सरकारी वाहनों के दुरुपयोग पर रोक लगाने, अनावश्यक खर्च घटाने और संसाधनों के बेहतर प्रबंधन के उद्देश्य से केंद्र सरकार ने नौकरशाही के लिए नई व्यवस्था लागू कर दी है। वित्त मंत्रालय के व्यय विभाग ने ‘एक अधिकारी, एक सरकारी गाड़ी’ (One Entitled Officer, One Official Car) की नीति लागू की है।
सरकार ने स्पष्ट कर दिया है कि अब किसी अधिकारी को अतिरिक्त जिम्मेदारी मिलने पर दूसरी सरकारी कार आवंटित नहीं की जाएगी। यह व्यवस्था सभी केंद्रीय मंत्रालयों, विभागों और संबद्ध संस्थाओं में समान रूप से लागू होगी।
India introduces a strict 'one-officer, one-car rule,' banning senior bureaucrats from using multiple official vehicles. pic.twitter.com/ouf5rZyWAx
— Digital Bharat (@MDigitalBharat) July 28, 2026
व्यय विभाग द्वारा जारी कार्यालय ज्ञापन के अनुसार, यदि किसी अधिकारी के पास उसकी मूल नियुक्ति के लिए पहले से सरकारी वाहन उपलब्ध है और उसे किसी अन्य मंत्रालय, विभाग, सार्वजनिक उपक्रम (PSU), स्वायत्त निकाय (Autonomous Body) या किसी अन्य सरकारी संस्था का अतिरिक्त प्रभार दिया जाता है, तब भी उसे दूसरी सरकारी गाड़ी नहीं मिलेगी।
सरकार ने सभी मंत्रालयों और विभागों को इस नियम का सख्ती से पालन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। साथ ही जिन सरकारी वाहनों का फिलहाल उपयोग नहीं हो रहा है, उन्हें सुरक्षित स्थान पर रखने और उनके अनावश्यक इस्तेमाल को रोकने के लिए भी कहा गया है।
PSU और स्वायत्त संस्थाओं की गाड़ियों के उपयोग पर भी सख्ती
नई व्यवस्था के तहत केंद्रीय सरकारी अधिकारी अब सार्वजनिक उपक्रमों, स्वायत्त निकायों, अर्द्ध-सरकारी संस्थाओं या अन्य संबद्ध संगठनों की गाड़ियों का नियमित या निजी उपयोग भी नहीं कर सकेंगे। कोई अधिकारी किसी आधिकारिक दौरे या सरकारी कार्य के सिलसिले में संबंधित संस्था में मौजूद है, तो उस दौरान वहाँ उपलब्ध वाहन का उपयोग किया जा सकेगा।
सरकार का कहना है कि इस कदम से अलग-अलग संस्थाओं के वाहनों के समानांतर उपयोग और संसाधनों की अनावश्यक पुनरावृत्ति पर रोक लगेगी।
2022 के निर्देशों को और प्रभावी बनाने की पहल
वित्त मंत्रालय ने बताया कि यह आदेश सितंबर 2022 में सरकारी स्टाफ कारों के उपयोग को लेकर जारी दिशा-निर्देशों को और प्रभावी ढंग से लागू करने के उद्देश्य से जारी किया गया है। नया कार्यालय ज्ञापन सभी केंद्रीय मंत्रालयों, विभागों, वित्तीय सलाहकारों और संबंधित अधिकारियों को भेज दिया गया है ताकि पूरे केंद्रीय प्रशासन में एक समान व्यवस्था लागू हो सके।
सरकार का मानना है कि ‘एक अधिकारी, एक सरकारी गाड़ी’ की नीति से सरकारी संसाधनों का अधिक विवेकपूर्ण उपयोग होगा, एक ही अधिकारी को कई वाहनों के आवंटन जैसी व्यवस्था समाप्त होगी और ईंधन, रखरखाव तथा संचालन पर होने वाले अनावश्यक खर्च में कमी आएगी। इसके साथ ही सार्वजनिक धन का बेहतर उपयोग, प्रशासनिक पारदर्शिता, जवाबदेही और वित्तीय अनुशासन को भी मजबूती मिलेगी।

