दशकों पुराने कब्जे और लैंड माफिया का जाल
प्रशासनिक अधिकारियों के मुताबिक, इस बेशकीमती सरकारी जमीन पर लैंड माफियाओं ने कब्जा कर रखा था। हालाँकि, वहाँ रहने वाले लोग दावा कर रहे हैं कि वे दशकों से यहाँ बसे हुए हैं, लेकिन सरकार ने साफ कर दिया है कि समय चाहे कितना भी बीत गया हो, सरकारी संपत्ति पर अवैध कब्जा कानूनी रूप से गलत है।
मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने भी इस कार्रवाई का मजबूती से समर्थन किया है। उन्होंने कहा कि शहर के पर्यावरण और सरकारी संसाधनों को बचाने के लिए लैंड माफिया और अवैध बस्तियों के खिलाफ ऐसी कार्रवाई बेहद जरूरी थी।
कार्रवाई पर सियासत और बाहरी विरोध
इस अतिक्रमण हटाओ अभियान ने अब राजनीतिक रंग ले लिया है। जहाँ एक तरफ स्थानीय स्तर पर विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं, वहीं पड़ोसी राज्य केरल के मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन ने भी इस कार्रवाई की आलोचना की है।

आलोचक इसे एक विशेष समुदाय को निशाना बनाना बता रहे हैं, लेकिन कर्नाटक सरकार ने इन आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है। सरकार का स्पष्ट स्टैंड है कि यह कार्रवाई किसी धर्म के खिलाफ नहीं, बल्कि केवल अवैध कब्जों और सरकारी जमीन को कब्जाने वाली मानसिकता के खिलाफ है।

