मिडिल ईस्ट में छिड़े सैन्य संघर्ष का सीधा असर अब भारतीय समुद्री व्यापार और नाविकों पर दिखने लगा है। फारस की खाड़ी (Persian Gulf) में भारत के 38 जहाज फँस गए हैं, जिन पर लगभग 1,100 भारतीय नाविक सवार हैं। ये जहाज कच्चा तेल और गैस (LNG) लेकर जा रहे थे। इस बीच एक दुखद खबर यह भी आई है कि ओमान के पास विदेशी जहाजों पर हुए हमलों में 3 भारतीय नाविकों की जान चली गई है।
खाड़ी में क्या है मौजूदा स्थिति?
डीजी शिपिंग के अनुसार, तनाव की वजह से भारतीय ध्वज वाले 38 जहाज बीच रास्ते में ही रुक गए हैं। इनमें से 24 जहाज ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ के पश्चिमी हिस्से में हैं और 14 पूर्वी हिस्से में। हालाँकि, राहत की बात यह है कि भारतीय झंडे वाले किसी भी जहाज पर अब तक कब्जे या किसी नाविक को हिरासत में लेने की खबर नहीं है। लेकिन विदेशी जहाजों पर काम कर रहे भारतीयों के लिए खतरा बढ़ गया है, जहाँ 3 की मौत और 1 के घायल होने की पुष्टि हुई है।
BREAKING || 38 Indian ships stuck in the Persian Gulf.
— TIMES NOW (@TimesNow) March 5, 2026
– At least three Indian crew members are dead.@Srinjoyc1 & @aakaaanksha share more updates. pic.twitter.com/6PJZ5JXAqn
सरकार ने शुरू की हाई-लेवल मीटिंग
मामले की गंभीरता को देखते हुए केंद्रीय शिपिंग मंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने मंगलवार (3 मार्च 2026) को एक इमरजेंसी मीटिंग बुलाई। उन्होंने अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए हैं कि भारतीय नाविकों और जहाजों की सुरक्षा हर हाल में सुनिश्चित की जाए। आपको बता दें कि इस समुद्री क्षेत्र में अलग-अलग जहाजों पर करीब 23,000 भारतीय नाविक तैनात रहते हैं। भारत दुनिया में नाविकों की सप्लाई करने वाला तीसरा सबसे बड़ा देश है।
बदल गए समुद्री रास्ते, बढ़ा खर्च और समय
युद्ध जैसे हालात को देखते हुए कई बड़ी शिपिंग कंपनियों ने अपनी सेवाएँ अस्थायी रूप से रोक दी हैं। जो जहाज पहले स्वेज नहर के छोटे रास्ते से जाते थे, उन्हें अब अफ्रीका के ‘केप ऑफ गुड होप’ होकर घूमकर जाना पड़ रहा है। इससे न सिर्फ सफर का समय बढ़ गया है, बल्कि माल ढोने का खर्च (परिचालन लागत) भी काफी ज्यादा हो गया है।
इस संकट का असर अब भारतीय पोर्ट्स पर भी दिखने लगा है। माल से लदे कंटेनर्स लगातार बंदरगाहों पर पहुँच रहे हैं, जिससे वहाँ भारी भीड़ जमा हो गई है। फिलहाल करीब 1,000 कंटेनर लोड-अनलोड होने के इंतजार में फँसे हैं। खाड़ी देशों जाने वाले कई जहाजों को अब बीच रास्ते में ही फुजैरा या सोहर जैसे सुरक्षित बंदरगाहों पर उतारा जा रहा है, जहाँ से माल को सड़क के रास्ते दुबई और अन्य शहरों तक पहुँचाया जा रहा है।

