पिछले साल जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले की साजिश पाकिस्तान से रची गई थी। इस हमले का मास्टरमाइंड लश्कर-ए-तैयबा (LeT) का आतंकी सैफुल्लाह उर्फ साजिद जट्ट उर्फ ‘लंगड़ा’ है। यह सारी बातें NIA ने पहलगाम हमले की चार्जशीट में शामिल की हैं। बता दें कि 22 अप्रैल 2025 को हुए पहलगाम आतंकी हमले को एक साल बीत चुका है। इस हमले में कुल 27 लोगों ने जान गवाईं।
पहलगाम हमले के आतंकियों का हैंडलर साजिद जट्ट
NIA की चार्जशीट के मुताबिक, साजिद जट्ट ने ही पाकिस्तान के लाहौर में बैठकर पहलगाम हमले के आतंकियों परवेज और बशीर अहमद को डायरेक्शन दिए थे। वह इन आतंकियों का हैंडलर था। NIA को आतंकी हमले में शामिल आतंकी फैजल जट्ट उर्फ सुलेमान, हबीब ताहिर उर्फ छोटू और हमजा अफगानी के साजिद जट्ट से संपर्क मिले हैं। NIA को मोबाइल लंबर, IP एड्रेस और अन्य सबूत भी मिले हैं, जिन्हें पाकिस्तान से खरीदा गया था। NIA ने साजिद जट्ट को हमले का मास्टरमाइंड बताया है।
हमले से पहले भी पहलगाम में थे आतंकी
यह भी सामने आया कि ये तीनों आतंकी हमले के एक दिन पहले भी पहलगाम में मौजूद थे, जिन्होंने लोकल निवासी परवेज और बशीर अहमद से संपर्क किया था। दोनों ने गिरफ्तारी के बाद पूछताछ में भी बशीर अहमद ने कबूल किया कि 21 अप्रैल 2026 को तीनों आतंकियों ने उससे संपर्क किया था। इसके बाद बशीर उन्हें एक पेड़ के नीचे रुकवाकर परवेज की झोपड़ी तक ले गया और परिवार को किसी से कुछ न बताने की धमकी दी।
₹3000 में दो कश्मीरियों ने आतंकियों को दी पनाह
जाँच एजेंसियों के मुताबिक, हमले में शामिल आतंकी परवेज और बशीर अहमद के घर 5 घंटे रुके और खाना भी खाया। घर से निकलते समय आतंकियों ने कुछ खाना, कंबल और बर्तन भी पैक किए थे। यानी बशीर और परवेज को आतंकियों के मंसूबे बेहतर तरीके से पता थे। दोनो को पता था कि इलाके में आतंकी हमला होने वाला है। लेकिन उन्होंने इसकी जानकारी सुरक्षा एजेंसियों को नहीं दी। इसकी जगह दोनों ने आतंकियों से ₹3000 लेकर उनकी मदद की और चुप्पी साधे रहे।
अगर समय रहते परवेज और बशीर जाँच एजेंसियों को इस बारे में सूचना दे देते तो हमले को टाला जा सकता था। अब ये दोनों उन तीन पाकिस्तानी आतंकियों को पनाह देने के आरोप में जेल में हैं।
NIA ने ‘फॉल्स फ्लैग’ नैरेटिव का किया खुलासा
NIA ने ‘फॉल्स फ्लैग’ प्रोपेगेंडा का भी खुलासा किया। जाँच में पता लगा कि ‘कश्मीर फाइट’ और ‘द रेसिस्टेंट फ्रंट ऑफिशियल’ नाम से टेलीग्राम चैनल को पाकिस्तान से ऑपरेट किया जा रहा था, जिसे जाँच एजेंसियों को गुमराह करने के लिए और हमले को फॉल्स फ्लैग ऑपरेशन बताने के लिए प्रोपेगेंडा फैलाया जा रहा थाय़

