मध्य प्रदेश हाई कोर्ट की इंदौर खंडपीठ ने धर्म छुपाकर शादी करने और पत्नी को छोड़ देने के मामले में हिंदू महिला के पक्ष में महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। कोर्ट ने आरोपित मुस्तफा बोहरा को महिला और उसकी बेटी के भरण-पोषण के लिए हर महीने कुल 20 हजार रुपए देने का निर्देश दिया है।
इसके अलावा पिछले पाँच वर्षों के बकाया भरण-पोषण के रूप में 10.60 लाख रुपए एकमुश्त देने का आदेश भी दिया गया है। महिला की ओर से पेश पक्ष के अनुसार, कोविड काल के दौरान वर्ष 2020 में मुस्तफा बोहरा ने खुद को गब्बर नाम का हिंदू बताकर युवती से विवाह किया था।
आरोप है कि शादी हिंदू रीति-रिवाजों के अनुसार हुई और इस दौरान उसने अपनी धार्मिक पहचान छुपाई। कुछ समय बाद महिला गर्भवती हुई और बाद में उसे उसकी वास्तविक पहचान की जानकारी मिली। महिला का आरोप है कि जब उसने मुस्तफा से इस बारे में सवाल किया तो विवाद बढ़ गया और उस पर धर्म परिवर्तन का दबाव बनाया गया।
विरोध करने के बाद उसे अलग रहने की स्थिति में आना पड़ा और उसने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई। इसके बाद मामला फैमिली कोर्ट पहुँचा, जहाँ पहले केवल बच्ची के लिए सीमित भरण-पोषण तय किया गया था। बाद में महिला ने हाई कोर्ट का रुख किया, जिसके बाद कोर्ट ने महिला और उसकी बेटी के लिए मासिक सहायता और बकाया भुगतान का निर्देश दिया।

