जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने आतंकी संगठनों लश्कर-ए-तैयबा और हिज्ब-उल-मुजाहिदीन से जुड़े दो सरकारी कर्मचारियों को बर्खास्त कर दिया है। यह कार्रवाई भारतीय संविधान के अनुच्छेद 311(2)(c) के तहत की गई है, जिसका उद्देश्य सरकारी तंत्र में घुसे आतंकी तत्वों को खत्म करना है।
बर्खास्त कर्मचारियों में रामबन के शिक्षा विभाग का चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी फरहत अली खांडे और बांदीपोरा के ग्रामीण विकास विभाग का मोहम्मद शफी डार शामिल हैं। जाँच एजेंसियों के अनुसार, फरहत 2011 से आतंकी गतिविधियों में शामिल था और हवाला के जरिए आतंकियों के परिवारों तक पैसे पहुँचाने के साथ नेटवर्क मजबूत करने का काम करता रहा।
जमानत मिलने के बाद भी उसने गतिविधियाँ जारी रखीं और 2022 में उसके खिलाफ चार्जशीट दाखिल हुई। वहीं, शफी डार को अनुकंपा के आधार पर नौकरी मिली थी, लेकिन वह लश्कर के लिए काम करने लगा। वह आतंकियों को ठिकाने, लॉजिस्टिक मदद और सुरक्षा बलों की जानकारी देता था। अप्रैल 2025 में उसे AK-56 और ग्रेनेड के साथ पकड़ा गया।
LG सिन्हा ने कहा है कि आतंकवाद के खिलाफ जीरो-टॉलरेंस नीति जारी रहेगी और अब तक 90 से ज्यादा कर्मचारियों को बर्खास्त किया जा चुका है।

