमेरिका और ईरान के रिश्तों में अक्सर ऐसा देखा गया है कि पर्दे के पीछे कूटनीति चलती रहती है जबकि सार्वजनिक रूप से दोनों देश अलग-अलग बयान देते हैं। इन खबरों का समय भी काफी महत्वपूर्ण है। मिडिल ईस्ट इस समय तनाव में है जहाँ हालिया सैन्य गतिविधियों और आर्थिक दबावों ने बड़े संघर्ष का खतरा बढ़ा दिया है।
अगर मोजतबा खामेनेई वास्तव में बातचीत के रास्ते पर विचार कर रहे हैं तो यह ईरान की नीति में एक बड़ा बदलाव माना जाएगा खासकर ऐसे समय में जब देश दबाव में है। हालाँकि, ईरान की ओर से आधिकारिक पुष्टि नहीं होने के कारण यह साफ है कि अगर कुछ चल भी रहा है तो उसे बेहद गोपनीय रखने की कोशिश की जा रही है।

