अयोध्या के राजर्षि दशरथ मेडिकल कॉलेज मामले में जाँच का दायरा अब बलरामपुर तक पहुँच गया है। सरफराज के मकान मालिक ने जी न्यूज से एक्सक्लूजिव बातचीत में बताया कि सरफराज एक भगवा कुर्ता और पीली धोती पहनकर अक्सर अयोध्या जाया करता था, जिस कुर्ते पर ‘जय श्री राम’ लिखा हुआ था।
मकान मालिक के मुताबिक, सरफराज कुछ दोस्तों के साथ अयोध्या जाकर सरयू नदी में स्नान भी कर चुका था, हालाँकि वे दोस्त कौन थे और कहाँ से आए थे, इसकी जानकारी मकान मालिक के पास नहीं है। इस खुलासे के बाद पुलिस अब इस एंगल से भी जाँच कर रही है कि आखिर सरफराज को हिंदू पहनावे के साथ भेष बदलने की जरूरत क्यों पड़ी और कहीं वह अयोध्या में किसी बड़ी साजिश के मकसद से तो नहीं गया था?
पुलिस ने सरफराज के कमरे से पीली धोती को जब्त करके अपने साथ ले गई है। इसके अलावा सरफराज के कमरे से एक हाथ से लिखी हुई कविता भी बरामद हुई है, जिसकी अब जाँच की जा रही है।
रिपोर्ट के अनुसार सरफराज पिछले छह महीनों से किराए के मकान में रह रहा था और उसके साथ एक अन्य युवक भी रूममेट के तौर पर रहता था, जो पिछले एक हफ्ते से छुट्टी लेकर अपने घर बस्ती गया हुआ है। पुलिस अब सरफराज के रूममेट और उसके साथ अयोध्या गए दोस्तों की तलाश में छापेमारी कर रही है। इसी सिलसिले में शुक्रवार (31 जुलाई 2026) देर शाम अयोध्या पुलिस की एक टीम बलरामपुर के नगर कोतवाली क्षेत्र स्थित पुरैनिया तालाब में सरफराज के पैतृक घर पहुँची और परिजनों से पूछताछ की।
जब मीडिया टीम मौके पर पहुँची तो घर पर ताला लगा मिला और आसपास के अधिकतर लोग कैमरे पर कुछ भी बोलने से बचते नजर आए। हालाँकि नाम न छापने की शर्त पर एक स्थानीय युवक ने बताया कि सरफराज का व्यवहार मोहल्ले में सामान्य और अच्छा रहा है और उसका कभी किसी से कोई विवाद सामने नहीं आया।
स्थानीय लोगों के मुताबिक सरफराज के परिवार में चार भाई और दो बहनें हैं। सबसे बड़े भाई बलरामपुर में निजी नौकरी करते हैं, दूसरे भाई श्रावस्ती में डेंटल क्लीनिक चलाते हैं और तीसरे भाई सऊदी अरब में नौकरी करते हुए परिवार की आर्थिक जिम्मेदारी संभालते हैं। सरफराज परिवार में सबसे छोटा है और अयोध्या में रहकर पैरामेडिकल की पढ़ाई कर रहा था।
करीब डेढ़ साल पहले उसके अब्बा का निधन हो चुका है, जिसके बाद घर में अम्मी और अविवाहित बहन रहती हैं, जबकि बड़ी बहन की शादी हो चुकी है और वह मुंबई में रहती हैं। पड़ोसियों का कहना है कि पढ़ाई के चलते सरफराज अयोध्या में रहता था लेकिन करीब हर शनिवार बलरामपुर अपने घर आता था और सोमवार को वापस लौट जाता था। बताया गया कि इस बार भी वह तीन-चार दिन पहले घर आया था, उसके बाद ही अयोध्या में यह मामला सामने आया।
क्या है पूरा मामला?
गौरतलब है कि यह पूरा मामला शनिवार (1 अगस्त 2026) की सुबह सामने आया, जब मॉर्निंग शिफ्ट में आए कुछ छात्रों को एक्स-रे रूम में एक संदिग्ध कागज मिला था, जिसमें बम बनाने की पूरी विधि नोट्स के रूप में लिखी हुई थी। छात्रों ने तुरंत कॉलेज प्रशासन को सूचित किया, जिसके बाद कॉलेज प्रशासन ने पुलिस को इसकी जानकारी दी।
दर्शन नगर थाना पुलिस ने सरफराज को हिरासत में लेकर पूछताछ की। साथ ही सरफराज के साथ नाइट शिफ्ट में तैनात दो साथियों में से अभिषेक को भी हिरासत में लिया गया, जबकि सुल्तानपुर निवासी सुभाष शनिवार सुबह ही अपने गाँव के लिए रवाना हो गया था। मामले की जाँच में SOG, STF, स्पेशल ब्रांच और IB की टीमें भी जुटी हैं।
शुरुआती पूछताछ में सरफराज ने बताया कि रात की ड्यूटी के दौरान उसे नींद नहीं आ रही थी, तभी उसने लैपटॉप पर भगत सिंह पर बनी एक फिल्म देखनी शुरू की, जिसमें बम बनाने की तकनीक दिखाई गई थी और उसी को उसने कागज पर नोट कर लिया था। इसके बाद वह सो गया और सुबह सफाईकर्मियों व मॉर्निंग शिफ्ट के कर्मचारियों को यह कागज मिला।
हालाँकि, पुलिस ने सरफराज का मोबाइल खंगाला, जिससे पता लगा कि उसने इंटरनेट पर बम धमाके करने के तरीके खोजे थे और उसके इंस्टाग्राम अकाउंट पर भी बम बनाने और विस्फोट करने संबंधी तमाम रील्स मिली हैं। पुलिस अभी यह पता लगाने में जुटी है कि क्या सरफराज ने ऐसा सिर्फ अपनी रुचि के लिए किया या इसके पीछे कोई और गंभीर वजह थी।

