मिडिल ईस्ट में चल रही जंग अब सिर्फ सैन्य टकराव नहीं रही, बल्कि सीधे ‘ऑयल वॉर’ यानी तेल युद्ध में बदल गई है। इजरायल द्वारा ईरान के दुनिया के सबसे बड़े साउथ पार्स गैस फील्ड पर हमले के बाद ईरान ने कतर के रास लफान और संयुक्त अरब अमीरात की एनर्जी सुविधाओं पर जवाबी हमले शुरू कर दिए। इससे वैश्विक तेल-गैस सप्लाई बाधित हो गई है और भारत जैसे आयात पर निर्भर देशों में ऊर्जा संकट गहरा गया है।
इजरायली-अमेरिकी अटैक से भड़का ईरान
इस जंग को शुरू हुए लगभग बीस दिन हो चुके हैं। ईरान की टॉप लीडरशिप को भारी नुकसान पहुँचा है, लेकिन तेहरान अब भी अमेरिकी ठिकानों और इजरायल पर मिसाइलें दाग रहा है। इजरायल की तरफ से भी एयर स्ट्राइक जारी है। बुधवार (18 मार्च 2026) को इजरायल ने ईरान के खाड़ी तट पर स्थित असालुयेह के पास साउथ पार्स गैस फील्ड पर हमला किया, जिसमें कई गैस भंडार और सुविधाएँ क्षतिग्रस्त हो गईं। ईरानी सरकारी मीडिया ने इसे दुनिया की सबसे बड़ी गैस संसाधन आपूर्ति पर हमला बताया।
कतर-यूएई के गैस फील्ड पर दागी मिसाइलें
ईरान ने तुरंत जवाबी कार्रवाई की। उसने कतर, सऊदी अरब और यूएई को चेतावनी दी कि उनके ऊर्जा ढाँचे निशाना बनाए जाएँगे। कुछ घंटों बाद ही ईरान ने कतर के रास लफान इंडस्ट्रियल सिटी पर मिसाइल हमला किया। कतर एनर्जी कंपनी ने बयान जारी कर कहा, “एक मिसाइल ने हमारी विशाल रास लफान एलएनजी सुविधा पर हमला किया, जिससे आग लग गई और ढाँचागत रूप से भारी नुकसान हुआ। हमने पहले ही प्रोडक्शन रोक दिया था।” कंपनी ने आग पर काबू पा लिया, लेकिन किसी के घायल होने की खबर नहीं आई।
कतर सरकार ने इस हमले को ‘राष्ट्रीय सुरक्षा पर सीधा खतरा’ बताया। विदेश मंत्रालय ने कहा, “ईरान की तनाव बढ़ाने वाली नीतियां क्षेत्र को खतरनाक स्थिति की ओर धकेल रही हैं। हम जवाब देने का अधिकार सुरक्षित रखते हैं और अपनी संप्रभुता व नागरिकों की सुरक्षा के लिए हर जरूरी कदम उठाएँगे।” कतर ने ईरान के दो राजनयिकों को निष्कासित कर दिया।
सऊदी अरब पर भी ईरानी हमले तेज
सऊदी अरब ने बताया कि उसने पूर्वी इलाके में ऊर्जा सुविधाओं को निशाना बनाकर भेजे गए ड्रोन को मार गिराया। रियाद के दक्षिण में एक रिफाइनरी के पास बैलिस्टिक मिसाइल का मलबा गिरा। यूएई ने भी अपनी गैस सुविधाओं पर संभावित हमलों के बाद उत्पादन रोक दिया। ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य के रास्ते तेल-एलएनजी निर्यात रोक दिया, जिससे वैश्विक सप्लाई चेन प्रभावित हुई।
इससे तेल की कीमतों में भारी उछाल आया। अमेरिकी कच्चे तेल में तीन प्रतिशत से ज्यादा की बढ़ोतरी दर्ज हुई। होर्मुज स्ट्रेट से जहाजों की आवाजाही लगभग ठप हो गई।
भारत पर पड़ सकता है बड़ा असर
भारत पर सबसे ज्यादा असर पड़ रहा है क्योंकि कतर भारत का सबसे बड़ा गैस सप्लायर है। भारत हर साल करीब 27 मिलियन टन एलएनजी आयात करता है, जिसमें 47 प्रतिशत यानी 12-13 मिलियन टन कतर से आता है। रास लफान पर हमले और होर्मुज बंद होने से कई गैस टैंकर समंदर में फंसे हैं। भारत ईरान से बात कर जहाज निकाल रहा है, लेकिन कीमतें बढ़ने और सप्लाई रुकने से पेट्रोल-डीजल, बिजली और उद्योग पर बोझ बढ़ेगा।

