कर्नाटक के धारवाड़ में प्रतियोगी परीक्षा के अभ्यर्थी कॉन्ग्रेस सरकार का विरोध कर रहे हैं। गुरुवार (25 सितंबर 2025) को हजारों की संख्या में अभ्यर्थी सड़कों पर उतर गए। प्रदर्शनकारियों की माँग है कि कर्नाटक सरकार पिछले एक साल से रुकी हुई सरकारी पदों की भर्ती जल्द शुरू करे और पुलिस कॉन्सटेबल पद पर भर्ती के लिए आयु सीमा बढ़ाए।
VIDEO | Karnataka: A massive protest was held in Dharwad under the leadership of the Akhila Karnataka State Students’ Association. Thousands of students took to the streets demanding that the government increase the age limit in recruitment and begin the hiring process… pic.twitter.com/JiiIJzKSec
— Press Trust of India (@PTI_News) September 25, 2025
गुरुवार (25 सितंबर 2025) को अखिल कर्नाटक छात्र संघ के बैनर तेल हुए इस प्रदर्शन में अभ्यर्थियों ने प्रदेश की कॉन्ग्रेस सरकार के खिलाफ मोर्चा खोला और विरोध में नारेबाजी की। प्रदर्शनकारियों ने कहा कि सरकार रिक्त पदों की भर्ती नहीं कर रही है, जिससे युवाओं बेरोजगारी से जूझ रहे हैं।
ये प्रदर्शन कर्नाटक के धारवाड़ जिले में हो रहे है, जिसे ‘प्रतियोगी परीक्षाओं की काशी’ भी कहा जाता है। प्रदेशभर से युवा यहाँ प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी के लिए पहुँचते हैं। ये अभ्यर्थी अब कर्नाटक की कॉन्ग्रेस सरकार से नाराज है।
कर्नाटक के सीएम सिद्दारमैया का अभ्यर्थियों से वादा अधूरा
दरअसल, कर्नाटक की कॉन्ग्रेस सरकार ने अक्टूबर 2024 में अनुसूचित जाति (SC) को आंतरिक आरक्षण लागू करने की प्रक्रिया के तहत सरकारी भर्तियों पर रोक लगा दी। आरक्षण देने की माँग को लेकर समिति भी गठित हुई, जिसने हाल ही में अगस्त 2025 में रिपोर्ट सरकार को सौंपी है।
रिपोर्ट को कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्दारमैया के अधीन मंत्रिमंडल की मंजूरी भी मिल गई, जिसमें अनुसूचित जातियों के लिए 17 प्रतिशत आरक्षण को कम करते हुए एक आरक्षण मैट्रिक्स बनाया गया। इसमें दलित दक्षिणपंथी (होलेयास) और दलित वामपंथी (मडिगा) समूहों को 6 प्रतिशत और लम्बानी कोरमा, कोराचा और भोविस (स्पृश्य जातियों) के साथ-साथ 59 सूक्ष्म समुदायों को 5 प्रतिशत आरक्षण दिया गया।
इसके बावजूद सिद्दारमैया सरकार ने सरकारी पदों पर भर्तियाँ दोबारा चालू नहीं की। ऐसे में अभ्यर्थियों को सीएम सिद्दारमैया का वो एक महीने पुराना वादा याद आया, जिसमें विधानसभा सत्र के दौरान उन्होंने कहा था कि आंतरिक आरक्षण लागू होते ही भर्तियाँ चालू हो जाएँगी। इस वादे को भी एक महीने बीत गया और अभ्यर्थियों का गुस्सा बढ़ता गया, जिसका नतीजा धारवाड़ में हो रहा विरोध-प्रदर्शन है।

