ईरान में दिसंबर 2025 के अंत से जारी राष्ट्रव्यापी विरोध प्रदर्शनों ने अब गंभीर मानवीय संकट का रूप ले लिया है। देश के भीतर डॉक्टरों के एक नेटवर्क द्वारा तैयार रिपोर्ट के अनुसार, सरकार की सख्त कार्रवाई में अब तक कम से कम 16,500 प्रदर्शनकारियों की मौत हो चुकी है, जबकि करीब 3.3 लाख लोग घायल बताए जा रहे हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, मरने वालों में अधिकांश 30 वर्ष से कम उम्र के युवा हैं।
डॉक्टरों की रिपोर्ट और अस्पतालों की भयावह तस्वीर
जमीनी तौर पर काम कर रहे डॉक्टरों और मेडिकल स्टाफ के हवाले से तैयार रिपोर्ट बताती है कि घायलों में बड़ी संख्या गोली लगने, छर्रों से घायल होने और आँखों में गंभीर चोटों की है। जर्मन-ईरानी नेत्र सर्जन प्रोफेसर अमीर परस्ता के अनुसार, सैन्य-ग्रेड हथियारों का इस्तेमाल किया गया, जिससे सिर, गर्दन और सीने में जानलेवा चोटें आईं।
आठ बड़े आँख के हॉस्पिटल्स और 16 इमरजेंसी विभागों के आँकड़ों में हजारों आँखों की चोटें दर्ज हुई हैं। सिर्फ तेहरान के एक प्रमुख आई हॉस्पिटल में ही लगभग 7,000 आँखों की चोटों के मामले सामने आए, जिनमें 700 से 1,000 लोग स्थायी रुप से एक आँख खो चुके हैं।
कुछ डॉक्टरों ने यह भी दावा किया कि खून की कमी और ब्लड ट्रांसफ्यूजन रोके जाने से कई मरीजों की जान चली गई।
इंटरनेट ब्लैकआउट, डर और दमन
रिपोर्ट में कहा गया है कि जनवरी 2026 की शुरुआत से जारी इंटरनेट ब्लैकआउट ने देश को लगभग दुनिया से काट दिया है। डॉक्टरों ने सैटेलाइट आधारित वैकल्पिक संचार माध्यमों से जानकारी साझा की। चश्मदीदों के अनुसार, सुरक्षा बलों ने प्रदर्शनकारियों पर सीधे गोली चलाई, छतों से स्नाइपर्स तैनात किए गए और भारी हथियारों से फायरिंग हुई।
कई घायल गिरफ्तारी के डर से अस्पताल नहीं पहुँचे, जबकि कुछ को इलाज के दौरान ही सुरक्षा बलों द्वारा उठा लिए जाने के आरोप हैं। शवों को सड़कों से हटाकर अन्य शहरों में ले जाने और परिजनों से शव लेने के लिए भारी रकम वसूलने के भी दावे किए गए हैं।
सरकार का रुख और अंतरराष्ट्रीय चिंता
ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई ने पहली बार सार्वजिक रूप से स्वीकार किया है कि अशांति में कई हजार लोग मारे गए हैं, हालाँकि उन्होंने हिंसा के लिए प्रदर्शनकारियों और विदेशी ताकतों को जिम्मेदार ठहराया।
सरकारी दावों के उलट, मानवाधिकार संगठनों का कहना है कि वास्तविक आँकड़े इससे कहीं अधिक हो सकते हैं, क्योंकि डर गोपनीयता और दमन के माहौल में कई मौतें और चोटें दर्ज ही नहीं हो पाईं। अमेरिका स्थित HRANA ने अब तक 3,090 मौतों और 22,000 से अधिक गिरफ्तारियों की पुष्टि की है।

