केरलम् विधानसभा चुनाव 2026 में बीजेपी को तीन सीटों पर जीत मिली है। इस जीत के बाद पार्टी ने अब राज्य में अपनी आगे की राजनीति का पूरा रोडमैप तैयार कर लिया है। बीजेपी ने केरलम् के लिए 13 सूत्रीय राजनीतिक एजेंडा बनाया है, जिसमें खासतौर पर ओबीसी और पिछड़े हिंदू समुदायों के बीच पकड़ मजबूत करने पर जोर दिया गया है।
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, तिरुवनंतमपुरम में बीजेपी की कोर कमेटी की बैठक में इस 13 पॉइंट एजेंडे पर विस्तार से चर्चा हुई। बैठक की अध्यक्षता केरलम् बीजेपी अध्यक्ष राजीव चंद्रशेखर ने की। पार्टी ने तय किया कि अब वह राज्य में सामाजिक और राजनीतिक तौर पर ज्यादा आक्रामक तरीके से काम करेगी। एजेंडे में ओबीसी समुदाय तक पहुँच बढ़ाने, सबरीमाला मुद्दे को उठाने, मंदिरों की संपत्तियों के ऑडिट, शिक्षा संस्थानों में निवेश बढ़ाने और युवाओं को कट्टरपंथ व नशे से दूर रखने जैसे जनता के मुद्दे शामिल किए गए हैं।
The elections are over. The real work begins now.
— Rajeev Chandrasekhar 🇮🇳 (@RajeevRC_X) May 16, 2026
Setting the roadmap for the future at the BJP Core Committee meeting at Mararji Bhavan.#PoliticsOfPerformance #VikasitaKeralam pic.twitter.com/2M8BYZob4L
ओबीसी और आरक्षण पर बीजेपी का फोकस
बीजेपी ने अपने नए एजेंडे में साफ कहा है कि वह धर्म के आधार पर आरक्षण दिए जाने के खिलाफ है। पार्टी का कहना है कि आरक्षण सिर्फ ओबीसी, एससी, एसटी और आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों के लिए होना चाहिए। बीजेपी का आरोप है कि केरलम् में अल्पसंख्यक समुदाय का एक हिस्सा ओबीसी कोटे का फायदा ले रहा है और इसे खत्म किया जाना चाहिए।
राजीव चंद्रशेखर ने कहा कि बीजेपी पिछड़ा वर्ग आरक्षण को धर्म आधारिक आरक्षण में बदलने की किसी भी कोशिश का विरोध करेगी। उन्होंने कहा कि पार्टी की नीति सबके लिए न्याय, किसी का तुष्टिकरण नहीं है। पार्टी ने यह भी कहा कि अगर राज्य सरकार मुस्लिम लीग और जमात ए इस्लामी के दबाव में राजनीति करती है तो बीजेपी उसका विरोध करेगी।
अल्पसंख्यक रणनीति में बदलाव के संकेत
बीजेपी ने चुनाव से पहले केरलम् के चर्च और ईसाई समुदायक के साथ रिश्ते मजबूत करने की कोशिश की थी, लेकिन अब पार्टी ने अपनी रणनीति में बदलाव किया है। पार्टी सूत्रों के मुताबिक, नए 13 पॉइंट एजेंडे में ईसाई समुदाय के लिए किसी खास आउटरीच कार्यक्रम का जिक्र नहीं किया गया है।
बताया जा रहा है कि चर्च नेतृत्व की कॉन्ग्रेस और UDF के साथ बढ़ती नजदीकी की वजह से बीजेपी ने अपनी रणनीति बदली है। इसके अलावा FCRA संशोधन बिल को लेकर चर्च के विरोध ने भी बीजेपी को असहज किया था। हालाँकि, पार्टी ने यह साफ किया कि वह ईसाई समुदाय से दूरी नहीं बना रही है, लेकिन अब संस्थागत स्तर पर रिश्ते मजबूत करने की कोशिश पहले जैसी नहीं होगी।
सबरीमाला से लेकर 20% वोट शेयर तक का प्लान
बीजेपी ने अपने एजेंडे में सबरीमला मुद्दे को भी प्रमुखता दी है। पार्टी ने सबरीमला गोल्ड लूट मामले की सीबीआई जाँच की माँग की है। इसके साथ ही महिलाओं के प्रवेश के विरोध में हुए प्रदर्शनों के दौरान दर्ज मामलों को वापस लेने की मांग भी उठाई गई है। मंदिरों की संपत्तियों और परिसंपत्तियों के ऑडिट की बात भी एजेंडे में शामिल है।
पार्टी का कहना है कि अब केरलम् में LDF और UDF के अलावा तीसरा राजनीतिक विकल्प भी उभर रहा है। बीजेपी ने राज्य में 20 प्रतिशत वोट शेयर हासिल करने का लक्ष्य रखा था, लेकिन विधानसभा चुनाव 2026 में पार्टी को 11.42% वोट ही मिले। हालाँकि पार्टी का मानना है कि तीन सीटों की जीत उसके लिए आगे की राजनीति का बड़ा आधार बनेगी और आने वाले लोकसभा चुनाव तक वह अपनी पकड़ और मजबूत करेगी।

