इंदौर के देपालपुर के रहने वाले राजेंद्र चौधरी को न्यायालय ने मक्का मस्जिद, समझौता एक्सप्रेस और मालेगाँव ब्लास्ट जैसे सभी गंभीर आरोपों से सम्मानपूर्वक बरी कर दिया है। उस समय कॉन्ग्रेस की सरकार थी, जब राजेंद्र चौधरी पर बेबुनियाद आरोप लगाए गए थे।
बुधवार (22 अप्रैल 2026) को आए अदालती फैसले के बाद राजेंद्र ने अपनी आपबीती सुनाते हुए बताया कि वे निर्दोष थे और उन्हें षड्यंत्र के तहत फँसाया गया था।
राजेंद्र के मुताबिक, उनका सपना PSC अधिकारी बनकर समाज सेवा करने का था और उन्होंने पहले प्रयास में प्रारंभिक परीक्षा भी पास कर ली थी, लेकिन गिरफ्तारी ने उनकी पूरी जिंदगी बदल दी। दिसंबर 2012 में राष्ट्रीय जाँच एजेंसी (NIA) ने उन्हें तब गिरफ्तार किया था जब वे एक गाँव में रामायण का पाठ कर रहे थे।
राजेंद्र ने आरोप लगाया कि हिरासत के दौरान उन्हें भीषण मानसिक और शारीरिक यातनाएँ दी गईं। उन्हें अंधेरी कोठरी में अकेला रखना, बिजली के झटके देना और जबरन कोरे कागजों पर हस्ताक्षर कराने जैसे कृत्य किए गए। उन्हें सोने तक नहीं दिया जाता था और परिवार को फँसाने की धमकियाँ दी जाती थीं।
करीब 12 साल जेल में बिताने और लंबे कानूनी संघर्ष के बाद अब वे पूरी तरह दोषमुक्त हो चुके हैं। राजेंद्र ने भारतीय न्याय व्यवस्था के प्रति अपनी गहरी आस्था व्यक्त की है।

