‘खाड़ी देशों में रह रहे भारतीयों की सुरक्षा हमारी प्राथमिकता’: विदेश मंत्रालय का ईरान और इजरायल-US संघर्ष पर बयान, कहा- बातचीत और कूटनीति ही है रास्ता

अमेरिका-इजरायल के ईरान पर हमले के बाद मिडिल ईस्ट में शुरू हुई जंग को लेकर भारत के विदेश मंत्रालय की ओर से बयान जारी किया गया है। भारत ने मिडिल ईस्ट में बातचीत और कूटनीति से समाधान निकालने की बात दोहराई है। विदेश मंत्रालय का कहना है कि खाड़ी देशों में करीब एक करोड़ भारतीय हैं जिनकी सुरक्षा हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता है।

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने X पर भारत की प्रतिक्रिया शेयर की है जिसमें MEA ने 7 बिंदुओं में अपनी बात रखी है। विदेश मंत्रालय ने कहा कि संघर्ष शुरू होते ही भारत ने चिंता व्यक्त करते हुए सभी पक्षों से संयम बरतने, हालात को और न बिगाड़ने की अपील की थी लेकिन रमजान में स्थिति और खराब हो गई है। MEA ने कहा, “पिछले कुछ दिनों में न सिर्फ संघर्ष तेज हुआ है, बल्कि यह अन्य देशों तक भी फैल गया है। तबाही और मौतों की संख्या बढ़ती जा रही है। सुरक्षा व स्थिरता से सीधे जुड़े हित होने के कारण ये घटनाक्रम भारत के लिए गंभीर चिंता का विषय हैं।”

विदेश मंत्रालय ने आगे कहा, “खाड़ी क्षेत्र में लगभग एक करोड़ भारतीय नागरिक रहते और काम करते हैं। उनकी सुरक्षा और भलाई हमारे लिए सर्वोच्च प्राथमिकता है। भारत का व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति मार्ग भी इसी क्षेत्र से होकर गुजरते हैं। यहाँ किसी बड़े व्यवधान का भारतीय अर्थव्यवस्था पर गंभीर असर पड़ता है। भारत व्यापारी जहाजों पर हमलों का भी कड़ा विरोध करता है। पिछले कुछ दिनों में ऐसे हमलों के कारण कुछ भारतीय नागरिकों की जान गई है या वे लापता हैं।”

MEA ने कहा, “समाधान का रास्ता बातचीत और कूटनीति ही है। हम स्पष्ट रूप से इस संघर्ष को जल्द से जल्द खत्म करने की अपील करते हैं। अब तक कई लोगों की जान जा चुकी है, जिस पर हमें गहरा दुख है। भारतीय दूतावास और वाणिज्य दूतावास वहाँ रह रहे भारतीयों और सामुदायिक संगठनों के लगातार संपर्क में हैं।” विदेश मंत्रालय ने कहा कि सरकार हालात पर लगातार नजर बनाए रखेगी और राष्ट्रीय हित को ध्यान में रखते हुए जरूरी फैसले लेती रहेगी।