हिंदुओं के मंदिर, जजों के घर, सरकारी इमारतें… सब पर ‘वक्फ’ ने बताया अधिकार: लिस्ट देखकर राजस्थान HC ने लगाई बोर्ड को फटकार, मूल दस्तावेज दिखाने का दिया निर्देश

राजस्थान के जोधपुर में सरकारी रिकॉर्ड और वक्फ पोर्टल पर संपत्तियों के मालिकाना हक को लेकर एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है। जोधपुर में कई महत्वपूर्ण और सार्वजनिक संपत्तियों को वक्फ संपत्ति के रूप में दर्ज किए जाने की खबरों पर राजस्थान हाई कोर्ट ने स्वतः संज्ञान (सुओ मोटू) लिया है।

राजस्थान हाई कोर्ट ने इस गंभीर मामले को एक जनहित याचिका (PIL) में बदल दिया है और मामले की अगली सुनवाई 11 अगस्त तय की गई है। जस्टिस पुष्पेंद्र सिंह भाटी और जस्टिस प्रवीर भटनागर की बेंच ने इस पूरे घटनाक्रम पर गहरी चिंता जताई है।

किन-किन जगहों और संपत्तियों को वक्फ संपत्ति दिखाया गया है?

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, जोधपुर (ग्रामीण) के खसरा नंबर 482, 485 और 490 समेत कई महत्वपूर्ण जगहों को सरकारी राजस्व रिकॉर्ड के उलट वक्फ गजट और उम्मीद पोर्टल पर वक्फ संपत्ति के रूप में दर्ज दिखाया गया है। इस विवादित सूची में सोहनलाल मणिहार स्कूल, शाह गोवर्धनलाल काबरा कॉलेज, काबरा मातृश्री कला मंदिर, अग्रवाल बगीची, अग्रवाल महावीर मंदिर, सतगुरु कबीर आश्रम, गौरेश्वर महादेव मंदिर, मारू लोहार सिकलीगर मंदिर, जूनागढ़ न्याती बगीची, दो न्याती भवन, गीता भवन और कई अन्य रिहायशी तथा व्यावसायिक संपत्तियाँ शामिल हैं। सबसे हैरानी की बात यह है कि इस सूची में राजस्थान हाई कोर्ट के मौजूदा जज न्यायमूर्ति विनीत कुमार माथुर और झारखंड हाई कोर्ट के पूर्व मुख्य न्यायाधीश प्रकाश तातिया के सरकारी आवास भी शामिल बताए गए हैं।

हाई कोर्ट का अंतरिम आदेश: फिलहाल संपत्तियों पर किसी भी बदलाव पर रोक

कोर्ट ने अपने 27 जुलाई के अंतरिम आदेश में साफ कर दिया है कि विवादित खसरा नंबरों और समाचार रिपोर्ट में शामिल संपत्तियों की मौजूदा कानूनी स्थिति और स्वामित्व में कोई बदलाव नहीं किया जाएगा।

कोर्ट ने रोक लगाते हुए कहा है कि इन संपत्तियों का नामांतरण, ट्रांसफर, पट्टा, लाइसेंस, निर्माण या ध्वस्तीकरण जैसा कोई भी कदम नहीं उठाया जाएगा। इसके साथ ही जोधपुर के जिला कलेक्टर को सभी राजस्व रिकॉर्ड सुरक्षित रखने और जीपीएस तथा फोटोग्राफ के साथ जमीन का भौतिक सत्यापन कराने का आदेश दिया गया है।

वक्फ बोर्ड और प्रशासन को नोटिस, मूल दस्तावेज तलब

हाई कोर्ट ने राजस्थान बोर्ड ऑफ मुस्लिम वक्फ के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) को निर्देश दिया है कि वे उन सभी मूल दस्तावेजों को अदालत के सामने पेश करें, जिनके आधार पर इन संपत्तियों को वक्फ पोर्टल और गजट में शामिल किया गया था।

साथ ही, जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी से उम्मीद पोर्टल पर डेटा एंट्री की पूरी प्रक्रिया का विवरण माँगा गया है। मामले की गंभीरता को देखते हुए केंद्र सरकार, राज्य सरकार और स्थानीय अधिकारियों को भी नोटिस जारी किए गए हैं। अदालत ने सहायता के लिए अधिवक्ता मोती सिंह और अभिषेक मेहता को न्यायमित्र नियुक्त किया है।

अदालत की कड़ी टिप्पणी: कानूनी प्रक्रिया का पालन जरूरी

अदालत ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि राजस्व रिकॉर्ड और डिजिटल डेटाबेस जैसे सार्वजनिक दस्तावेजों का बहुत बड़ा कानूनी महत्व होता है। किसी भी संपत्ति को बिना उचित कानूनी प्रक्रिया और बिना प्रभावित पक्षों को सूचना दिए वक्फ संपत्ति के रूप में दर्ज करना गंभीर चिंता का विषय है।

संविधान के अनुच्छेद 25 का हवाला देते हुए कोर्ट ने कहा कि धर्म की स्वतंत्रता का अधिकार अपनी जगह है, लेकिन केवल किसी धार्मिक दावे के आधार पर किसी संपत्ति का मालिकाना हक नहीं बदला जा सकता। कानून और नियमों का पालन किए बिना किए गए ऐसे बदलाव मनमाने और अस्वीकार्य हैं।